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प्रधानमंत्री जी, निवेशकों को लुभाने से पहले कुछ काम घर में भी!

अमिष श्रीवास्तव मैं न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन मेंं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने आया था लेकिन इंटरनेट पर एक खबर और एक तस्वीर पर मेरी नजर पड़ गई। लिहाजा जो लिखना चाहता था, उससे भटक गया। उस खबर और तस्वीर पर मैं वापस आऊंगा, पहले देखते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी मेडिसन गार्डेन में […]

Author Updated: September 29, 2014 8:42 AM

अमिष श्रीवास्तव

मैं न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन मेंं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने आया था लेकिन इंटरनेट पर एक खबर और एक तस्वीर पर मेरी नजर पड़ गई। लिहाजा जो लिखना चाहता था, उससे भटक गया। उस खबर और तस्वीर पर मैं वापस आऊंगा, पहले देखते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी मेडिसन गार्डेन में और अमेरिका में क्या कह रहे हैं।

ये बात तय है कि प्रधानमंत्री मोदी को काम करना जितना पसंद है, उतना ही उसे लोगों तक ले जाना भी। ये दोनों ही फन उन्हें आते भी खूब हैं। काम के नतीजे पूरी तरह आने में तो वक्त लगेगा लेकिन मोदी जब अपने एजंडे को पंच लाइनों में, कहानियों में बखूबी ढाल कर, शानदार कपड़े पहनकर हाथ लहराते हुए आते हैं तो सामने हजारों की संख्या में बैठे गद्गद् लोगों की प्रतिक्रिया से ये बता पाना मुश्किल है कि आप दिल्ली के लाल किले में हैं या अमरीका के मेडिसन स्क्वायर गार्डेन में। कहा ये भी जा रहा है कि मोदी के न्यूयार्क भाषण के लिए अगर और बड़ी जगह ढूंढी गई होती तो वो भी भर जाती लेकिन 18 हजार ही सही। मोदी ने शुरुआत के पांच मिनट में ही भारतीय अमरीकियों से कनेक्शन बना लिया था। बातों-बातों में मोदी अपने अंदाज में अपनी बात तो कह गए। अमेरिका में उनका संदेश बहुत साफ है और बस एक है – भारत में निवेश करो, पैसे लगाओ, सरकार करेगी आपकी पूरी मदद, आइए मेक इन इंडिया।

नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं, विदेशी संबंधों को मजबूत करने के लिए चार महीने से भी काम समय में नेपाल, भूटान व जापान गए और अब अमेरिका आए हैं। इस बीच चीन के राष्ट्रपति भी भारत आ चुके हैं। नरेंद्र मोदी जब चुनाव जीतने वाले थे तो इस बात का अंदाजा तो था कि मोदी देश को अलग तरीके से चलाएंगे। लेकिन इस बात का अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि भारत का कोई प्रधानमंत्री शुरुआत के ही दिनों में ही अपने समय का इतना बड़ा हिस्सा विदेश नीति को मजबूत करने में लगाएगा। बहुत अच्छा है। ये सब कुछ ठीक है। उपचुनावों को अगर मोदी की हार न मानी जाए तो मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी का कद बढ़ा है। पूरी दुनिया मेंं घूम घूम कर वो ये कह रहे हैं कि उनकी सरकार निवेशकों को हाथों हाथ लेगी, एक बार मिल तो लें। आएं भारत मेंं निवेश करें।

अब वापस आते हैं उस तस्वीर पर – समाचार एजंसी ‘रायटर्स’ की मार्च, 2013 की तस्वीर कई जगह इस्तेमाल की जा रही है। इस तस्वीर में विश्व हिंदू परिषद के कुछ युवा सिर पर लाल पट्टी बांधे हाथ में छोटे त्रिशूल लेकर आक्रामक अंदाज मेंं फोटोग्राफर के लिए पोज दे रहे हैं, तस्वीर मदद कर रही है एक बड़ी हेडलाइन को समझाने का। शीर्षक है- ‘हाडर्लाइन इंडियन हिंदू ग्रूप वार्न्स मुसलिम्स, क्रिस्चियंस फ्रॉम फेस्टिवल’। इसी तरह के कई और शीर्षक तमाम अखबारों में हैं।

अब ये सोच कर देखियेगा कि अमेरिका में कोई निवेशक ये देख कर क्या सोच रहा होगा !

बात छोटी सी है- विदेश नीति एक तरह से आंतरिक नीति का ही विस्तार होती है। किसी देश मेंं शांति हो, सरकार मेंं स्थायित्व हो, तो निवेशकों को इतना मनाना नहीं पड़ता है। दूसरे देशों के निवेशक उस देश के सरकार का आश्वासन तो ढूंढते हैं लेकिन साथ ही खुद भी उन देशों के आंतरिक हालात और नीतियों पर नज़र भी रखते हैं। ऐसी तस्वीरें और ऐसे फतवे किसी और देश मेंं निकाले जाएं तो कौन भारतीय निवेशक उस देश मेंं निवेश करने जाएगा। कह बस इसलिए रहा हूं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में ऐसी खबरों की संख्या बढ़ी है। मैं कभी कभी सिर्फ ये सोचता हूं कि प्रधानमंत्री छोटे अफसर से लेकर अपने बड़े मंत्रियों को काबू मेंं कर सकते हैं, लोगों की देश में व सरकार में आस्था बढ़ा सकते है, विश्वास सा लगता है कि जो गलत है वो रुकेगा तो फिर कुछ संगठनों के ये बददिमाग काम क्यों नहीं। प्रधानमंत्री जी दिल से कहता हूं आप तो गजब हैं लेकिन निवेशकों को लुभाने से पहले कुछ काम घर में भी।

 

 

 

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