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मोदी ने इशारों में पाक पर साधा निशाना, कहा:अफ़गानिस्तान की सफलता के लिए सीमापार से आतंक बंद होना ज़रूरी

पाकिस्तान पर परोक्ष प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अफगानिस्तान केवल तभी सफल होगा जब सीमापार से आतंकवाद को बढ़ावा बंद होगा..

Author काबुल | December 26, 2015 2:12 AM
अफगानिस्तान संसद को संबोधित करते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (एपी फोटो)

पाकिस्तान पर परोक्ष प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अफगानिस्तान केवल तभी सफल होगा जब सीमापार से आतंकवाद को बढ़ावा बंद होगा और आतंकवाद की नर्सरी और पनाहगाह नहीं होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, अफगानिस्तान में योगदान करने के लिए है, प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं, भारत यहां भविष्य का आधार तैयार करने के लिए है, संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए नहीं। मोदी ने कहा कि आतंक और हिंसा अफगानिस्तान के भविष्य को आकार देने या अफगानिस्तान के लोगों की पसंद तय करने का जरिया नहीं हो सकते।

प्रधानमंत्री मोदी ने अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की मौजूदगी में काबुल में भारत द्वारा निर्मित अफगानिस्तान संसद की नई इमारत का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि संसद की नई इमारत हमारे संबंधों की भावना व मूल्यों, हमारे बीच के लगाव व आकांक्षाओं के अटूट प्रतीक के रूप में खड़ी रहेगी जो हमें विशेष संबंधों की डोर से बांधती है। भारत के सहयोग से निर्मित अफगानिस्तान के संसद की नई इमारत पर 9 करोड़ डालर की लागत आई है। मोदी ने यहां संसद भवन परिसर में ‘अटल ब्लॉक’ का भी उद्घाटन किया जिसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है और जिनका शुक्रवार को 91वां जन्मदिन था। अफगानिस्तान की संसद को मोदी ने करीब 40 मिनट तक संबोधित किया और उपस्थित लोगों ने कई मौकों पर अपनी प्रसन्नता जाहिर की।

मोदी ने अफगानिस्तान में भारत की सहभागिता पर पाकिस्तान की आपत्ति का परोक्ष जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग हैं जो हमें यहां नहीं देखना चाहते। वे यहां हमारी मौजूदगी के पीछे नापाक इरादा देखते हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हमारी सहभागिता की ताकत से असहज महसूस करते हैं। कुछ लोग इसे हतोत्साहित करने का प्रयास भी करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान केवल तभी सफल हो सकता है जब सीमापार से आतंक का प्रवाह नहीं होगा, जब आतंकवाद के पनाहगाह और नर्सरियां बंद होगी और इनके आका इस कारोबार में लिप्त नहीं होंगे।

मोदी ने इस बात के लिए अफगानिस्तान की भूरि भूरि प्रशंसा कि वह भारत पर भरोसा करता है और दूसरों की बातों पर फैसला नहीं करता, चाहे वह रहस्यमय भारतीय वाणिज्य दूतावास के बारे में ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि आपने हमारी दोस्ती की ताकत और प्रतिबद्धता पर कभी संदेह नहीं किया और आपने हमारे गठजोड़ का लाभ देखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपने जो देखा, उसके आधार पर हमें आंका है, दूसरों के कथन के आधार पर नहीं, चाहे वह बात रहस्यमय भारतीय वाणिज्य दूतावासों के बारे में ही क्यों न हो। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कंधार और जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास के जरिए भारत उसके बलूचिस्तान प्रांत में समस्या पैदा करता है। मोदी ने कहा कि आप जानते हैं कि भारत यहां योगदान करने के लिए है, प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं, भविष्य का आधार रखने के लिए है, संघर्ष को बढ़ाने के लिए नहीं। जीवन का पुनर्निमाण करने के लिए है, देश को बर्बाद करने के लिए नहीं।

