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मोदी ने अफ़गानिस्तान से कहा, ‘यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जब अफगानिस्तान के लोगों को सच्चे और उदार दोस्तों के तौर पर देखने के भारतीयों के नजरिए की बात की तो मशहूर हिंदी फिल्म ‘जंजीर’ में दिग्गज अभिनेता प्राण की अदाओं से सजे पठान ‘शेरखान’ के यादगार किरदार का जिक्र करना नहीं भूले..

Author काबुल | Updated: December 26, 2015 2:04 AM
प्यार लेकर नूर आया, प्यार लेकर ताजगी : काबुल में शुक्रवार को नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करते अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जब अफगानिस्तान के लोगों को सच्चे और उदार दोस्तों के तौर पर देखने के भारतीयों के नजरिए की बात की तो मशहूर हिंदी फिल्म ‘जंजीर’ में दिग्गज अभिनेता प्राण की अदाओं से सजे पठान ‘शेरखान’ के यादगार किरदार का जिक्र करना नहीं भूले। मोदी ने अफगान सांसदों को दिए भाषण में रवींद्रनाथ टैगोर की लिखी मशहूर कहानी ‘काबुलीवाला’ के इस नाम वाले शीर्ष किरदार का भी उल्लेख किया और साथ ही दोनों देशों की जनता के बीच मजबूत सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों को उजागर करने के लिए अफगान क्रिकेट टीम की सफलता की भी बात की।

भारतीय प्रधानमंत्री ने सदियों पुराने संबंधों के लिए कई प्रतीकात्मक संदर्भों के साथ अफगानिस्तान की संसद को संबोधित करते हुए वहां के लोगों की दिलेरी, साहस और उदार मित्रता के लिए उनकी तारीफ की। उन्होंने ‘जंजीर’ फिल्म में हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा पठान किरदार ‘शेरखान’ पर फिल्माए एक मशहूर गीत के बोल याद किए और मुस्कुराते हुए कहा, ‘यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी’। उन्होंने अफगानिस्तान के सांसदों के लिए इस पंक्ति का अनुवाद भी किया। मोदी ने कहा कि भारत सदियों पुराने अपने संबंधों में अफगान लोगों को कुछ इस तरह देखता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच परिदृश्य में सुधार पर जोर दिया जहां भारतीय और अफगान मिलकर आर्थिक समृद्धि की दिशा में काम कर सकें और इस दौरान उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के ‘काबुलीवाला’ का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें दोनों देशों के लोगों के बीच और अधिक मुक्त आवागमन की उम्मीद है ताकि ‘काबुलीवाला’ एक बार फिर भारत आ सके और दिलों को जीत सके। भाषण शुरू करते हुए मोदी ने समान रुचि वाले एक और विषय ‘क्रिकेट’ की बात की। अफगानिस्तान की अंडर-19 क्रिकेट टीम द्वारा पहली घरेलू कड़ी में जिम्बाब्वे को हराने पर भारतीय प्रधानमंत्री ने बधाई दी। मोदी ने कहा, ‘हमें गौरव की अनुभूति होती है’। उन्होंने इस बात पर भी खुशी जताई कि अफगान क्रिकेट टीम दिल्ली के पास विश्वकप की तैयारी कर रही है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सूफी कवि जलालुद्दीन रूमी से लेकर महाभारत के प्रसिद्ध चरित्र ‘गांधारी’ तक का उल्लेख किया और दोनों देशों के बीच संबंधों को रेखांकित करने के लिए उन्होंने प्राचीनकालीन बौद्ध स्मारकों का भी जिक्र किया। इस दौरान उनके भाषण के बीच-बीच में तालियां बजती रहीं। मोदी ने अफगान संसद की भव्य नई इमारत का उद्घाटन करने के बाद सांसदों को संबोधित किया। अफगान संसद का निर्माण भारत ने नौ करोड़ डॉलर की लागत से किया है।

‘काबुलीवाला’ व ‘जंजीर’ के किरदारों से मोदी ने दी भारत-अफगान दोस्ती की मिसाल
काबुलीवाले का इंतजार
मुझे दोनों देशों के लोगों के बीच और अधिक मुक्त आवागमन की उम्मीद है ताकि ‘काबुलीवाला’ एक बार फिर भारत आ सके और दिलों को जीत सके। -नरेंद्र मोदी

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