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नेपाल के लिए ‘थोड़ी खुशी और मुसीबतों की भरमार’ के नाम रहा 2015 का साल

नेपाल के लिए 2015 का साल कई झटकों वाला रहा, दो बड़े भीषण भूकम्प जहां तबाही के निशान छोड़ गए, वहीं नए संविधान की घोषणा से आशा की किरण भी चमकी..

Author काठमांडो | Updated: December 27, 2015 10:49 PM
भूकंप के बाद काठमांडू के एक खुले मैदान में अस्थायी पनाहगाह के बाहर अपने बच्चे के साथ बैठी मां। ग़ौरतलब है कि 25 अप्रैल, 2015 को नेपाल में 7.9 की तीव्रता से आए भूकंप में 3000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है और राजधानी काठमांडू पूरी तरह से उजड़ गया था। (फ़ोटो-रॉयटर्स)

नेपाल के लिए 2015 का साल कई झटकों वाला रहा, दो बड़े भीषण भूकम्प जहां तबाही के निशान छोड़ गए, वहीं नए संविधान की घोषणा से आशा की किरण भी चमकी। हालांकि, अधिकतर भारतीय मूल के मधेसियों के विरोध-प्रदर्शन के कारण यह भारत-नेपाल संबंधों में तनाव का कारण भी बना। नेपाल में 25 अप्रैल और 12 मई को आए दो शक्तिशाली भूकम्प के साथ कई बार भूकम्प के बाद के झटके भी महसूस किए गए। इसमें नौ हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई और लाखों घर तबाह हो गए। भूकम्प से करीब सात अरब अमेरिकी डॉलर की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है। इस तरह की आपदा के कुछ ही घंटों में भारत ने काठमांडो सहित नेपाल के भूकम्प प्रभावित 14 जिलों में मदद के लिए बचाव दलों को भेजा।

काठमांडो में 25 जून को एक अंतरराष्ट्रीय दानदाता सम्मेलन में विभिन्न दानदाता एजंसियों और विकास सहयोगियों ने नेपाल के पुनर्निर्माण के प्रयासों और भूकम्प के कारण हुई क्षति से देश की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए 4.4 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि की वित्तीय मदद का वचन दिया। नेपाल ने निजी और सरकारी इमारतों, स्कूलों, बुनियादी ढांचा के पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार में सहयोग के लिए 6.7 अरब अमेरिकी डॉलर की जरूरत का अनुमान जताया है।

बहरहाल साल 2015 नेपालियों के लिए केवल उदासी भरा समय ही नहीं रहा। 22 जनवरी की निर्धारित तिथि गुजरने के बाद सितंबर के महीने में नए संविधान की घोषणा उनके लिए थोड़ी खुशी लेकर आई। इसका नेपाल के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। हालांकि काफी पहले इसका मसौदा चार्टर तैयार हो गया था। मधेसियों के बहिष्कार के बावजूद नेपाल की प्रमुख पार्टियों ने एक समझौता किया और 20 सितंबर को 85 फीसद से अधिक के मत के साथ संविधान की घोषणा कर दी। नए चार्टर के अनुसार, देश कई संघीय प्रांतों में बंट गया जिसे मधेसी समुदाय ने खारिज कर दिया। आठ साल लंबी चली बातचीत के बाद संविधान की घोषणा के 65 साल पुराने उनके सपने के पूरा होने से अधिकतर नेपाली खुश थे।

वहीं संविधान की घोषणा के बाद दक्षिण और पश्चिम नेपाल में मधेसी और थारू समुदाय के लोगों ने व्यापक आंदोलन किया। उनका दावा था कि इस कदम ने उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर ला खड़ा किया है। प्रदर्शन के कारण भारत और नेपाल के बीच महत्त्वपूर्ण व्यापार बिंदुओं ठप्प पड़ गए। इससे हिमालयी देश में जरूरी सामान और दवाइयों की कमी हो गई। नेपाल ने दावा किया कि भारत के अनाधिकारिक नाकाबंदी के कारण भीषण भूकम्प के बाद उबर रहे नेपाल में पेट्रोलियम उत्पाद, रसोई गैस और दवाइयों सहित जरूरी सामान की किल्लत हो गई है। इस मुद्दे पर भारत-नेपाल संबंधों में गिरावट आई।

बहरहाल, भारत ने नाकाबंदी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत से सटे नेपाल के तराई क्षेत्र में मधेसियों के प्रदर्शन करने के कारण यह स्थिति बनी है। अगस्त से चल रहे प्रदर्शन में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई। अगस्त में नेपाल की संसद ने सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को नए प्रधानमंत्री के तौर पर चुना। इस साल दूसरे बड़े घटनाक्रम में संसद ने नेपाल कम्युनिस्ट नेता विद्या देवी भंडारी को नेपाल की पहली महिला राष्ट्रपति के तौर पर चुना। नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमाल थापा ने कथित नाकाबंदी हटाने के लिए दो बार भारत का दौरा किया और मधेसी नेताओं ने भी भारत का दौरा किया।

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