नेपाल में आई आपदा के 10 दिन बाद बचावकर्मियों ने त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित कर लिया है। माना जा रहा है कि कुछ लोग अभी भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं। नेपाली सेना के मुताबिक, सुरंग के अंदर से दो व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
इस बाढ़ में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बचाव अभियान त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना में चलाया गया जो पिछले हफ्ते आई आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित जगहों में शामिल है। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत ने बताया कि सुरंग के अंदर और लोगों के फंसे होने की आशंका है और उनकी तलाश जारी है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने BBC को बताया कि बाहर निकाले गए पहले व्यक्ति का नाम संजय शाह है। वह NEA में मैकेनिकल फोरमैन हैं। स्थानीय टीवी फुटेज में उन्हें मिट्टी से लथपथ हालत में देखा गया। एक बचावकर्मी उन्हें अपने कंधे पर उठाकर बाहर लाया और बाद में उन्हें त्रिशूली स्थित नेपाल सेना की बैरक में ले जाया गया। इसके कुछ ही देर बाद दूसरे कर्मचारी कबीर महार्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बस्नेत ने बताया कि दोनों मजदूर सुरंग के अंदर 170 मीटर की गहराई में मिले। बचाव स्थल पर मौजूद NEA के वरिष्ठ अधिकारी सुरेश राउत ने BBC को बताया कि शाह को सुरंग से बाहर निकालने के बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई।
शाह के एक सहयोगी सुरेश चौधरी ने BBC से कहा, ”मैं बहुत खुश हूं। मैं इस खबर का इंतजार कर रहा था। इससे उम्मीद जगी है कि बाकी लोगों को भी जिंदा बचाया जा सकेगा।”
26 अगस्त को फ्लैश फ्लड बनी आफत
आपको बता दें कि 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण सुरंग में पानी भर गया था और उसका रास्ता बंद हो गया था। बचाव अभियान के दौरान शुक्रवार को टीम को सुरंग के अंदर एक से ज्यादा लोगों की आवाजें सुनाई दीं।
बचावकर्मियों ने सुरंग के अंदर मौजूद लोगों से कहा, ”घबराइए मत, हम आपको बचाने आ रहे हैं।” इसके जवाब में अंदर से ‘हां’ कहा गया।
नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों वाली बचाव टीम सुरंग के अंदर पहुंच गई है और सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। फंसे लोगों से सीधे संपर्क हो पाना बचाव अभियान में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
इससे पहले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद और ऊर्जा विभाग के प्रमुख श्रीराम नेउपाने ने बताया था कि बचाव अभियान में शामिल नेपाली सेना के जवानों को सुरंग के अंदर से लोगों के बात करने की जानकारी मिली है।
उम्मीद जगाने वाला संकेत
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ”नेपाली सेना से बचाव दल को जानकारी मिली है कि अंदर लोगों की आवाजें सुनाई दी हैं। नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग के अंदर पहुंच गई हैं और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।” उन्होंने कहा कि सुरंग के अंदर से लोगों के बोलने की आवाज सुनाई देना उम्मीद जगाने वाला संकेत है।
नेउपाने, जो परियोजना स्थल पर इंजीनियर के तौर पर तैनात थे, गुरुवार शाम तक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल रहे। उन्होंने नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, तकनीकी टीमों और अन्य बचावकर्मियों के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद जताई कि सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।
त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए नौ दिनों से सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। इस बीच, नेपाल में बाढ़ से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1290 हो गई है।
सुरंग के अंदर जिंदगी की उम्मीद
ऊपरी त्रिशूली-3A परियोजना में सुरंगों का प्रवेश द्वार भारी मात्रा में जमा कीचड़ से ढक गया था। इसके कारण बचावकर्मियों को सुरंगों का पता लगाने में करीब छह दिन लग गए।
अधिकारियों का अनुमान है कि सुरंग के अंदर अभी भी 30 से 40 लोग जिंदा हो सकते हैं। सेना की टीमें और विशेषज्ञ बचाव दल सुरंग के मुहाने से कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थरों को हटाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
शुक्रवार सुबह सुरंग के काफी अंदर से लोगों की आवाजें सुनाई देने के बाद बचाव की उम्मीद और बढ़ गई। इसके बाद बचाव अभियान को और तेज कर दिया गया।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल की 12 जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 900 कर्मचारी अभी भी लापता हैं। इनमें से करीब 500 लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
‘तबाही कल्पना से परे’, नेपाल में बाढ़ के बीच प्रिंसिपल ने बचाई 1600 छात्रों की जान
नेपाल में आई बाढ़ में कम से कम 903 लोगों की मौत हो गई है जबकि आपदा के बाद अब भी करीब 4250 लोग लापता हैं। बचावकर्मी आपदा के छठे दिन लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास कर रहे हैं। इस बीच त्रिभुवन त्रिशुली सेकेंडरी स्कूल के 1600 छात्रों की जान बचाने वाले प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने 26 अगस्त की घटना को याद कर बताया कैसे मिनटों में उन्होंने स्कूल खाली करने का फैसला किया।
