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म्यांमार: संसद के नये सत्र की शुरुआत, आंग सान सू की पार्टी का दबदबा

म्यांमार में 1962 से सैन्य शासन लागू है। करीब 15 साल नजरबंद रही आंग सान सू की आखिरकार म्यांमार की सत्ता संभालने जा रही हैं। हालांकि वो स्वयं राष्ट्रपति ना बन कर ऊपर से सरकार पर नियंत्रण रखेंगी।

Author म्यान्मा | February 1, 2016 16:31 pm
एनएलडी की सबसे बड़ी नेता सू की 2008 के संविधानिक नियम के कारण स्वयं राष्ट्रपति नहीं बन सकती क्योकि उनके बच्चे के पास म्यांमार की नागरिकता नहीं है।

म्यांमार में 1962 में लागू हुए सैन्य शासन के बाद पहली बार चुनी हुई सरकार सत्ता संभालने जा रही है। नवंबर माह में हुए चुनाव में आंग सान सू की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) 80% सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी। सोमवार को संसद की कार्यवाही के पहले दिन चुने हुए सदस्य अपनी नेता आंग सान सू की के साथ शपथ-ग्रहण सामारोह में शामिल हुए।

सू की पार्टी पिछले कई सालों से देश में लोकतंत्र के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं सेना के खिलाफ आंदोलन के सिलसिले में जेल भी जा चुके हैं। करीब 60 सालों के बाद चुने हुए सांसदों की यह पहली सभा देश में हो रहे सत्ता परिवर्तन की शुरुआत है। उम्मीद है कि अप्रैल माह में पार्टी राष्ट्रपति पद के चयन की प्रक्रिया पूरी कर लेगी।

सैन्य शासन के खिलाफ आवाज उठाने के जुर्म में 20 साल जेल काट चुके पायो चो ने इस मौके पर कहा कि,” इतने सालों में यह म्यांमार की पहली संसद है जो सीधे लोगों ने चुनी है हमारे पास बहुमत है। यह हमारा कार्तव्य है कि हम अपने घोषणापत्र में किये वादों को पूरा करें। और इस देश के लोगों के जीवन में सार्थक बदलाव लायें” इससे पहले साल 2010 में बढ़ते दबाव के कारण सैन्य सरकार ने थोड़ी नरमी बरतते हुए नया संविधान ड्राफ्ट किया था जिसमें चुनी हुई सरकार सेना के साथ सत्ता में भागीदारी कर सकती थी।

एनएलडी की सबसे बड़ी नेता सू की 2008 के संविधानिक नियम के कारण स्वयं राष्ट्रपति नहीं बन सकती क्योकि उनके बच्चे के पास म्यांमार की नागरिकता नहीं है। सू की का कहना है कि वो राष्ट्रपति के ऊपर रह कर शासन पर नियंत्रण रखेंगी लेकिन यह कैसे संभव हो पायेगा यह अभी तक पार्टी साफ नहीं किर पाई है। फिर भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस महीने के अंत कर राष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया शुरू कर ली जायेगी।

1990 के आम चुनाव में भी एनएलडी जीत मिली थी लेकिन तब सैन्य शासन ने नतीजों को स्वीकार करने से मना कर दिया था जिस कारण सू की को करीब 15 साल नजरबंदी में बिताने पड़े थे। पिछले साल हुए चुनाव में सेना ने करीब एक चौथाई सीटों पर जीत दर्ज की है। अप्रैल माह मे संसद के दोनों सदनों के सदस्य राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार और सेन्य उम्मीदवार में से किसी एक चुनाव करेंगे। चुनाव में जीता हुआ उम्मीदवार राष्ट्रपति और हारा हुआ उम्मीदवार उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालेगा।

पार्टी ने पिछले हफ्ते अपने बयान में कहा था कि इस हफ्ते स्पीकर का चयन कर लिया जायेगा और उसके बाद 8 फरवरी से देश के अलग अलग राज्यों में सरकार बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जायेगी।

म्यांमार के करीब 51.5 लाख लोगों ने एनएलडी पर विश्वास जताया है। लोगों को लगता है सालों से देश में चल रहे धार्मिक झगड़े, खराब होती अर्थव्यवस्था से यह पार्टी निजात दिला सकती है। सैन्य शासन में स्पीकर रहे एस. मैन का इस बारे में कहना है कि लोगों को लगता है कि एनएलडी के सत्ता में आते ही सारी समस्याएं खत्म हो जायेंगी। विदेशी निवेश देश में आने लगेगा और सब ठीक हो जायेगा। देश के सामने जो चुनौतियां हैं उनसे निपटने के लिए एनएलडी को सही लोगों को सही जिम्मेदारी देनी पड़ेगी।

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