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अफगानिस्तान: किसी मर्द को साथ लिए बिना शहर चली गई महिला तो चरमपंथियों ने कलम कर दिया सिर

आज से 15 साल पहले पश्चिमी फौजें अफगानिस्तान से तालिबानी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए वहां आई थीं। साल 2014 में ज्यादातर देशों ने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था और जिम्मेदारी देश की सरकार पर आ गई थी।

इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर की प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।(Representational Photo)

अफगानिस्तान में कथित तौर पर कुछ हथियारबंद लोगों ने एक महिला का सिर उसके धड़ से सिर्फ इसलिए अलग कर दिया क्योंकि वो अपने पति को साथ लिए बिना अकेले शहर चली गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना अफगानिस्तान के सर-ए-पुल प्रांत के लट्टी टाउन के पास स्थित एक गांव की है। यह एरिया तालिबान के आधिपत्य में है। सर-ए-पुल प्रांत के गवर्नर के प्रवक्ता जबिउल्लाह अमानी ने अपने बयान में बताया कि 30 वर्षीय महिला को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वो अपने पति को साथ लिए बिना शहर चली गई थी। महिला का पति ईरान में रहता है।

मिडिल ईस्ट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक महिला शहर में शॉपिंग करने गई थी। तालिबानी आधिपत्य वाले इलाकों में महिलाओं को बिना किसी नजदीकी पुरुष साथी को साथ लिए घर से बाहर निकलने की मनाही है। तालीबानी आधिपत्य वाले इलाकों में महिलाओं को काम करने और शिक्षा ग्रहण करने की भी इजाजत नहीं दी जाती है तथा उनके लिए बुर्का पहनना अनिवार्य है। हालांकि, तालिबान ने ऐसे किसी मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। इस महीने की शुरूआत में दक्षिणी कान्धार स्थित एयरपोर्ट पर काम करने वाली पांच अफगानी महिलाओं को एक अज्ञात बंदूकधारी शख्स ने गोली मार दी थी, जिसमें सभी महिलाओं की मृत्यु हो गई थी। इस साल अफगानिस्तान में महिलाओं को निशाना बनाने के कई मामले प्रकाश में आए हैं। अफगानिस्तान में महिलाओं के बुनियादी अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी अपनी चिंता जाहिर की है। अफगानिस्तान में 1996 से 2001 के बीच तालिबानी शासन के दौरान महिलाओं को स्कूल जाने और काम करने की शख्त मनाही थी।

आज से 15 साल पहले पश्चिमी फौजें अफगानिस्तान से तालिबानी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए वहां आई थीं। साल 2014 में ज्यादातर देशों ने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था और तालिबान को काबू में रखने की जिम्मेदारी देश की सरकार पर आ गई थी। इस काम में सरकार कितनी सफल हो पाई है इसका अंदाजा तालिबान के बढ़ते लड़ाकों की संख्या से लगाया जा सकता है। नाटो के मुताबिक तालिबान के पास इस वक्त लगभग 30 हजार लड़ाके हैं, तालिबान अफगानिस्तान के कम से कम पांच प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा करने के बहुत करीब पहुंच चुका है। कुंदूज और उरुजगान में तो एक-एक बार वे अपना झंडा फहरा भी चुके हैं। उत्तरी प्रांत कुंदूज में अक्टूबर की शुरुआत में और उरुजगान में सितंबर के मध्य में कुछ समय के लिए तालिबान का कब्जा हो गया था। इस वजह से दसियों हजार लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हुए थे।

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