हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के लिए अमेरिका ने इन देशों के साथ बनाई सहमति, भारत को नहीं मिली जगह

अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बनाए जा रहे संगठन ऑकस में भारत को जगह नहीं मिलेगी।

जो बाइडन और पीएम मोदी के अमेरिका पहुंचने की तस्वीर। क्रेडिट- जो बाइडन और पीएम मोदी का ट्विटर हैंडल

अमेरिका ने हाल में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ मिलकर बनाए त्रिपक्षीय गठबंधन ‘ऑकस’ (AUKUS) बनाया है। इसमें भारत को शामिल करने पर यूएसए ने इनकार कर दिया है। पहले कहा जा रहा था कि भारत और जापान को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने बुधवार को कहा कि पिछले हफ्ते ऑकस की घोषणा केवल सांकेतिक नहीं थी और मुझे लगता है कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों को यही संदेश दिया है कि हिंद-प्रशांत की सुरक्षा के लिए बनाए गठबंधन में किसी अन्य देश को शामिल नहीं किया जाएगा।

साकी से सवाल किया गया था कि क्या भारत या जापान को इस गठबंधन में शामिल किया जाएगा, जिसके जवाब में उन्होंने यह जवाब दिया। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के लिए नए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ‘ऑकस’ (एयूकेयूएस) की 15 सितंबर को घोषणा की थी, ताकि वे अपने साझा हितों की रक्षा कर सकें और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकें। इस समझौते के कारण उसने फ्रांस के साथ अनुबंध रद्द कर दिया है।

फ्रांस ने गठबंधन में उसको शामिल ना करने की आलोचना की थी और कहा था कि जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है तो यह आपसी सहभागिता की कमी को दर्शाता है। साकी ने कहा, ‘‘ यकीनन, इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष रुचि रखने वाले फ्रांस समेत कई देशों के साथ बातचीत जरूरी है।’’

उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मिलेंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से गुरुवार को मुलाकात करेंगे। यह हैरिस की मोदी (71) के साथ पहली बैठक होगी। मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रवासी भारतीयों के हितों की न केवल हिमायत की है, बल्कि विश्व स्तर पर भी उनके हितों के मामले उठाने पर कभी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। प्रधानमंत्री विदेश यात्राओं में स्वयं भी भारतीय समुदायों के साथ संवाद करते है।

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