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Marga Faulstich Google Doodle: ग्‍लास साइंटिस्‍ट मार्गा फॉलस्टिच पर रोचक डूडल, जानिए इनका योगदान

Marga Faulstich Google Doodle, मार्गा फॉलस्टिच: मार्गा का जन्म 16 जून 1915 को हुआ था। उन्होंने 'शॉट एजी' के साथ 44 वर्षो तक काम किया। इस दौरान मार्गा ने 300 से अधिक अलग-अलग तरह के ऑप्टिकल ग्लास पर काम किया, जिनमें से 40 ग्लास उनके नाम पर पेटेंट हैं।

गूगल ने ग्लास साइंटिस्ट मार्गा फॉलस्टिच के सम्मान में डूडल बनाया है।

दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल आज ग्लास साइंटिस्ट फॉलस्टिच को याद कर रहा है। मार्गा फॉलस्टिच जर्मनी की वो महिला थीं जिन्हें शीशे की 300 किस्मों पर काम किया। गूगल ने आज उनकी 103वीं जयंती पर अपने होम पेज पर विज्ञान जगत में उनके योगदान को याद किया है। गूगल ने एक ग्लास और उससे जुड़े आविष्कारों के एक कोलाज का एक डूडल अपने होम पेज पर लगाया है। बर्लिन के आर्टिस्ट सोफिया मार्टिनेक ने आज के गूगल डूडल को डिजाइन किया है। इस गूगल डूडल को सिर्फ भारत और जर्मनी में ही देखा जा सकता है। इस कलाकृति में मार्गा फॉलस्टिच लेंस को देखती नजर आ रही हैं। डडूल में गूगल के अक्षर अलग-अलग कांच के बरतनों में दिख रहे हैं। ये पूरी कलाकृति एक सुंदर नजारा पेश कर रही है।

मार्गा फॉलस्टिच का जन्म 16 जून 1915 को वेइमर में हुआ था। ये वक्त प्रथम विश्व युद्ध का था। पहले विश्व युद्ध के साये में ही मार्गा बड़ी हुई। 1922 में उनका परिवार जेना आ गया। यहां पर मार्गा ने हाई स्कूल की पढ़ाई की। 1935 में उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया। फॉलस्टिच वैश्विक ग्लास विनिर्माण कंपनी ‘शॉट एजी’ की पहली महिला कार्यकारी अधिकारी थीं। उन्होंने ‘शॉट एजी’ के साथ 44 वर्षो तक काम किया। इस दौरान मार्गा ने 300 से अधिक अलग-अलग तरह के ऑप्टिकल ग्लास पर काम किया, जिनमें से 40 ग्लास उनके नाम पर पेटेंट हैं। मार्गा फॉलस्टिच को हल्के लेंस ‘एसएफ 64’ के अविष्कार के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी पहचान मिली, जिसके लिए उन्हें 1973 में सम्मानित भी किया गया।

अपने शुरूआती सालों में मार्गा ने पतले फिल्म्स बनाने पर काम किया। मार्गा फॉलस्टिच द्वारा पतले फिल्म्स पर किये गये रिसर्च का इस्तेमाल आज भी सन ग्लासेज, एंटी रिफलेक्टिव लेंस और ग्लास फेस बनाने में किया जाता है। फॉलस्टिच की मेधा ने उन्हें तुरंत ही कंपनी में अच्छा मुकाम दिलाया। ग्रेजुएट असिस्टेंट से करियर की शुरुआत करने वाली फॉलस्टिच पहले टेकनिशियन बनीं, इसके बाद वे साइंटिफिक असिस्टेंट बनीं, आखिरकार उन्हें अपना मुकाम मिला और वे कंपनी में वैज्ञानिक बन गईं।

इस बीच उनकी निजी जिंदगी में तूफान आया। पहले विश्व युद्ध की विभीषका में पली-बढ़ी मार्गा फॉलस्टिच पर दूसरे विश्व युद्ध का कहर टूटा। इस लड़ाई में उनके मंगेतर की मौत हो गई। इस घटना के बाद वे टूट गईं, कुछ दिनों तक वह अकेले रहीं और अपने बीते हुए कल को भूलने की कोशिश की।

मार्गा जानती थी कि उनके जीवन का लक्ष्य विज्ञान की सेवा करना है।  उन्होंने अपनी निजी जिंदगी की इस घटना का असर अपने पेशेवर जिंदगी पर नहीं पड़ने दिया। इसके बाद उनका पूरा फोकस विज्ञान की सेवा और अपने करियर पर रहा। 1942 में अपना काम जारी रखते हुए उन्हें रसायन शास्त्र की पढ़ाई की। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध की वजह से उनकी पढ़ाई में बाधा आई। आखिरकार को मार्गा फॉलस्टिच समेत स्कॉट एजी के 41 स्पेशलिस्ट और मैनेजर को वेस्टर्न सेक्टर में लाया गया।

इस कंपनी में 44 सालों तक काम करने के बाद वह 1979 में रिटायर हुईं।  रिटायरमेंट के बाद मार्गा फॉलस्टिच दुनिया भर में यात्राएं की और वे ग्लास कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेती रहीं। उन्होंने इन कॉन्फ्रेंस में विज्ञान बिरादरी को अपने रिसर्च से अवगत कराया। 1 फरवरी 1998 को 82 साल की उम्र में उनका निधन हुआ। मार्गा के नाम से 40 पेटेंट रजिस्टर्ड है।

मार्गा के बनाये गये ग्लास से माइक्रोस्कोप के विकास में मदद मिली। मार्गा के बनाये गये S4-64 लेंस के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। मार्गा फॉलस्टिच को सोशल मीडिया ने भी याद किया। कई यूजर्स ने उन्हें पहली महिला ऑप्टिशियन बताया, साथ ही ऑप्टिकल साइंस के विकास में उनके योगदान की सराहना की।

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