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NASA का डेटा रिले बॉक्स हुआ खराब, बदलने के लिए आपात स्पेस वॉक करेंगे दो अंतरिक्ष यात्री

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र (आईएसएस) में मौजूद नासा के दो अंतरिक्षयात्री एक खराब हो चुके डेटा रिले बॉक्स को बदलने के लिए कल एक आपात स्पेसवाक करने के लिए तैयार हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डेटा रिले बॉक्स हुआ खराब, बदलने के लिए मंगलवार को आपात स्पेस वॉक करेंगे दो अंतरिक्ष यात्री (Photo-NASA)

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र (आईएसएस) में मौजूद नासा के दो अंतरिक्ष यात्री खराब हो चुके डेटा रिले बॉक्स को बदलने के लिए कल (23 मई को) एक आपात स्पेसवाक करने के लिए तैयार हैं। यह बॉक्स इस केन्द्र के कुछ प्रमुख उपकरणों को नियंत्रित करता है। एक्सपीडीशन 51 कमांडर पेगी विट्सन और फ्लाइट इंजीनियर जैक फिशर पिछले सप्ताह खराब हुए मल्टीप्लेक्सर-डीमल्टीप्लेक्सर (एमडीएम) डेटा रिले बॉक्स को बदलेंगे। इसके खराब होने की वजह का पता नहीं चल सका है। आईएसएस प्रोग्राम प्रबंधकों ने तैयारियों और चालक दल की तत्परता की समीक्षा के बाद स्पेसवाक का फैसला किया।यह बॉक्स रेडिएटरों, प्रशीतन श्रृंखलाओं समेत स्टेशन के विभिन्न उपकरणों का नियंत्रण करता है।

हाल ही ये भी खबर चल रही है कि भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में जो कीर्तिमान बनाए हैं। भारत की इसी कामयाबी के चलते अब अमेरिका इस क्षेत्र में भारत का सहयोग करने जा रहा है। भारत और अमेरिका मिलकर अब एक सैटेलाइट बनाने जा रहे हैं जो पृथ्वी की मॉनिटरिंग का काम अलग ही तरह से करेगा। अमेरिकन स्पेस एजंसी NASA और ISRO के साथ मिलकर एक सैटेलाइट बनाएंगे जिसका नाम होगा NISAR। NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar satellite) दुनिया की सबसे मंहगी इमेजिंग सैटेलाइट हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के लिए इसकी कीमत 9,600 करोड़ रुपये(1.5 बिलियन डॉलर) की हो सकती है।

वहीं एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट को लेकर सांइटिस्ट पॉल ए रोजेन ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी हैं। उनके मुताबिक NASA और ISRO का साथ में शुरू किया गया है यह पहला प्रॉजेक्ट होगा। उन्होंने बताया कि यह एक 2 फ्रीक्वैंसी रडार होगा। इसको दो हिस्सों में तैयार किया जाएगा। एक होगा एल-बैंड 21 सेंटिमीटर रडार और दूसरा होगा एस-बैंड 13 सेंटिमीटर रडार। इनमें से एस-बैंड 13 सेंटिमीटर रडार ISRO द्वारा तैयार किया जा रहा है जबकि एल-बैंड को NASA बनाएगा। वहीं इन सैटेलाइट्स के जरिए पृथ्वी की टैक्टॉनिक प्लेट्स, बर्फ की परतें, वनस्पतियों आदि चीजों को मॉनिटर किया जा सकेगा। इसके जरिए प्रकृतिक आपदाओं और उनके कारणों को ज्यादा बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा। वहीं तैयार होने के बाद इस सैटेलाइट को भारत से लॉन्च किया जाएगा। 2021 तक इसके लॉन्च होने की उम्मीद है।

खबर के मुताबिक भूकंप, ज्वालामुखी का फटना, दावानल, समुद्री लेवल में बढ़ोतरी आदि कई चीजों पर ज्यादा बेहतर तरीके से नजर रखी जा सकेगी। गौरतलब है कि भारत हाल ही में अपने स्पेस प्रोग्रामों को दुनियाभर में काफी चर्चा में रहा है। बीते 5 मई को भारत ने साउथ एशिया सेटलाइट (GSAT-9) का सफल प्रक्षेपण किया था। पाकिस्तान को छोड़, सार्क के 6 देशों को इससे फायदा होने की उम्मीद है। इसे बनाने में भारत को तीन साल लगे थे और 235 करोड़ रुपये खर्च हुए। भारत के अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका को जीसैट-9 का लाभ ले सकेंगे। वहीं बीते फरवरी महीने में भी भारत ने 104 सैटेलाइट्स को एक साथ लॉन्च करके एक नया किर्तीमान रचा था।

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