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स्कूल ने लगाई मुस्लिम छात्रों के खुले आम नमाज पढ़ने पर रोक, कहा- गैर-मुस्लिम टीचर-छात्र महसूस करते हैं दबाव

स्कूल द्वारा स्टाफ को भेजे पत्र के फेसबुक पर सार्वजनिक हो जाने के बाद जर्मनी में धार्मिक आजादी को लेकर बहस शुरू हो गयी है।

जर्मन स्कूल ने कहा है कि गैर-मुस्लिम टीचरों और छात्रों को मुस्लिम छात्रों के खुले आम नमाज पढ़ने से दबाव महसूस हो रहा था। (फाइल फोटो)

जर्मनी के एक हाई स्कूल ने मुस्लिम छात्रों के खुले आम नमाज पढ़ने, वजू करने और जानमाज (छोटी चटाई या कालीन) के इस्तेमाल नमाज पर रोक लगा दी है। समाचार वेबसाइट अल जज़ीरा के अनुसार स्कूल ने जानमाज और खुले आम नमाज पढ़ने, वजू को दूसरे छात्रों के लिए “भड़काऊ” बताया है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी जर्मनी के वुपरताल स्थित स्कूल ने फरवरी में अपने स्टाफ को चिट्ठी लिखकर मुसलमान छात्रों द्वारा स्कूल परिसर में नमाज पढ़ने की “सूचना” देने के लिए कहा। स्कूल के इस फैसले के बाद जर्मनी में धार्मिक आजादी के अधिकार को लेकर बहस छिड़ गयी है।

स्कूल के प्रवक्ता ने गुरुवार ( दो मार्च) को डीपीए न्यूज एजेंसी से कहा स्कूल के टीचर और छात्र मुस्लिम छात्रों के बरताव की वजह से दबाव महसूस करते थे। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल प्रवक्ता ने कहा, “पिछले कुछ समय से ये साफ दिख रहा था मुस्लिम बच्चे दूसरों के सामने ही प्रार्थना कर रहे हैं, बाथरूम में वजू (हाथ-पैर धोना) कर रहे हैं, सबके सामने अपने जानमाज को लपेटते थे, अपने शरीर को एक खास मुद्रा में मोड़ते थे। स्कूल में इसकी अनुमति नहीं है।”

स्कूल प्रशासन का ये पत्र पिछले हफ्ते किसी ने फेसबुक पर पोस्ट कर दिया था जिसके बाद कई सोशल मीडिया यूजर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। लोगों की आलोचना के बाद स्कूल चलाने वाले नगरपालिका अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि इस पत्र में “गलत” शब्दों का चयन किया गया है लेकिन इसका मकसद इन बच्चों को प्रार्थना करने का उपाय निकालने के चर्चा करवाना है। हालांकि नगरपालिका अधिकारियों ने कहा कि स्कूल को बच्चों को इससे रोकने का अधिकार है। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वो स्कूल के फैसले के साथ है।

पिछले कुछ समय से जर्मनी समेत पूरे यूरोप में मुसलमानों प्रवासियों को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। यूरोप के कई देशों में इस्लामी आंतकवादी हमला करके सैकड़ों लोगों की जान ले चुके हैं। जर्मनी में 11 लाख प्रवासी मुसलमानों को शरण दी है। लेकिन पिछले कुछ समय से देश में मुस्लिम विरोधी और प्रवासी विरोधी दक्षिणपंथी पार्टियों का प्रभाव बढ़ा है।

2050 तक भारत में होंगे सबसे ज्यादा मुस्लिम!

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