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भारत के दौरे पर आने से पहले बोले अमेरिकी विदेश मंत्री- ‘मोदी है तो मुमकिन है’

‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नये विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के लिए इस महीने के अंत में होने वाली नयी दिल्ली की अपनी आगामी यात्रा के बारे में संक्षेप में पोम्पियो ने कहा कि दोनों देशों को इतना मजबूत संबंध बनाना चाहिए, जितना कभी नहीं रहा है।

Author नई दिल्ली | June 13, 2019 6:16 PM
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चुनावी नारा ‘‘मोदी है तो मुमकिन है’’ का जिक्र करते हुए भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अगले मुकाम पर ले जाने का भरोसा जताया है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ‘मुक्त और खुला’ सुनिश्चित करने सहित आगे बढ़ने के लिए दोनों प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के पास ‘‘अद्वितीय अवसर’’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नये विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के लिए इस महीने के अंत में होने वाली नयी दिल्ली की अपनी आगामी यात्रा के बारे में संक्षेप में कहा कि दोनों देशों को इतना मजबूत संबंध बनाना चाहिए, जितना कभी नहीं रहा है। पोम्पिओ 24 से 30 जून तक भारत, श्रीलंका, जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे।

पोम्पियो ने इस बात का जिक्र किया कि अमेरिका का भारत के साथ लंबा जुड़ाव रहा है और इस संबंध को और प्रगाढ़ करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इस व्यक्तिगत दोस्ती को औपचारिक रूप देना चाहिए, दोनों देशों के लिए एक कूटनीतिक ढांचा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी ने हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, ‘मोदी है तो मुमकिन है’, (उसे ही ध्यान में रखते हुए) हमारे लोगों के बीच जो कुछ संभव है उसका पता लगाए जाने की मैं आशा करता हूं।’’ पोम्पिओ ने ‘इंडिया आइडियाज समिट ऑफ अमेरिका-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ में भारत नीति संबंधी अपने अहम भाषण में बुधवार को यह कहा।

पोम्पिओ ने कुछ ‘‘बड़े विचारों और बड़े अवसरों’’ का जिक्र किया, जो द्विपक्षीय संबंध को नए मुकाम पर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका सचमुच में यह मानना है कि दोनों देशों के पास अपने लोगों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया की भलाई के लिए एक साथ आगे बढ़ने का अद्वितीय मौका है। पोम्पियो की चार देशों की यात्रा का उद्देश्य हिंद- प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की साझेदारी को मजबूत करना है। दरअसल, इस क्षेत्र में चीन अपना सैन्य वर्चस्व कायम कर रहा है। पोम्पिओ ने कहा कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका रक्षा सहयोग को एक नए मुकाम पर लेकर गया है, उन्होंने हिंद-प्रशांत के लिए साझे दृष्टिकोण को मजबूत किया है और आतंकवाद से लड़ने में पाकिस्तान के अस्वीकार्य सहयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पोम्पिओ ने कहा कि अब ट्रम्प और मोदी प्रशासन के पास ‘‘इस विशेष साझेदारी को और आगे ले जाने का अद्वितीय अवसर’’ है।

उन्होंने कहा कि उनके पास अपने नए समकक्ष जयशंकर के रूप में मजबूत साझेदार हैं। जयशंकर अमेरिका में भारत के राजदूत भी रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने अप्रैल में कहा था कि वह अमेरिका के साथ और अच्छे संबंध बनाना चाहते हैं और यह भावना दोनों ओर से है। हम आगे बढ़ना चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मजबूत संबंध बनाने का मतलब इन व्यक्तिगत मित्रवत संबंधों को आधिकारिक बनाना है। हमने पिछले साल रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर ‘2 प्लस 2 वार्ता’ शुरू की थी। हमने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक जैसी सोच रखने वाले लोकतांत्रिक देशों- भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच चार पक्षीय संवाद (क्वाड डायलॉग) में भी फिर से जान फूंकी है। ये सभी अच्छे कदम हैं।’’ उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका को ऐसे रणनीतिक ढांचे को अपनाना होगा, जो दोनों देशों के लिए कारगर हो।

पोम्पिओ ने कहा, ‘‘हम एक संप्रभु ताकत के तौर पर भारत का सम्मान करते हैं, जिसकी अपनी अनूठी राजनीति और सामरिक चुनौतियां हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वाभाविक है कि दुनिया में सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के साथ हाथ मिलाना चाहिए, ताकि वे ंिहद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी साझी सोच को आगे ले जा सकें।’’ पोम्पिओ ने कहा, ‘‘तीसरा, हमें यह करके दिखाना होगा।’’ उन्होंने कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने सशस्त्र यूएवी और बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों जैसे अत्याधुनिक रक्षा मंचों समेत भारत को उच्च तकनीक की अधिक वस्तुओं के निर्यात के लिए अमेरिकी कंपनियों को सक्षम बनाया है।  उन्होंने कहा, ‘‘ये बड़ी उपलब्धियां हैं, लेकिन हम और हासिल करना चाहते हैं। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष में हमारे स्पष्ट रूप से साझे हित हैं।’’

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