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मोदी की पुतिन से वार्ता आज, कई समझौते होने की उम्मीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को यहां पहुंचने पर उनका शानदार स्वागत किया गया। मोदी की इस पहली रूस यात्रा के दौरान दोनो देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा और हाइड्रोकार्बन जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौते होना तय है..

Author मास्को | December 24, 2015 12:31 AM
रूस पहुंचने के बाद वहां के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को यहां पहुंचने पर उनका शानदार स्वागत किया गया। मोदी की इस पहली रूस यात्रा के दौरान दोनो देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा और हाइड्रोकार्बन जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौते होना तय है, जिससे दोनो देशों के बीच दशकों से बंधी मैत्री की डोर और मजबूत होगी। रिमझिम बारिश और घने बादलों के बीच नुकोवा 2 हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री के पहुंचने पर उन्हें गार्ड आॅफ आॅनर पेश किया गया। मोदी ने अंग्रेजी और रूसी में ट्वीट किया, ‘मास्को पहुंचा। इस छोटी सी, लेकिन बहुत महत्त्वपूर्ण यात्रा में कई कार्यक्रम कतार में हैं।’

भारत और रूस के बीच होने वाली वार्षिक शिखर बैठक की शृंखला की 16वीं कड़ी में मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दोनो देशों के बीच आर्थिक आदान-प्रदान बढ़ाने और सामरिक संबंधों में इजाफा करने पर खास ध्यान दिए जाने की संभावना है। दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक है। इसके अलावा सीरिया के हालात और आतंकवाद के खतरे से निपटने के उपायों जैसे विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत होगी।

यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाते हुए मोदी ने कहा कि रूस विश्व में भारत का ‘सबसे मूल्यवान’ मित्र है और वे गुरुवार को पुतिन के साथ होने वाली अपनी बातचीत के नतीजों को लेकर बहुत आशान्वित हैं। रूस रवाना होने से पहले मोदी ने नई दिल्ली में कहा कि रूस के साथ हमारे रिश्ते अद्भुत हैं, जिनमें मानवीय हित से जुड़े सभी क्षेत्र शामिल हैं। मोदी गुरुवार को यहां रूस के राष्ट्रीय संकट प्रबंधन केंद्र का दौरा करेंगे। यह एक बहु स्तरीय समन्वय केंद्र है जो आपदा की स्थिति में विभिन्न एजंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ ही लोगों को खतरे से अवगत कराता है।

विदेश सचिव एस जयशंकर ने कोई खास ब्योरा दिए बिना मंगलवार को कहा था कि मोदी और पुतिन दोनो ही रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत रूस से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा ब्योरा साझा करने को कहेगा, उन्होंने कहा था कि यह मामला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की हाल की मास्को यात्रा के दौरान उठ चुका है। उन्होंने कहा था- इंतजार करते हैं और देखते हैं कि क्या होता है। रूस की प्रतिक्रिया पर हम तब तक कुछ नहीं कह सकते, जब तक वह हमें मिल नहीं जाती।

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