ताज़ा खबर
 

मुर्तजा कुरैशी : सबसे कम उम्र का राजनीतिक बंदी

सऊदी अरब के कानून में नाबालिग को फांसी नहीं दी जा सकती इसलिए मुर्तजा के बालिग होने का इंतजार किया जाता रहा और वह 2019 में जैसे ही 18 साल का हुआ कोर्ट में पेश किया गया और सरकारी वकील ने मुर्तजा के लिए फांसी की मांग की और उसे मौत की सजा सुना दी गई।

Author Published on: June 25, 2019 5:23 AM
मुर्तजा कुरैशी ने अपने भाई को खोने के बाद सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की ठानी।

जिस उम्र में बच्चे खेल और केवल खेल में मस्त रहते हैं उस उम्र में लोकतंत्र बहाली की मांग करना और इंसानियत के हक के लिए लड़ाई- लड़ाई भी ऐसी जो 10 साल के बच्चे को मौत की सजा तक पहुंचा दे। यह कहानी है सऊदी अरब के मुर्तजा कुरैशी की। अंतरराष्ट्रीय दबाव में उसकी जान बच गई है, लेकिन 2022 तक उसे जेल में रहना होगा। वर्ष 2011 में सऊदी अरब में तानाशाही के खिलाफ लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की थी। सरकार ने इसे कुचलने की कोशिश की। इस आंदोलन में 17 साल का अली कुरैशी पुलिस की गोलियों का शिकार हुआ।

अली कुरैशी के दस साल के भाई मुर्तजा कुरैशी ने अपने भाई को खोने के बाद सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की ठानी। 2011 में ‘अरब स्प्रिंग’ कहे गए इस आंदोलन के दौरान उसने अपने 30 दोस्तों के साथ साइकिल से भटकते हुए अभियान चलाया। उसने कई धरना प्रदर्शन भी किए। दस साल के बच्चे का सरकार के गुप्तचर पीछा करने लगे। मुर्तजा ने राजतंत्र का खुलकर विरोध किया। इसके वीडियो भी बनाए गए। कुछ दिन बाद ही उसे बहरीन से गिरफ्तार कर लिया गया।

उस पर सऊदी अरब के दक्षिणी शहर अवामिया में एक पुलिस स्टेशन पर पेट्रोल बम फेंकने का आरोप लगा। सरकारी वकील ने उस पर उग्रवादी व आतंकी समूहों से संबंध होने का आरोप लगाया। मुर्तजा पर मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम) बनाने और सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाने का आरोप लगा। मुर्तजा ने सभी आरोपों से इनकार किया। सऊदी अरब के कानून के मुताबिक इन अपराधों के लिए मौत की सजा दी जाती है। उस समय दुनियाभर के वकीलों और समाजिक कार्यकर्ताओं ने मुर्तजा कुरैशी को दुनिया का सबसे छोटा राजनीतिक बंदी बताया।

सऊदी अरब के कानून में नाबालिग को फांसी नहीं दी जा सकती इसलिए मुर्तजा के बालिग होने का इंतजार किया जाता रहा और वह 2019 में जैसे ही 18 साल का हुआ कोर्ट में पेश किया गया और सरकारी वकील ने मुर्तजा के लिए फांसी की मांग की और उसे मौत की सजा सुना दी गई। मृत्युदंड की खबर का पता चलते ही देश में उबाल आ गया। लोग सड़क पर उतर आए। मुर्तजा के पक्ष में सऊदी अरब की माताएं और शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई देशों ने सऊदी अरब सरकार से मृत्युदंड रद्द करने की अपील की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी किरकिरी हुई। दुनिया के तमाम लोगों ने सऊदी अरब के कानून की निंदा की। पहले तो सरकार ने मना कर दिया पर दुनिया भर से पड़े दबाव के कारण उसे झुकना पड़ा और मुर्तजा को 2022 तक कैद में रखने के बाद छोड़ने का फैसला सुनाना पड़ा।

सरकार के इस फैसले का पूरे सऊदी अरब में विरोध शुरू हो गया
मुर्तजा कुरैशी को सजा-ए-मौत का फरमान सुनाने पर न सिर्फ सऊदी अरब को लोगों का विरोध झेलना पड़ा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी किरकिरी हुई। दुनिया के तमाम लोगों ने सऊदी अरब के कानून की निंदा की। मृत्युदंड की सजा कई देशों ने रद्द करने की अपील की। दुनिया भर से पड़े दबाव के कारण उसे झुकना पड़ा और मुर्तजा को 2022 तक कैद में रखने के बाद छोड़ने का फैसला सुनाना पड़ा।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 भारत के साथ बेहतर संबंधों में पिछड़ रहा ब्रिटेन, भारतीयों के लिए करना होगा यह कामः रिपोर्ट
2 ईरान के खिलाफ अमेरिका ने शुरू किया साइबर हमला, निशाने पर रॉकेट और मिसाइल ऑपरेशन सिस्टम
3 करतारपुर कॉरिडोर: खालिस्तान समर्थकों को कमेटी में बैठा दिया, अब ब्रिज की बजाय सिर्फ सड़क बनवाने पर अड़ा पाकिस्तान