अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति का असर अब सेना से जुड़े परिवारों पर भी दिखाई देने लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सक्रिय ड्यूटी पर तैनात 50 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के माता-पिता और जीवनसाथियों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से कई लोगों को निर्वासित भी किया जा चुका है। इस कार्रवाई ने वर्षों से लागू उन सुरक्षा प्रावधानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य सैन्य कर्मियों के परिवारों को इमिग्रेशन संबंधी राहत देना था।

50 से अधिक सैन्य परिवारों पर कार्रवाई

समाचार एजेंसी AP की जांच के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन कार्रवाई के तहत सक्रिय ड्यूटी पर तैनात अमेरिकी सैनिकों के 50 से अधिक परिजनों को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम छह परिवार के सदस्यों को पहले ही देश से निर्वासित किया जा चुका है, जबकि कई अन्य अब भी इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं। इसके अलावा, कम से कम आठ करीबी रिश्तेदार अभी भी संघीय एजेंसियों की हिरासत में हैं।

सैनिक ने बयां किया दर्द

टेक्सास के फोर्ट ब्लिस में तैनात आर्मी सार्जेंट हेडर लियोनेल टुर्सियोस जुआरेज ने अपनी पत्नी की गिरफ्तारी पर चिंता जताई। उनकी पत्नी को जुलाई में एक वॉलमार्ट स्टोर के बाहर उनकी छह वर्षीय बेटी के सामने हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा, “मैं अपनी मिलिट्री करियर पर कैसे ध्यान दूं, जब मुझे हर समय अपनी पत्नी की चिंता सताती रहती है?”

वर्षों पुरानी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव

अमेरिका में लंबे समय से ऐसी व्यवस्था रही है, जिसके तहत सेना में सेवा दे रहे लोगों के माता-पिता, पति या पत्नी को इमिग्रेशन मामलों में कुछ राहत और संरक्षण दिया जाता था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश की सेवा कर रहे सैनिक अपने परिवार को लेकर असुरक्षित महसूस न करें।

हालांकि, AP की जांच के अनुसार अब इन परिवारों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना महीनों तक हिरासत में रखा जा रहा है। यह तब हो रहा है, जब अमेरिकी सेना अब भी भर्ती के दौरान सैनिकों के परिवारों को इमिग्रेशन संबंधी संभावित लाभों का उल्लेख करती है।

DHS ने क्या कहा?

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इस मामले पर कहा कि वह ऐसे मामलों का अलग से कोई डेटा नहीं रखता। विभाग ने अपने बयान में कहा, “DHS और ICE अमेरिकी सेना में सेवा देने वाले सभी लोगों के योगदान का सम्मान करते हैं।”

साथ ही विभाग ने स्पष्ट किया कि “सिर्फ अमेरिकी सेना में सेवा देने से किसी व्यक्ति या उसके परिवार को स्वतः वैध इमिग्रेशन दर्जा नहीं मिल जाता और न ही इमिग्रेशन कानूनों के उल्लंघन से छूट मिलती है।”

सैन्य एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

सैन्य मामलों के जानकारों का कहना है कि सैनिकों के परिवारों पर इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर सैनिकों के मनोबल और सैन्य तैयारियों पर पड़ सकता है। यदि सैनिक अपने परिवार की सुरक्षा और भविष्य को लेकर लगातार चिंतित रहेंगे, तो इसका प्रभाव उनकी ड्यूटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर भी पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मुद्दा केवल इमिग्रेशन कानून का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य कल्याण से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की इस नीति को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है।

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