नेपाल में भयानक बाढ़ के बाद स्थिति खराब है। भारत पड़ोसी देश नेपाल की हरसंभव मदद कर रहा है। इस बीच नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता भारत की तारीफ की है। उन्होंने बुधवार को कहा कि भारत बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों के प्रबंधन में नेपाल को सहायता प्रदान कर रहा है, जिसमें डीएनए परीक्षण और डीएनए प्रबंधन के लिए लैब स्थापित करने में सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच रोटी-बेटी का संबंध हैं और भारत ने नेपाल के साथ हर सुख-दुख में साथ दिया है।

भारत के साथ रोटी-बेटी जैसा रिश्ता- नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री

नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “हमारे देश और भारत के बीच हमेशा से ‘रोटी-बेटी’ (पारिवारिक) जैसा रिश्ता रहा है। वे हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं चाहे हालात अच्छे हों या बुरे। यह भाई-बहन और परिवार जैसा रिश्ता है। हम मुश्किल में हैं और ज़ाहिर है, यह दुख उन तक भी पहुंचेगा। हमें महसूस होता है कि वे हमेशा हमारे साथ हैं। वे सिर्फ़ अच्छे समय में ही नहीं, बल्कि मुश्किल समय में भी हमारे साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने हमेशा मदद का हाथ बढ़ाया है। मुख्य मुद्दा शवों के प्रबंधन का था। वे इसमें भी हमारी मदद कर रहे हैं। उन्होंने DNA टेस्टिंग के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजी है। साथ ही वे DNA प्रबंधन के लिए लैब बनाने में भी हमारी मदद कर रहे हैं। वे हमारी मदद कर रहे हैं और हम उनके प्रति बहुत सकारात्मक हैं।”

निशा मेहता ने यह भी बताया कि बचाए गए लोगों को आश्रय केंद्रों में रखा जा रहा है, जहां उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पड़ोसी देश बचाव कार्यों में नेपाल की सहायता कर रहे हैं और विभिन्न प्रकार की मदद मुहैया करा रहे हैं।

‘सब मिलकर काम कर रहे हैं’

निशा मेहता ने कहा, “हमारे पास कुछ आश्रय केंद्र हैं जहां बचाए गए लोगों को रखा गया है। साथ ही हम उनके स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। इसके अलावा, हमारे पड़ोसी देश भी विभिन्न देशों से मदद कर रहे हैं। वे भी बचाव कार्य के लिए यहां आए हैं। वे बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं और विभिन्न प्रकार की सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ जैसी कुछ संस्थाएं भी जमीनी स्तर पर मौजूद हैं। वे सब मिलकर काम कर रहे हैं। इसलिए हम सब यहां हैं। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

नेपाल पुलिस ने बताया कि रसुवा से 45 शव, नुवाकोट से 155, धाडिंग से 59, चितवन से 348, गोरखा से 66, तनहुं से 38, पूर्वी नवलपरासी से 217, पश्चिमी नवलपरासी से 190 और भारत से 9 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार बरामद शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान के बाद उनके परिजनों को सौंपे गए हैं।

यह भी पढ़ें: 11 हाइड्रो पावर टनल में फंसे 900 से ज्यादा लोग

नेपाल में आई जल प्रलय से जनजीवन पूरी तरह से अस्तव्यस्त हो गया है। एक अनुमान के मुताबिक, देश की 11 जलविद्युत परियोजनाओं के नीचे बनी सुरंगों में 933 लोग अभी भी फंसे हुए हैं। इन 11 में से ज्यादातर परियोजनाएं 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से तबाह हुए भोटेकोशी-त्रिशूल नदी गलियारे के किनारे स्थित हैं। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें