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वीडियो: रातोंरात न्‍यूजीलैंड में हो गया बहुत बड़ा गड्ढा, बढ़ती ही जा रही दरार

न्यूजीलैंड के ज्वालामुखीविद ब्रेड स्कॉट ने इस दरार का जायजा लेने के बाद कहा है कि उन्होंने इससे पहले इतनी बड़ी दरार नहीं देखी थी। स्कॉट का कहना है कि भारी बारिश के कारण ही यह दरार उत्पन्न हुई है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दरार के अंदर एक ड्रोन को भेजकर इसकी जांच की गई।

न्यूजीलैंड में रातोंरात पड़ गई दरार (फोटो सोर्स- वीडियो स्क्रीनशॉट)

दुनिया के कई हिस्सों से जमीन पर दरार पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। केन्या के बाद अब न्यूजीलैंड की धरती पर भी दरार पड़ गई है। न्यूजीलैंड के नॉर्थ आईलैंड में स्थित रोटोरुआ के एक फॉर्म में यह दरार देखी गई है। इस दरार की लंबाई दो फुटबॉल मैदान के बराबर है तो वहीं इसकी गहराई हर किसी को चौंका रही है। अनुमान के मुताबिक इस दरार की गहराई छह मंजिला इमारत के बराबर है। इसे न्यूजीलैंड में अब तक का सबसे बड़ा गड्ढा बताया जा रहा है। इसकी लंबाई 200 मीटर, चौड़ाई 20-30 मीटर और गहराई 20 मीटर बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दरार भारी बारिश के कारण पड़ी है। कई दिनों की भारी बारिश के बाद एक मई को न्यूजीलैंड के फॉर्म में यह दरार देखी गई।

न्यूजहब के मुताबिक न्यूजीलैंड के ज्वालामुखीविद ब्रेड स्कॉट ने इस दरार का जायजा लेने के बाद कहा है कि उन्होंने इससे पहले इतनी बड़ी दरार नहीं देखी थी। स्कॉट का कहना है कि भारी बारिश के कारण ही यह दरार उत्पन्न हुई है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दरार के अंदर एक ड्रोन को भेजकर इसकी जांच की गई। उन्होंने कहा, ‘मैंने इस गड्ढे के अंदर जो देखा वह काफी आश्चर्यजनक था। मैंने देखा कि इस गड्ढे की निचली परत 60,000 साल पुराने ज्वालामुखी के अवशेषों से बनी है।’

फार्म के मैनेजर कोलिन ट्रेमैन ने बताया कि जब उनके फार्म में काम करने वाला वर्कर दूध निकालने के लिए पहुंचा तब उसने यह गड्ढा देखा। रात में समझ नहीं आया कि यह गड्ढा कितना गहरा था। कोलिन ने कहा कि उन्होंने दरार की गहराई जानने के लिए दिन होने का इंतजार किया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अब वह अपने फार्म के जानवरों को सुरक्षित करने के लिए दरार के बगल से फेंसिंग लगवा रहे हैं। आपको बता दें न्यूजीलैंड के इस हिस्से में ज्वालामुखी के इतिहास के कारण दरार आना आम बात है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के घर से करीब एक किलोमीटर दूरी पर दरार पड़ी थी। राहत की बात यह रही कि दरार पड़ने से किसी को भी कोई नुकसान नहीं हुआ था।

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