बालेन शाह के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार की सख्ती ने भारत-नेपाल बॉर्डर पर हलचल बढ़ा दी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती बढ़ने से रोजमर्रा के घरेलू सामान के लिए नेपाली नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल सरकार की तरफ से लागू किए गए नए नियम के मुताबिक, भारत से 100 रुपये से ज्यादा मूल्य का सामान लेकर नेपाल में प्रवेश करने पर अब कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले पर अब भारत की प्रतिक्रिया सामने आई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “आपने बिल्कुल सही कहा, हमने सोशल मीडिया पर कई खबरें देखी हैं। हमें भी ऐसी खबरें मिली हैं जिनमें नेपाली अधिकारियों द्वारा एक पूर्व-मौजूदा प्रावधान को लागू करने की बात कही गई है। इस प्रावधान के तहत सीमा पार यात्रा करने वाले यात्रियों से सीमा शुल्क वसूला जाएगा अगर वे भारत में खरीदी गई ऐसी वस्तुएं ले जा रहे हैं जिनका मूल्य 100 नेपाली रुपये से अधिक है। हम समझते हैं कि नेपाल सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से अनौपचारिक व्यापार और तस्करी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया है।”
स्थानीय लोगों में नाराजगी
नई चुनी गई सरकार के इस नियम को लागू करने के फैसले से अब स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई है। नेपाल-भारत ओपन बॉर्डर इंटरैक्शन ग्रुप नाम के एक संगठन ने सरकार से आग्रह किया कि वह अपनी कस्टम नीति में तुरंत बदलाव करे। संगठन ने चेतावनी दी कि मौजूदा नियमों के कारण सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को बेवजह की परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।
एक बयान में, इस संगठन ने नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का जिक्र किया। संगठन ने अधिकारियों से अपील की कि वे सीमा पार आवाजाही को आसान बनाने और जमीनी स्तर पर संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक और लोगों के हित में कदम उठाएं।
कस्टम ड्यूटी लगाने वाले नियम को तुरंत खत्म किया जाए- संगठन
इस संगठन की एक मुख्य मांग यह है कि बॉर्डर पोस्ट से लाए गए 100 NPR से ज्यादा कीमत वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने वाले नियम को तुरंत खत्म किया जाए। संगठन का तर्क है कि इस नियम का सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कम आय वाले परिवारों पर पड़ता है और इसे लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
इसके बजाय, समूह ने घरेलू इस्तेमाल के लिए लाई जाने वाली चीजों पर जीरो कस्टम ड्यूटी लगाने की मांग की। इसके अलावा, समूह ने सीमावर्ती इलाकों में जरूरी चीजों तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने के लिए, अच्छी तरह से व्यवस्थित और किफायती बाजार बनाने की भी मांग की। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं के लिए खास कस्टम-मुक्त सुविधाएं शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा, जिससे दोनों देशों के सीमावर्ती कस्बों और बड़े धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालु 48 घंटे तक बिना किसी ड्यूटी के सामान ले जा सकें।
समूह ने कहा कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के बीच आपसी रिश्ते और मजबूत होंगे। नेपाल के कस्टम विभाग के डायरेक्टर किशोर बरतौला ने आईएएनएस को बताया कि यह नियम तस्करी पर रोक लगाने के लिए लागू किया गया था। उन्होंने कहा, “तस्कर आम लोगों का इस्तेमाल करके भारतीय बाजारों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, दिन में कई बार बिना ड्यूटी चुकाए सामान लाते हैं और फिर उसे बड़ी मात्रा में इकट्ठा करके बेचते हैं।”
किशोर बरतौला ने आगे कहा, “इसके अलावा एनपीआर 100 से ज्यादा कीमत वाली चीजों पर ड्यूटी लगाने से सरकारी राजस्व में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होती है।” उन्होंने आगे कहा कि इस नियम को और सख्ती से लागू करने से नेपाल के सीमावर्ती कस्बों के व्यापारियों को भी फायदा होने की उम्मीद है।
नेपाल की राजनीति में भूचाल
नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आम लोगों को उम्मीद थी कि देश के विकास को नई दिशा मिलेगी, जनकल्याण की नीतियां एवं योजनाएं आकार लेंगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। मगर अब देश के शासन और सियासत में ही नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब हवाला व्यवसायी दीपक भट्ट के साथ उनके कथित व्यावसायिक संबंधों को लेकर जांच चल रही है और पार्टी के अंदर तनातनी थीं। पढ़ें पूरी खबर…
