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यहां मुसलमानों को बंधक बना अमेरिकी कंपनी के लिए कराया जा रहा काम!

चीन के एक नजरबंदी कैंप में करीब 10 लाख मुसलमानों को नजरबंद कर के रखा गया है, जहां इनसे जबरदस्ती काम करवाया जा रहा है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फोटाे- AP)

चीन के पश्चिमी इलाके में कांटेदार तारों से घिरा एक कैम्पस है, जहां करीब 30 डोरमेटरी, स्कूल, गोदाम और वर्कशॉप है। यहां सैंकड़ों कैमरे और सुरक्षाकर्मियों द्वारा पहरेदारी की जा रही है। हर पल नजर रखी जा रही है। ये शिंजियांग प्रात का एक नजरबंदी कैम्प है, जहां करीब 10 लाख मुसलमानों को बंधक बनाकर रखा गया है। इन मुसलमानों में महिला और पुरुष दोनों शामिल है। इनसे जबरन स्पोर्ट्सवेयर बनवाए जा रहे हैं। इन स्पोर्ट्सवेयर को अमेरिकी कंपनी और स्कूलों में सप्लाई की जाती है। चीन की सरकार इन्हें विनिर्माण और फूड इंडस्ट्री में भी काम करने के लिए मजबूर कर रही है। इसी कैंम्प के भीतर कारखाने चल रहे हैं, जिनमें से कुछ को प्राइवेट फर्मों द्वारा चलाए जा रहे हैं।

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की इस कैंप के अंदर एक ऐसे कारखाने से चल रहे जहां से अमेरिका की बैजर स्पोर्ट्सवेयर को सामान भेजे जा रहे हैं। यह शिपमेंट दर्शाता है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में मजदूरों द्वारा जबरन बनाए गए सामान को रोकना कितना मुश्किल है। हालांकि, इस तरह से निर्यात करना अमेरिका में अवैध है। बैजर के सीईओ जॉन एंटन ने रविवार को कहा कि जब तक जांच होती है, तब तक कंपनी दूसरे जगह से स्पोर्ट्सवेयर मंगवाएगी।

वहीं, चीन के पदाधिकारियों का कहना है कि कैंप में कॉल ट्रेनिंग सेंटर है, जहां उईगर, कजाखा और अन्य, ज्यादातर मुस्लिम को मुफ्त वोकेशनल ट्रेनिंग दी जा रही है। यह अल्पसंख्यकों को आधुनिक सभ्यता में लाने और शिंजियांग में गरीबी हटाने के कार्यक्र का एक हिस्सा है। वे कहते हैं कि कैंप में रह रहे लोगों ने वोकेशनल ट्रेनिंग प्राप्त करने के लिए एग्रीमेंट पर अपने हस्तक्षर भी किए हैं।

इस पूरे मामले पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया पर ट्रेनिंग सेंटर के बारे में गलत रिपोर्ट प्रकाशित करने का आरोप लगाया है। प्रवक्ता हुआ चुनिंग ने कहा, “ये रिपोर्ट बेबुनियाद और सिर्फ कही-सुनी बातों पर आधारित है।” हालांकि, दर्जनों लोग जो इस कैंप में रह चुके हैं या उनके रिश्तेदार या दोस्त रह चुके हैं, ने एपी को बताया कि कैंप के अंदर लोगों को फैक्ट्रियों में काम करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं दिया गया। इनमें से अधिकांश उइगर और कजाखा मुसलमान हैं। यहां तक की प्रोफेशनल काम करने वालों को भी छोटा काम करने के लिए सिखाया गया। फैक्ट्री में मजदूरी भी एक समान नहीं मिलती है। कुछ को एकदम ही पैसे नहीं दिए जाते तो कुछ को सैंकड़ो डॉलर मिलते हैं।

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