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हिंदू राजशाही नहीं, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक नेपाल

नेपाल में सात सालों की सियासी कशमकश और मशक्कत के बाद तैयार ऐतिहासिक संविधान रविवार को लागू हो गया। इसके साथ ही देश एक हिंदू राजशाही से एक पूर्ण रूप से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणतंत्र में परिवर्तित हो गया।
Author काठमांडो | September 21, 2015 09:44 am
काठमांडो में रविवार को नए संविधान के खिलाफ विरोध कर रहे व्यक्ति को हिरासत में लेकर जाती नेपाली पुलिस। (फोटो: एपी)

नेपाल में सात सालों की सियासी कशमकश और मशक्कत के बाद तैयार ऐतिहासिक संविधान रविवार को लागू हो गया। इसके साथ ही देश एक हिंदू राजशाही से एक पूर्ण रूप से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणतंत्र में परिवर्तित हो गया। इस बीच अल्पसंख्यक मधेसी समूहों ने सात प्रांतों के संघीय ढांचे को लेकर हिंसक प्रदर्शन किया।

राष्ट्रपति राम बरन यादव ने संसद में संविधान को जारी करते हुए कहा, ‘मैं संविधान सभा द्वारा पारित और संविधान सभा द्वारा अधिप्रमाणित नेपाल के इस संविधान को 20 सितंबर 2015 से लागू किए जाने की घोषणा करता हूं’।

उन्होंने नया बानेश्वर में संविधान सभा हाल में आयोजित एक विशेष समारोह में कहा, ‘मैं इस ऐतिहासिक मौके पर सभी से एकता और सहयोग का आह्वान करता हूं’। इस बीच भारत से लगने वाले दक्षिणी क्षेत्रों में हिंसा की छिटपुट घटनाओं की सूचना मिली है जहां अल्पसंख्यक मधेसी समुदाय देश को सात प्रांतों में बांटने के विचार का विरोध कर रहा है।

हिमालयी देश के एक हिंदू राजशाही से एक धर्मनिरपेक्ष, संघीय लोकतंत्र के रूप में परिवर्तित होने की खुशी मनाने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। इस मौके पर राष्ट्रीय ध्वज लहराए गए और पटाखे छोड़े गए। इसके साथ संविधान सभा हॉल के सामने भी लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए थे। इस खुशी को मनाने के लिए काठमांडो के अलग-अलग स्थानों पर जुलूस निकाले गए। लोगों ने अपना खुद का संविधान मिलने की खुशी में सड़कों को सजाया और मोमबत्तियां जलार्इं। 67 साल के लंबे समय तक चले लोकतांत्रिक संघर्ष के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों ने संविधान तैयार किया।

उन्होंने कहा, ‘संविधान हम सभी के लिए हमारी स्वतंत्रता, आजादी, भौगोलिक अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने का एक साझा दस्तावेज है’। इसके साथ ही अंतरिम संविधान को रद्द कर दिया गया। राष्ट्रपति यादव ने कहा कि लागू किए गए नए ‘संविधान 2072’ ने देश में गणतंत्र को संस्थागत कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संविधान लागू होने से देश में शांति और स्थिरता आएगी और आर्थिक विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा, ‘लोगों ने लोकतंत्र और दीर्घकालिक शांति के लिए लगभग सात दशकों तक संघर्ष किया’। उन्होंने संविधान सभा की अंतिम बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नए संविधान ने देश में विविधता में एकता बनाए रखने और सभी का अधिकार तय करने का एक मौका दिया है। संविधान सभा ने सर्वसम्मति से एक स्वीकृति प्रस्ताव पारित करने के साथ ही राष्ट्रपति को संविधान लागू करने की घोषणा करने के लिए धन्यवाद दिया।

संविधानसभा के कुल 601 सदस्यों में से 85 फीसद ने नए संविधान का अनुमोदन किया है। नए संविधान के तहत दो सदनीय संसद का प्रावधान किया गया है। संसद के निचले सदन में 375 सदस्य होंगे जबकि ऊपरी सदन में 60 सदस्य होंगे। संविधान में 37 खंड, 304 अनुच्छेद और सात अनुलग्नक हैं। एक साल के भीतर एक उच्च स्तरीय आयोग सात प्रांतों को अंतिम रूप देगी।

मधेसी समूह नेपाल को संघीय स्वरूप दिए जाने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संघीय ढांचे से यह देश सात प्रांतों में बंट जाएगा। इस मुद्दे को लेकर हुई हिंसा में कम से कम 40 व्यक्तियों की मौत हुई है जिसमें रविवार को हुई एक मौत भी शामिल है।
राष्ट्रपति यादव की ओर से नया संविधान घोषित किये जाने के साथ ही दक्षिण नेपाल के जिलों से विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ की खबरें मिलीं।

संविधान के समर्थन और संविधान के विरोध में रैलियां हुर्इं। इसके साथ ही बिराटनगर, बीरगंज, धारन और सरलाही में छिटपुट झड़पें हुई। सिराहा में मधेसी फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने एक नेपाली कांग्रेस सांसद का घर जला दिया। बीरगंज में एक व्यक्ति पुलिस गोलीबारी में मारा गया जबकि प्रदर्शनकारियों ने सीपीएन-यूएमएल सांसद के घर में तोड़फोड़ की।

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  1. N
    Naveen Bhargava
    Sep 21, 2015 at 1:08 pm
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