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शीत युद्ध के बाद रूस की सीमा पर होगा सैनिकों का सबसे बड़ा जमावड़ा, ब्रिटेन-अमेरिका भेजेंगे जंगी विमान और फौज

अगले साल मई-जून तक विभिन्न यूरोपीय देशों में नाटो देशों के चार हजार सैनिक तैनात किए जाएंगे।

US Army news, US Army Latest News, US Army turbans, US Army in hijab, US Army in beardsअमेरिक सैनिक (एपी फाइल फोटो)

पश्चिम एशिया में चल रहे हिंसक सैन्य संघर्ष का प्रभाव दूसरे यूरोपीय देशों पर भी दिखाई देने लगा है। बुधवार (26 अक्टूबर) को ब्रिटेन ने अगले साल रोमानिया में अपने फाइटर जेट भेजने की घोषणा की। वहीं अमेरिका ने पोलैंड में अपनी सैनिक टुकडी़ और टैंक भेजने की बात कही है। नार्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) से जुड़े जर्मनी, कनाडा जैसे अन्य देशों ने भी इसमें सहयोग का वादा किया है। बेल्जियम के सबसे बड़े शहर ब्रसेल्स में नाटो के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में ये फैसला लिया गया। दूसरी तरफ रूस ने क्रूज मिसाइल से लैस अपने दो युद्धपोत बाल्टिक सागर में भेजे हैं। माना जा रहा है कि रूसी युद्धपोत स्वीडन और डेनमार्क के बीच कहीं तैनात होगा। माना जा रहा है कि शीत युद्ध के बाद रूस की सीमा पर पश्चिमी देशों का ये सबसे बड़ा जमावड़ा होगा।

स्पेन के विदेश मंत्रालय के अनुसार रूस ने स्पेन के उत्तरी अफ्रीकन एनक्लेव में स्थित अपने तीन युद्धपोतों में ईंधन भरने का अनुरोध नाटो की आपत्ति के बाद वापस ले लिया है।  नाटो का कहना था कि इन युद्धपोतों से सीरिया के नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया जा सकता है। माना जा रहा था कि रूस इन युद्धपोतों को भी सीरिया तट के निकट तैनात अपने 10 युद्धपोतों के पास भेजना चाहता था।

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नाटो के सेक्रेटरी-जनरल जेंस स्टोल्टेनबर्ग के अनुसार बाल्टिक और पूर्वी यूरोप में चार हजार सैनिकों की तैनाती नापाजोखा फैसला है क्योंकि रूस ने मास्को के करीब 33 हजार सैनिक जमा कर रखे हैं। स्टोल्टेनबर्ग ने मीडिया से कहा, “इसी महीने रूस ने परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम इस्कांदर मिसाइल कालिनिनग्राद में तैनात की है और अमेरिका के साथ वेपंस-ग्रेड प्लूटोनियम समझौते को स्थगित कर दिया है।” रूस की बैलेस्टिक मिसाइट पोलैंड और दूसरे बाल्टिक देशों तक मार कर सकती हैं। स्टोल्टेनबर्ग ने आरोप लगाया कि रूस यूक्रेन में बागियों की मदद कर रहा है। रूस ने क्या कालिनिनग्राद में परमाणु हथियार भी तैनात किए हैं? इस सवाल का स्टोल्टेनबर्ग ने कोई जवाब नहीं दिया।

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रूस द्वारा 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया के अधिग्रहण के बाद से ही नाटो सोवियत रूस के सदस्य रहे यूरोपीय देशों से उसे दूर रखने के लिए मुस्तैद हैं। नाटो चार लड़ाकू मोर्चे बनाएगा जिसमें कुल चार हजार सैनिक होंगे। इनके अलावा 40 हजार सैनिकों की रैपिड एक्शन फोर्स भी इन सैनिकों की आपातकालीन मदद के लिए उपलब्ध रहेगी। अमेरिका के रक्षा मंत्री एश कार्टर ने बताया कि 900 सैनिकों की टुकड़ी पूर्वी पोलैंड भेजी जाएगी। इसके अलावा टैंक के साथ दूसरी टुकड़ी भी पूर्व यूरोप में तैनात होगी। विभिन्न देशों की सेनाएं अगले साल मई-जून तक इन मोर्चों पर तैनात हो जाएंगी। नाटो के चार सैन्य मोर्चों का नेतृत्व अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और कनाडा करेंगे। अन्य नाटो देश इसमें सहयोग करेंगे। पोलैंड के अलावा लिथुवानिया, एस्टोनिया, नीदरलैंड, बेल्जियम, क्रोएशिया, नार्वे, नीदरलैंड और लातिविया में भी नाटो के सैन्य बल तैनात किए जाएंगे।

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