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अंतरिक्ष में आग, नासा ने कहा- रिएक्शन समझने के लिए लगाई आग

क्‍लेवलैंड में नासा के ग्‍लेन रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिकों ने रेडियो सिग्‍नल के जरिये गर्म तार तौलिये के आकार के कॉटन और फाइबर ग्‍लास पर छुआया। कुछ ही सेकंड में वहां आग लग गई।

अंतरिक्ष में लगाई गई आग की तस्वीर (फोटो-Nasa.gov)

क्या आपने कभी सुना है कि अंतरिक्ष में आग लग गई हो? जी हां.. स्पेस में सचमुच आग लगी  और यह आग लगाई अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने। नासा ने अंतरिक्ष में आग लगाकर यह जानने की कोशिश की है कि माइक्रो ग्रैविटी के हालात में आग कैसी प्रतिक्रिया दिखाती है। इस प्रयोग को सैफायर नाम दिया गया है। इस एक्सपेरिमेंट से वैज्ञानिकों को भविष्य में अंतरिक्ष मिशन के किसी भी चरण में आग लगने संबंधी घटनाओं से निपटने में सहायता मिलेगी। इस एक्सपेरिमेंट के प्रमुख वैज्ञानिक डेविड अरबन ने कहा, “इससे पहले किसी भी अंतरिक्ष एजेंसी को स्पेसक्राफ्ट जैसे किसी बड़े इंडेक्स की लंबे समय तक लो ग्रैविटी का अध्ययन करने का मौका नहीं मिला है।” उन्होंने कहा, “सबसे पहला सैफायर एक्सपेरिमेंट जून में किया गया था जब आग की लपटें तेज हवा की दिशा में धधक रही थीं लेकिन वो आश्चर्यजनकरूप से काफी धीमी थीं।”

तब वैज्ञानिकों ने कॉटन और फाइबर ग्लास के 3 फीट गुणे 1 फुट के मिश्रित पदार्थ को हॉट वायर से सटाकर उसे नियंत्रित तरीके से जलाने की कोशिश की। सैफायर एक बहुत ही रिस्की और अहम प्रयोग था क्योंकि अंतरिक्ष में आग की प्रतिक्रिया समझना बहुत ही जोखिमभरा काम था। एक्सपेरिमेंट की सफलता को देखते हुए नासा बहुत जल्द ही अब सैफायर के दूसरे चरण का एक्सपेरिमेंट करेगा। जून में धरती से मीलों ऊंचाई पर स्थित इंसुलेटेड कंटेनर में नासा ने जानबूझकर आग लगाई थी। जिस कैप्‍सूल में इस प्रयोग को अंजाम दिया गया, उसमें एक वीडियो कैमरा, सेंसर्स, एक्‍जॉस्‍ट सिस्‍टम लगाया गया, ताकि आग के जलने के लिए हवा मिलती रहे।

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क्‍लेवलैंड में नासा के ग्‍लेन रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिकों ने रेडियो सिग्‍नल के जरिये गर्म तार तौलिये के आकार के कॉटन और फाइबर ग्‍लास पर छुआया। कुछ ही सेकंड में वहां आग लग गई। इस प्रयोग के प्रोजेक्‍ट मैनेजर गैरी रफ ने कहा कि मैंने इस आग को सैफायर (सेफ, फायर) नाम दिया है। सेंसर्स से मिले आंकड़ों के अनुसार, कचरे के जलने में आठ मिनट लगे जो कि धरती पर जलने के समय की तुलना में थोड़ा अधिक समय था। यानी उतना ही कचरा धरती पर जलाया जाता, तो जल्‍दी जल जाता। यह प्रयोग इस बात को समझने के लिए किया गया था कि माइक्रोग्रैविटी में आग कैसा व्‍यवहार करती है।

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