भारत और अमेरिका के बीच ग्रीन कार्ड को लेकर बदले गए नियमों के कारण नया विवाद उभर सकता है। दरअसल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बड़ा आव्रजन बदलाव करते हुए घोषणा की है। बदले हुए नियम के अनुसार अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को अब ग्रीन कार्ड यानी परमानेंट सिटिजनशिप के लिए आवेदन करने अपने गृह देश लौटना होगा। ग्रीन कार्ड एक ऐसा दस्तावेज जो किसी व्यक्ति को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है।

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) की यह घोषणा पिछले 50 वर्षों से चली आ रही व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। इसका असर खासतौर पर उन हजारों भारतीयों पर पड़ सकता है जो फिलहाल अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं।

आवेदन के लिए अपने देश लौटना होगा

अब तक अमेरिका में मौजूद विदेशी कर्मचारी एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस प्रक्रिया के तहत वहीं रहते हुए अस्थायी वीजा से स्थायी निवास की श्रेणी में बदलाव के लिए आवेदन कर सकते थे। लेकिन USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, “अब से जो विदेशी अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड चाहते हैं, उन्हें आवेदन के लिए अपने देश लौटना होगा। असाधारण परिस्थितियां अपवाद हैं।”

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका में लगभग 15 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड धारक हैं, जबकि करीब 12 लाख हाईली स्किल्ड भारतीय और उनके आश्रित रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे हुए हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को नए ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, जिससे भारत अमेरिका में स्थायी निवास पाने वाले लोगों का दूसरा सबसे बड़ा देश बना हुआ है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नया नियम केवल नई ग्रीन कार्ड अर्जियों पर लागू होगा। हालांकि, इमिग्रेशन वकीलों और विशेषज्ञों ने इस फैसले को अचानक और अव्यवहारिक बताया है। उनका कहना है कि इससे आवेदकों को अपने देश लौटने की बड़ी परेशानी झेलनी पड़ेगी और अमेरिकी विदेश विभाग को आवेदन स्वीकार या खारिज करने के लिए ज्यादा विवेकाधिकार मिल जाएगा।

अमेरिका आना प्रक्रिया का पहला कदम नहीं

नई दिल्ली स्थित एक इमिग्रेशन वकील के अनुसार पहले अगर कोई व्यक्ति नियमों का पालन करता था, टैक्स भरता था और उसके दस्तावेज पूरे होते थे तो ग्रीन कार्ड मिलना लगभग तय माना जाता था। लेकिन अब यह प्रक्रिया अधिक अनिश्चित और स्पेसिफिक हो सकती है। USCIS ने अपने बयान में साफ कहा है कि छात्र, टेंपररी एंप्लॉमेंट या टूरिस्ट वीजा पर आने वाले लोग अमेरिका में सीमित समय और विशेष उद्देश्य से आते हैं। एजेंसी के मुताबिक, “उनकी यात्रा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं होनी चाहिए।”

बेंगलुरु स्थित अमेरिकी आव्रजन सलाहकार सुकन्या रमन ने कहा कि पहले USCIS विवेकाधिकार का इस्तेमाल केवल धोखाधड़ी, आपराधिक मामलों या स्पष्ट नियम उल्लंघन जैसी परिस्थितियों में करता था। लेकिन अब एलिजिब्लिटी होने के बावजूद मंजूरी को स्वचालित अधिकार की बजाय “विवेकाधीन निर्णय” के रूप में देखा जा सकता है।

अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। डेमोक्रेट सांसदों ने इसे अमानवीय और लापरवाह करार दिया है। कांग्रेसवुमन ग्रेस मेंग ने कहा, “यह नीति हर साल लाखों लोगों पर भारी मानवीय असर डालेगी। हम इसे पलटने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”

आर्थिक योगदान का नुकसान होगा

एरिजोना से डेमोक्रेट सांसद ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि अमेरिका दुनिया के बेहतरीन डॉक्टरों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने में सफल रहा है क्योंकि वहां वर्क वीजा कार्यक्रम मजबूत रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि नए नियम से अमेरिका को प्रतिभा, कर राजस्व और आर्थिक योगदान का नुकसान होगा।

USCIS का कहना है कि इस बदलाव से अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावास विदेशों में अधिकांश ग्रीन कार्ड मामलों को संभाल सकेंगे और एजेंसी अपने सीमित संसाधनों को अन्य प्राथमिक मामलों पर केंद्रित कर पाएगी। इनमें हिंसक अपराध और मानव तस्करी के पीड़ितों के वीजा, नागरिकता आवेदन और अन्य प्राथमिकताएं शामिल हैं।

आलोचकों ने यह भी कहा है कि कई देशों में अमेरिका प्रवासी वीजा आवेदन प्रक्रिया संचालित ही नहीं करता, जिससे आवेदकों को लंबे समय तक परिवार से अलग रहना पड़ सकता है, जबकि ग्रीन कार्ड मिलने की कोई गारंटी भी नहीं होगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह नई नीति कब से लागू होगी। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन की कई आव्रजन नीतियों पर अदालतों ने रोक लगाई थी। कानूनी विशेषज्ञों ने प्रभावित लोगों को कोई कदम उठाने से पहले इमिग्रेशन वकील से सलाह लेने की सलाह दी है।

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अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने साफ कर दिया है कि अब अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे अधिकांश विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए अपने गृह देश लौटकर ही आवेदन करना होगा। पूरी खबर पढ़ें…