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नेपाल अपने मुद्दे सुलझा सकता है, भारत चिंता न करे: माओवादी

नेपाल की यूसीपीएन माओवादी पार्टी ने कहा है कि भारत को मधेसियों की समस्याओं में नहीं शामिल होना चाहिए क्योंकि उनका असंतोष नेपाल का अंदरुनी मामला है और वह मुद्दों को सुलझाने में सक्षम है.

Author काठमांडो | November 9, 2015 00:58 am

नेपाल की यूसीपीएन माओवादी पार्टी ने कहा है कि भारत को मधेसियों की समस्याओं में नहीं शामिल होना चाहिए क्योंकि उनका असंतोष नेपाल का अंदरुनी मामला है और वह मुद्दों को सुलझाने में सक्षम है। इस बीच आंदोलनकारी मधेसी पार्टियों द्वारा नेपाल संसद की एक अहम बैठक में व्यवधान डाले जाने के बाद इसकी बैठक कल तक के लिए टाल दी गई।

यूसीपीएन- माओवादी के प्रवक्ता दीनानाथ शर्मा ने कहा, ‘भारत ने अनाधिकारिक नाकेबंदी के जरिए दवाओं, ईंधन और शैक्षणिक सामग्री की आपूर्ति में बाधा डाल कर युद्ध काल के दायित्वों तक का सम्मान नहीं किया।’ उन्होंने कहा, ‘भारत यहां तक कि रक्त एकत्र करने के लिए थैलों को ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही की इजाजत नहीं देकर नेपाल से अमानवीय बर्ताव कर रहा है।’ शर्मा ने कहा, ‘नेपाल के दक्षिणी हिस्से में मधेसियों की समस्या, हमारा अंदरुनी मामला है और हम इसका हल करने में सक्षम हैं।’ उन्होंने कहा कि मधेसियों की समस्याओं के लिए चिंता दिखाने का भारत के पास कोई आधार नहीं है। शर्मा ने दावा किया, ‘हम मधेसी नेताओं के लगातार संपर्क में हैं और वे वार्ता के जरिए इस मुद्दे को हल करने के प्रति सकारात्मक हैं।’

इस बीच, उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री भीम रावल ने कहा कि नेपाल सरकार नए संविधान को लागू करने और नाकेबंदी से पैदा हुई समस्याओं को दूर करने की ओर बढ़ रही है। रावल ने प्रदर्शनकारी पार्टियों से अपना आंदोलन वापस लेने और वार्ता और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने को कहा। मधेसी मोर्चा संसद का बहिष्कार कर रहा है।

आंदोलनकारी मधेसी पार्टियों द्वारा नेपाल संसद की एक अहम बैठक में व्यवधान डाले जाने के बाद इसकी बैठक कल तक के लिए टाल दी गई। प्रदर्शन कर रही पार्टियां सरकार से नए संविधान में अपने उन मुद्दों को सुलझाने की मांग कर रहे हैं जिसने एक राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। संसद की आज बैठक शुरू होने पर मधेसी मोर्चा के सांसदों ने अपनी सीट पर खड़े होकर इसमें व्यवधान डालने की कोशिश की। मोर्चा सदन का बहिष्कार कर रहा है।

हालांकि, स्पीकर ओंसारी घारती ने उन्हें संसद के समक्ष बोलने के लिए वक्त देने का आश्वासन दिया जिसके बाद मधेसी नेताओं ने बैठक को आगे बढ़ने दिया लेकिन बाद में वे नारेबाजी करने लगे जिसके चलते बैठक दोपहर तीन बजे तक सदन की बैठक स्थगित करनी पड़ी। मधेसी मोर्चा के नेता अशोक राय ने अपने संबोधन में कहा कि एकीकृत डेमोक्रेटिक मधेस फ्रंट वार्ता जारी रखने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार को मधेसी मुद्दे का हल करने के प्रति गंभीर होने की जरूरत है। संयुक्त मधेसी मोर्चा के संसद में 35 सांसद हैं। यह संसद का बहिष्कार कर रहा है। इसने संविधान निर्माण की प्रक्रिया से खुद को दूर रखा था ताकि देश को सात प्रांतों में बांटने वाले नए चार्टर के प्रति अपने एतराज को दिखा सके।

इस बीच, सीपीएन (यूएमएल) के उप महासचिव घनश्याम भुसाल ने कहा कि तराई में चल रहा प्रदर्शन न तो राष्ट्र के हित में है और न ही खुद लोगों के हित में है।

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