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भारत-चीन तनातनी के बीच नेपाल ने लिपुलेख में तैनात की सेना, भारतीय सैनिकों पर पैनी नजर रखने के आदेश

लिपुलेख भारत, नेपाल और चीन के बीच पड़ने वाले ट्राई-जंक्शन में आता है, यह इलाका उत्तराखंड की कालापानी घाटी के ऊपरी हिस्से में मौजूद है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र काठमांडू | September 3, 2020 3:25 PM
Nepal, Army, Lipulekh, Indian Armyनेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स लिपुलेख के विवादित इलाके में भी गश्त करना चाहती है। (फोटो- राष्ट्रीय समाचार समिति, नेपाल)

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच पूर्व में नेपाल भी आए दिन अपनी नई-नई हरकतों से भारत को परेशान करने की कोशिश में जुटा है। अब नेपाल सरकार ने अपनी सेना को निर्देश दिए हैं कि वह लिपुलेख के इलाके में भारतीय सेना की गतिविधियों पर करीब से नजर रखे। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार की तरफ से यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में नेपाल ने भारत से लगे तीन इलाकों में सीमा विवाद को चर्चा के जरिए हल करने के बजाय अपने इलाके में दिखाता नक्शा संसद में पास करा लिया था। भारत और नेपाल के बीच इसी के बाद से तनाव जारी है।

बता दें कि लिपुलेख भारत, नेपाल और चीन के बीच पड़ने वाले ट्राई-जंक्शन में आता है। यह उत्तराखंड की कालापानी घाटी के ऊपरी हिस्से में मौजूद है। बताया गया है कि ओली सरकार ने पिछले हफ्ते ही गृह मंत्रालय के जरिए नेपाली आर्म्ड पुलिस फोर्स (NAPF) को ट्राई-जंक्शन की निगरानी करने के लिए कह दिया था। इसके बाद NAPF की 44वीं बटालियन लिपुलेख में तैनात है। NAPF ने सरकार से लंबी दूरी की गश्त की इजाजत भी मांगी है, ताकि भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव की भी निगरानी की जा सके।

बताया गया है कि सिर्फ नेपाल ही नहीं चीन ने भी लिपुलेख ट्राई-जंक्शन पर सेना बढ़ाना शुरू कर दिया है। मौजूदा समय में यहां 150 लाइट कॉम्बैट ब्रिगेड तैनात हैं, जिन्हें पिछले महीने ही लगाया गया। इसके अलावा सीमा से 10 किमी दूर पाला में भी चीन ने सेना रखी है। इकोनॉमिक टाइम्स अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पाला में जुलाई में सैन्य दलों के 1000 सैनिक तैनात किए गए थे और एक स्थायी पोस्ट भी बना ली गई थी। 15 दिन पहले ही इस पोस्ट पर 2000 अतिरिक्त सैनिकों की टुकड़ियां जुटाई गई थी।

भारत और नेपाल के बीच क्यों भड़का लिपुलेख विवाद?
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख पर दावे को लेकर इसी साल की शुरुआत में विवाद शुरू हुआ था। दरअसल, भारत ने 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस इलाके में सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया था। इसके बाद नेपाल ने इसका राजनयिक स्तर पर विरोध किया था। नेपाल ने इस इलाके को अपना बताते हुए निर्माण कार्य रुकवाने की कोशिश की। बताया जाता है कि भारत ने यह निर्माण कार्य कैलाश मानसरोवर जाने वाले भक्तों के लिए रास्ता छोटा करने के मकसद से शुरू कराया था।

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