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पाकिस्तान पर फिर बरसे मोदी, कहा- पड़ोस का एक देश आतंकवाद को जन्म दे रहा है, उसका निर्यात कर रहा है

मोदी ने कहा, ‘इस उकसाने वाले को अलग-थलग करने और इस पर पाबंदी लगाने का समय आ गया है।’

Author वियंतियन | September 8, 2016 9:24 PM
वियंतियन के लाओस में 14वें आसियान-भारत सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (AP Photo/Bullit Marquez/8 Sep 2016)

पाकिस्तान पर हमला तेज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (8 सितंबर) को कहा कि हमारे पड़ोस में एक देश है जो आतंकवाद पैदा करता है और उसका निर्यात करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा इस उकसाने वाले देश को अलग-थलग करने और उस पर पाबंदी लगाए जाने पर जोर दिया। मोदी ने पूर्वी एशिया सम्मेलन (ईएएस) में पाकिस्तान का नाम लिए बिना अपने भाषण में कहा, ‘हमारे पड़ोस में एक देश है जिसका प्रतिस्पर्धात्मक लाभ केवल आतंकवाद को पैदा करने और उसका निर्यात करने में है।’ मोदी ने कहा, ‘समय आ गया है कि हम आतंकवाद के इस वैश्विक निर्यातक को रोकें।’ इससे पहले यहां 14वें आसियान-भारत शिखर-सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने ‘आतंक का निर्यात’ बढ़ने पर गहरी चिंता प्रकट की। उनका इशारा जाहिर तौर पर पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के लिए समान सुरक्षा खतरा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नफरत की विचारधारा के माध्यम से कट्टरता बढ़ाना और तीव्र हिंसा का प्रसार अन्य सुरक्षा खतरे हैं। उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद में बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप के बीच पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा, ‘आतंक का निर्यात, बढ़ती कट्टरता और तीव्र हिंसा हमारे समाजों के लिए समान सुरक्षा खतरे हैं।’

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मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति ली क्विंग की मौजूदगी में पूर्वी एशिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह (आतंकवाद का) निर्यात शांति के लिए जगह कम कर रहा है और हिंसा के लिए जगह बढ़ा रहा है और यह सभी की शांति और समृद्धि को जोखिम में डाल रहा है।’ मोदी ने कहा, ‘इस उकसाने वाले को अलग-थलग करने और इस पर पाबंदी लगाने का समय आ गया है।’ तीन दिन पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि दक्षिण एशिया में एक देश है जो आतंकवाद के एजेंटों को प्रसारित कर रहा है। मोदी ने सोमवार (5 सितंबर) को हांगझोउ में जी-20 के नेताओं से कहा था कि आतंकवाद को प्रयोजित करने वालों को अलग-थलग किया जाना चाहिए, पुरस्कृत नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें न केवल आतंकवादियों पर बल्कि उनका समर्थन करने वाले पूरे तंत्र पर भी निशाना साधने की जरूरत है।’ मोदी ने कहा, ‘और ऐसे सरकारी तत्वों के लिए हमारी कड़ी से कड़ी कार्रवाई तय होनी चाहिए जो राजकीय नीति के औजार के रूप में आतंकवाद का सहारा लेते हैं।’

मोदी ने चेतावनी दी कि आतंकवाद खुले और बहुलवादी समाज के लिए सबसे गंभीर चुनौती है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि इस समस्या से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण एशिया के अधिकतर देश आर्थिक समृद्धि के लिए शांतिपूर्ण रास्ते पर चल रहे हैं लेकिन एक पड़ोसी देश इनसे अलग है। मोदी ने सम्मेलन में कहा, ‘प्रतिस्पर्धी भू-राजनीतिक, परंपरागत और गैर-परंपरागत चुनौतियां क्षेत्र की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए खतरा पैदा करती हैं।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि आसियान वृहद क्षेत्रीय एकीकरण और सहयोग के प्रयासों का नेतृत्व करता रहेगा और उनके केंद्र में रहेगा। आसियान-भारत सम्मेलन में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति के केंद्र में है। उन्होंने 10 सदस्यीय समूह में शामिल देशों के राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमारी साझेदारी क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाने की एक समान प्राथमिकताओं से संचालित है।’ मोदी ने कहा कि निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं की सदस्यता के माध्यम से और नरसंहार के हथियारों के पूर्ण और सत्यापन योग्य उन्मूलन को करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ईएएस परमाणु अप्रसार पर वक्तव्य को स्वीकार कर रहा है और भारत उसके उद्देश्यों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मोदी ने कहा, ‘यह प्रयासों में समानता को रेखांकित करता है।’ प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत क्षेत्र में चल रहे आर्थिक एकीकरण को गहरा करने के लिए एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा सकता है। मोदी ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि नालंदा विश्वविद्यालय को जुलाई 2016 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत ईएएस की रूपरेखा के दायरे में क्षेत्रीय, रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं के साझा अनुसरण में अडिग रहेगा। प्रधानमंत्री यहां 18 सदस्यों वाले पूर्वी एशिया सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। ईएएस में संस्थापक सदस्य भारत के अलावा आसियान के दस सदस्य देश हैं और इनके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, रूस, दक्षिण कोरिया और अमेरिका हैं।

शुरू में ईएएस का सालाना आयोजन पूर्वी एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के 16 देशों के नेता करते थे। बाद में 2011 में छठे ईएएस सम्मेलन में सदस्यता बढ़ाई गई और अमेरिका तथा रूस के शामिल होने के साथ कुल 18 देश हो गए। ईएएस का आयोजन आसियान के नेताओं के वार्षिक सम्मेलन के बाद होता है। पहले ईएएस सम्मेलन का आयोजन 14 दिसंबर, 2005 को मलेशिया के कुआलालंपुर में किया गया था। आसियान-भारत सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कहा, ‘आसियान के साथ हमारी साझेदारी कई स्तरों पर समन्वय, सहयोग के माध्यम से कार्रवाई की वकालत करती है।’ मोदी ने कहा, ‘हम साइबर सुरक्षा में कट्टरता को कम करने में और आतंकवाद निरोधक कार्रवाई में सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाना चाह रहे हैं।’


Top 5 News: Modi On Terrorism In India-ASEAN… by Jansatta

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