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चीन से मीटिंग करने पर नेपाल की सत्ताधारी पार्टी में फूट, पूर्व पीएम समेत कई बड़े नेताओं ने किया VC का बहिष्कार

पूर्व प्रधान मंत्री माधव कुमार नेपाल, जो पार्टी के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाग के प्रमुख भी हैं, और पार्टी के वरिष्ठ नेता झलनाथ खनाल चार घंटे की इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग से दूर रहे।

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नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावाली काठमांडू, नेपाल में मंगलवार, 9 जून, 2020 को एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार के दौरान नेपाल के मानचित्र की ओर संकेत करते हुए। (एपी फोटो / निरंजन श्रेष्ठ)

नेपाली संसद के उच्च सदन द्वारा भारत के तीन क्षेत्रों (लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा) को अपने नए नक्शे में शामिल करने के बिल को हरी झंडी देने के अगले ही दिन नेपाल की सत्ताधारी पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में फूट पड़ गई। एनसीपी ने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग रखी थी जिसमें पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल समेत पार्टी के कई बड़े नेता शामिल नहीं हुए। इन नेताओं ने सवाल उठाए कि जब भारत-चीन के बीच लद्दाख के मुद्दे पर तनाव चल रहा है और दोनों देश की सेना भिड़ रही है, तब पार्टी ने ऐसी मीटिंग क्यों बुलाई?

पूर्व प्रधान मंत्री माधव कुमार नेपाल, जो पार्टी के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाग के प्रमुख भी हैं, और पार्टी के वरिष्ठ नेता झलनाथ खनाल चार घंटे की इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग से दूर रहे। हालांकि, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाग के वरिष्ठ सदस्य, सीपीसी तिब्बत स्वायत्तता क्षेत्र और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के स्कूल डिवीजन के अध्यक्ष मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग की अध्यक्षता उप प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल ने की।

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हालांकि,  NCP के सह-अध्यक्ष पुष्प कमल दहल  ‘प्रचंड’ और 30 केंद्रीय नेताओं को काठमांडू में पार्टी दफ्तर में उपस्थित रहने के लिए कहा गया था। माना जा रहा है कि इनके अलावा अलग-अलग प्रांतों के 70 प्रतिनिधियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया। उनके लिए पार्टी दफ्तर में बैठने की व्यवस्था की गई थी। बैठक से निकले एक प्रतिनिधि ने बताया कि मीटिंग में चर्चा का मुख्य केंद्र करप्शन और सुशासन रहा।

सत्ताधारी एनसीपी के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाग के उप प्रमुख बिष्णु रिजाल ने कहा, “हमें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि इस तरह का कोई सम्मेलन इतनी जल्दी में हो रहा है।” पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह बेहद आपत्तिजनक है कि पार्टी ऐसे समय में चीनी समकक्षों की सह-मेजबानी कर रही है, जब नेपाल-भारत संबंध सीमा विवाद और संवैधानिक संशोधन की वजह से तनावपूर्ण स्थिति में है। इसके अलावा, भारत और चीन भी तनाव के दौर से गुजर रहे हैं और दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पें हुई हैं।’

उन्होंने कहा, “ऐसे समय में चीन की गोद में जाना क्योंकि भारत के साथ हमारे सीमा विवाद हैं, कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। यह न तो बुद्धिमान फैसला है और न ही हमारी पार्टी की यह नीति रही है।” पूर्व उप प्रधान मंत्री और विदेश मामलों के मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के समय, इसके आस-पास की मंशा और गोपनीयता पर सवाल उठाए हैं।

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