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मोदी ढाका में: मुक्ति संग्राम पर अटल रुख को सलाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया प्रतिष्ठित मुक्ति संग्राम सम्मान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी उनके और उन जैसे अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा हैं।

Author June 8, 2015 1:10 PM
बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को मुक्ति संग्राम सम्मान से नवाजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया प्रतिष्ठित मुक्ति संग्राम सम्मान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी उनके और उन जैसे अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा हैं।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने यहां राष्ट्रपति आवास बंग भवन में आयोजित शानदार समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाजपेयी को दिया जाने वाला बांग्लादेश मुक्ति संग्राम सम्मान सौंपा। इस समारोह में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और यहां की सरकार के मंत्रियों, शीर्ष अधिकारियों व प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया।

नब्बे वर्षीय वाजपेयी की ओर से सम्मान ग्रहण करने के बाद मोदी ने कहा, ‘यह दिन हम सभी भारतीयों के लिए बड़े गर्व का है कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे एक महान नेता को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया और आम आदमी के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। राजनीतिक दृष्टिकोण से वे मेरे जैसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा हैं’।

बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को दिए वाजपेयी के समर्थन को याद करते हुए मोदी ने कहा कि वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ ने मुक्ति संग्राम के समर्थन में सत्याग्रह का आयोजन किया था और एक युवा कार्यकर्ता के रूप में वे अपने गांव से इसमें हिस्सा लेने के लिए आए थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक युवा कार्यकर्ता के रूप में वे भी प्रत्येक भारतीय की तरह चाहते थे कि बांग्लादेश बनने का, वहां के लोगों का सपना सच हो।

मोदी ने मौजूद लोगों की तालियों के बीच कहा, ‘जब आप सम्मान की लड़ाई लड़ रहे थे, मैं भी उन भारतीयों में शामिल था जो तहे दिल से चाहते थे कि आपके सपने पूरे हों’।’ उन्होंने कहा कि जब मुक्ति योद्धा बांग्लादेश के लिए खून बहा रहे थे, तब भारतीय भी बांग्लादेश के सपने को साकार करने के लिए उनके साथ मिलकर लड़ रहे थे। मोदी ने कहा कि हालांकि वाजपेयी विपक्ष में थे लेकिन वे बांग्लादेश के मुक्ति संघर्ष के मुद्दे पर भारत को दिशा प्रदान करने में सक्षम थे।

यहां दो दिवसीय यात्रा पर आए प्रधानमंत्री ने कहा कि वाजपेयी अगर स्वयं यह सम्मान प्राप्त करने के लिए आज यहां उपस्थित हो पाते तो कितना अद्भुत होता। उन्होंने छह दिसंबर 1971 को भारतीय संसद में वाजपेयी के भाषण को याद किया जिसमें कहा गया था कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अटूट हैं जो किसी दबाव में नहीं टूटेंगे और किसी कूटनीति का शिकार नहीं बनेंगे।

भारत रत्न से सम्मानित 90 वर्षीय वाजपेयी खराब स्वास्थ्य के कारण समारोह में मौजूद नहीं हो सके। प्रशस्ति पत्र में वाजपेयी की सराहना एक ‘बेहद सम्मानित राजनीतिक नेता’ के रूप में की गई है और बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को समर्थन के लिए उनकी सक्रिय भूमिका को मान्यता प्रदान की गई।

इसमें कहा गया है कि भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य के रूप में वाजपेयी ने इस दिशा में कई कदम उठाए। इसमें कहा गया है, ‘आर्गेनाइजर के संपादकीय में वाजपेयी ने बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान द्वारा बांग्लादेश की स्वतंत्रता की ऐतिहासिक घोषणा का स्वागत किया और भारत सरकार से बांग्लादेश की सरकार को मान्यता प्रदान करने और स्वतंत्रता सेनानियों को जरूरी मदद प्रदान करने को कहा था’। प्रशस्ति पत्र में मुक्ति संग्राम को समर्थन देने में तेजी लाने के लिए भारत सरकार से मांग करने के लिए जनसंघ की भूमिका को भी मान्यता प्रदान की गई है।

प्रशस्ति पत्र में बांग्लादेश और उसके अस्तित्व में आने के प्रयास में लगे लोगों के पक्ष में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाजपेयी के दृढ़ रुख का जिक्र किया गया। इस अवसर पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति हामिद ने कहा कि विपक्ष में होने के बावजूद वाजपेयी ने राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बांग्लादेश के मुद्दे पर पूरा समर्थन दिया था।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश सौभाग्यशाली रहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय भारत उसके साथ था और उन्होंने मुक्ति संग्राम में वाजपेयी की गतिविधियों के अहम योगदान को याद किया। उन्होंने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में भारत की मदद को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी का बांग्लादेश के प्रति प्यार जारी रहा और पहले विदेश मंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान यह देखा गया।

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