अफगानिस्तान में दशकों तक चली हिंसा का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि काबुल नदी में काफी खून बह गया है। पर्वतों की ढलानों पर कई त्रासदियां गहरी छाप छोड़ गई हैं। विवेकहीन संघर्ष की आग में काफी सपने तबाह हो गए। प्रधानमंत्री ने दुनिया से अफगानिस्तान को सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमें समयसीमा से ऊपर उठकर अफगानिस्तान का समर्थन करना चाहिए क्योंकि कट्टरपंथ के नए बादल मंडरा रहे हैं जबकि पुराने बादल हमारे आसमान पर गहरा रहे हैं क्योंकि अफगानिस्तान के लोग न केवल अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं बल्कि हम सभी दुनिया को एक सुरक्षित स्थान बनाने के लिए खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि महान अफगानिस्तान के लोगों ने अदम्य साहस के साथ संघर्ष करते हुए और बंदूक और हिंसा से नहीं बल्कि वोट और चर्चा के जरिए अपने भविष्य को आकार देने का संकल्प लिया है। हम जानते हैं कि अफगानिस्तान की सफलता के लिए उसके प्रत्येक पड़ोसी के समर्थन और सहयोग की जरूरत होगी और इस क्षेत्र में हम सभी.. भारत, पाकिस्तान, ईरान व अन्य को विश्वास और सहयोग के साथ एकजुट होना चाहिए। इन सभी देशों को हमारे साझा उद्देश्य और हमारी साझी नियति को समझना चाहिए।

मोदी ने कहा कि जब अफगानिस्तान शांति का स्वर्ग और विचारों के प्रवाह और इस क्षेत्र में वाणिज्य, ऊर्जा और निवेश का केंद्र बनेगा, तब हम सब इससे समृद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि ईरान के चाहबहार बंदरगाह सहित समेत समुद्र व जमीनी मार्ग से अफगानिस्तान के साथ संपर्क को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं। इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि पाकिस्तान दक्षिण एशिया और अफगानिस्तान और उससे आगे सेतु का काम करेगा। मैं उम्मीद करता हूं कि वह दिन जल्द आएगा जब मध्य एशिया की ऊर्जा हमारे क्षेत्र को समृद्ध बनाएगी। जब एक काबुलीवाला एक बार फिर आसानी से भारतीयों के दिलों को जीत सकेगा, जब हम भारत में अफगानिस्तान के शानदार फलों का स्वाद ले सकेंगे, जब अफगानिस्तान के लोगों को अपने पसंदीदा भारतीय उत्पाद खरीदने के लिए जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिरगा की परंपरा में निष्ठा रखने वाले अफगानिस्तान ने चुनौतियों के बावजूद लोकतंत्र को चुना है। महान अफगानिस्तान के लोगों ने अदम्य साहस के साथ संघर्ष करते हुए और बंदूक और हिंसा से नहीं बल्कि वोट व चर्चा के जरिए अपने भविष्य को आकार देने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि यह अफगानिस्तान के असंख्य और अनाम लोगों को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने भविष्य के लिए अपनी कुर्बानी दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप (अफगानिस्तान) इतिहास के चौराहे पर खड़े हैं और आपका इतिहास हमें बता रहा है कि आपने किसी को प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं बनने दिया या दूसरे के स्वार्थों की पूर्ति नहीं होने दी। उन्होंने कहा कि आपने कवि कुशाल खान खट्टक के उन विचारों को जिया कि राष्ट्र का सम्मान और राष्ट्र की कीर्ति सर्वोपरि है। आप में अपने पड़ोसियों के साथ शांति से रहने की बुद्धिमता है और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने का साहस भी है। आप पख्तून, उज्बेक, ताजिक, हजारा कोई भी हो सकते हैं। आप मुसलिम, हिंदू, सिख हो सकते हैं। लेकिन आप गर्व के साथ अफगान हैं जो एक राष्ट्र एक व्यक्ति के साथ एकजुट हैं। आपने धर्म के नाम पर या अपनी पहचान के नाम पर लड़ाई की होगी लेकिन अफगानिस्तान के लोगों के लिए अब शांतिपूर्वक साथ रहने का समय है। मोदी ने कहा कि जो लोग बंदूक के जरिए सत्ता चाहते हैं वे बैलेट के जरिए सत्ता मांगे। जिन लोगों ने घरों को तबाह किया है, वे अब राष्ट्र निर्माण करें। यह आपकी भूमि है और ये आपके लोग हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। उम्मीदें नहीं समाप्त होनी चाहिए। किसी बालिका को अंधकार में नहीं धकेला जाना चाहिए, अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। किसी बेटे को बंदूक या दूसरी भूमि पर शरण लेने में से विकल्प को चुनने की स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए। किसी मां को भय के साए में बच्चों का पालन पोषण करने की स्थिति से नहीं गुजरना चाहिए, मस्जिद में नमाज पढ़ते हुए धर्म के नाम पर किसी को नहीं मारा जाना चाहिए। किसी बुजुर्ग को उस स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए कि संघर्ष में उसका बेटा जान गंवा रहा हो।

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