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नेपाली प्रधानमंत्री की गीदड़ भभकी, कालापानी से फौज हटाए भारत

ओली ने दावा किया कि नेपाल-भारत और तिब्बत के ट्राई जंक्शन पर स्थित कालापानी का इलाका उसके क्षेत्र में आता है।

Author Published on: November 19, 2019 6:16 AM
नेपाली प्रधानमंत्री के निजी सचिव की ओर जारी बयान में कहा गया है, ‘हमारी राष्ट्रभक्त सरकार किसी को भी नेपाल की सरजमीं का एक इंच भी अतिक्रमण नहीं करने देगा।

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत सरकार द्वारा जारी नए राजनीतिक नक्शे पर आपत्ति जताई है। नक्शे में भारत-नेपाल-तिब्बत के ट्राइ-जंक्शन पर स्थित कालापानी के चित्रण को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि भारत वहां से अपनी सेना तत्काल हटा ले। उन्होंने कहा कि कालापानी नेपाल की जमीन है। काठमांडो में दिए उनके इस बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने संयत प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि नए नक्शे में भारत के संप्रभु क्षेत्रों का सटीक चित्रण है और किसी भी पड़ोसी देश के साथ सीमा को संशोधित नहीं किया गया है।

केंद्र सरकार ने इस महीने की शुरुआत में नवगठित केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दर्शाते हुए भारत के मानचित्र जारी किए थे। इन मानचित्रों में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर, नवसृजित केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है जबकि गिलगित- बल्तिस्तान केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा है। इसको लेकर नेपाल सरकार ने छह नवंबर को बयान जारी किया था, जिस पर काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास ने स्थिति स्पष्ट कर दी थी।
इसके बाद अब नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली के ताजा बयान से तनाव की स्थिति बन गई है।

ओली ने दावा किया कि नेपाल-भारत और तिब्बत के ट्राई जंक्शन पर स्थित कालापानी का इलाका उसके क्षेत्र में आता है। यहां से भारत अपनी फौजें हटा ले। नेपाली प्रधानमंत्री के निजी सचिव की ओर जारी बयान में कहा गया है, ‘हमारी राष्ट्रभक्त सरकार किसी को भी नेपाल की सरजमीं का एक इंच भी अतिक्रमण नहीं करने देगा। पड़ोसी देश भारत को कालापानी क्षेत्र से अपने जवानों को वापस बुला लेना चाहिए।’ उन्होंने इस पर बल दिया कि उनकी सरकार कूटनीति के माध्यम से कालापानी मुद्दे का हल चाहती है। प्रधानमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने अपने सहयोगी संगठन नेपाल स्टूडेंट्स यूनियन को इस मांग के साथ सड़क पर उतार दिया कि विवादित सीमा क्षेत्र से भारतीय सैनिकों की वापसी हो।

दरअसल, उत्तराखंड सीमा पर नेपाल-भारत और तिब्बत के ट्राई जंक्शन पर स्थित कालापानी करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भारत का कहना है कि करीब 35 वर्ग किलोमीटर का यह इलाका उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है। दूसरी ओर, नेपाल सरकार का कहना है कि यह इलाका उसके दारचुला जिले में आता है। वर्ष 1962 में भारत-चीन के बीच युद्ध के बाद से इस इलाके में भारत ने आइटीबीपी के जवानों को तैनात कर रखा है। दोनों देशों के बीच विवाद महाकाली नदी के उद्गम स्थल को लेकर है। यह नदी कालापानी इलाके से होकर गुजरती है।

दोनों देशों के बीच इस विवाद को राजनयिक तरीके से इस विवाद को सुलझाने पर सहमति बनी है और बातचीत भी जारी है। वर्ष 1996 में कालापानी इलाके के संयुक्त विकास के लिए भारत के साथ महाकाली संधि के तुरंत बाद नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन-यूएमएल) ने कालापानी पर दावा करना शुरू कर दिया। इसके बाद नेपाल के चुनावों में कालापानी मुद्दे को नेपाली दलों ने उठाया। इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के रूप में इस्तेमाल किया गया।

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