ताज़ा खबर
 

डूब जाएगा स्विस बैंक में जमा इन भारतीयों का पैसा? स्थानीय सरकार को किया जा सकता है ट्रांसफर

उपलब्ध ब्योरे के मुताबिक भारतीयों से जुड़े जो निष्क्रिय खाते हैं, उनमें कलकत्ता (अब कोलकाता के रूप में जाना जाता है) के कम से कम दो व्यक्ति शामिल हैं, एक देहरादून से, दो पूर्ववर्ती बंबई (अब) मुंबई के रूप में जाना जाता है) और कुछ भारतीय भी फ्रांस और ब्रिटेन में बस गए।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

भारतीय नागरिकों से जुड़े करीब एक दर्जन निष्क्रिय स्विस बैंक खाते के लिए पिछले कई सालों से कोई दावेदार सामने नहीं आया है। ऐसे में इन खातों में जमा धन के स्विट्जरलैंड सरकार को हस्तांतरित होने का खतरा है। स्विस सरकार ने साल 2015 में निष्क्रिय खातों की जानकारी सार्वजनिक करना शुरू की थी, ताकि उनके दावेदारों को धन उन तक पहुंचाने के लिए जरूरी सबूत जमा करने की अनुमति मिल सके, जिसमें भारतीयों से जुड़े करीब एक दर्जन खाते शामिल थे। इसमें ब्रिटिश शासन काल से भारतीय निवासियों और नागरिकों के कुछ खाते शामिल थे, मगर समस्या यह है कि स्विस अधिकारियों के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले छह सालों में एक भी भारतीय से जुड़े निष्क्रिय खातों का सफलतापूर्वक दावा नहीं किया गया है। इनमें से कुछ खाताधारकों के विवरण सौंपने की मियाद अगले महीने और बाकी के लिए अगले साल दिसंबर तक है।

संयोग से, पाकिस्तान के निवासियों से जुड़े कुछ खातों पर दावा किया गया है। इसी तरह अन्य देशों के निवासियों से जुड़े कई अन्य खातों पर भी दावा किया गया है। उपलब्ध ब्योरे के मुताबिक भारतीयों से जुड़े जो निष्क्रिय खाते हैं, उनमें कलकत्ता (अब कोलकाता के रूप में जाना जाता है) के कम से कम दो व्यक्ति शामिल हैं, एक देहरादून से, दो पूर्ववर्ती बंबई (अब) मुंबई के रूप में जाना जाता है) और कुछ भारतीय भी फ्रांस और ब्रिटेन में बस गए। अन्य निष्क्रिय खाताधारकों में चंद्रलता प्राणलाल पटेल, मोहन लाल, किशोर लाल, रोजमैरी बर्नेट, पियरे वाचेक, चंद्र बहादुर सिंह, योगेश प्रभुदास सूचाह के नाम शामिल हैं।

स्विस नियम के मुताबिक अगर 60 साल तक खाताधारकों से कोई संपर्क ना हो तो इन्हें निष्क्रिय घोषित कर दिया जाता है। इसके अलावा खातों में 500 स्वीस फ्रैंक से अधिक रकम होने पर दावे आमंत्रित किए जाते हैं। निष्क्रिय खाते की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद दावा पेश करने के लिए 1 से 5 साल तक का वक्त दिया जाता है। इसके बाद अगर कोई दावा पेश नहीं करता है तो खाते की सारी रकम सरकार कब्जे में ले लेती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 सिख समुदाय के सम्मान में अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्ताव पेश
2 बीमार नवाज शरीफ को उपचार के लिए लंदन लेकर जाएंगे उनके भाई शहबाज
3 पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने अयोध्या फैसले की टाइमिंग पर उठाए सवाल, कहा- मुस्लिम समुदाय पर पड़ेगा दबाव
ये पढ़ा क्या?
X