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भारत को S-400 मिसाइल सिस्टम देने की तैयारी में रूस, नरेंद्र मोदी-पुतिन के बीच कुडनकुलम संयंत्र समेत हुए ये समझौते

शिखरवार्ता के प्रमुख परिणामों में रूस की मदद से कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की इकाइयों 5 और 6 की स्थापना पर करार होना शामिल है। मोदी ने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।

Author June 2, 2017 8:14 PM
भारत को विमान भेदी मिसाइल प्रणाली एस-400 की आपूर्ति को लेकर प्रीकान्ट्रैक्ट तैयारियां जारी है। (PTI)

रूस ने गुरुवार (1 जून) को कहा कि वह भारत को विमान भेदी मिसाइल प्रणाली एस-400 ट्रायम्फ की आपूर्ति के लिए तैयारी कर रहा है और दोनों सरकारें शर्तों पर सामान्य चर्चा कर रही हैं। रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन ने यहां मीडिया से कहा कि भारत को विमान भेदी मिसाइल प्रणाली एस-400 की आपूर्ति को लेकर प्रीकान्ट्रैक्ट तैयारियां जारी है। रूस की सरकारी संवाद समिति तास न्यूज एजेंसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस रूसी शहर की यात्रा के इतर रोगोजिन के हवाले से कहा, ‘‘यह कहना मुश्किल है कि इसमें और कितना समय लगेगा। सरकारों के बीच एक समझौता है और अब हम शर्तों पर सामान्य रूप से चर्चा कर रहे हैं।’’

भारत ने गत वर्ष 15 अक्टूबर को रूस के साथ ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली को लेकर एक समझौते की घोषणा की थी जिसकी कीमत पांच अरब डालर से अधिक है। भारत ने इसके साथ ही चार युद्धपोत निर्माण में सहयोग और कामकोव हेलीकाप्टर के लिए एक संयुक्त निर्माण इकाई स्थापित करने की भी घोषणा की थी।

इसी क्रम में भारत और रूस ने तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की दो और इकाइयों को लगाने के लिए एक बहुप्रतीक्षित समझौते पर गुरुवार को दस्तखत किये और दोनों महाशक्तियों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने का फैसला किया गया। दोनों देशों ने इस साल ‘इंद्र-2017’ नाम से तीनों सेनाओं का प्रथम अभ्यास आयोजित करने का भी फैसला किया। उन्होंने कामोव-226 सैन्य हेलीकॉप्टरों के सह-उत्पादन से आगे बढ़ते हुए संयुक्त उत्पादन शुरू करने का भी निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच यहां हुई व्यापक वार्ता में ये निर्णय लिये गये। बातचीत में आतंकवाद पर और व्यापार तथा निवेश बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वार्ता के बाद पुतिन के साथ संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और रूस के संबंध परस्पर प्रेम, सम्मान और मजबूत विश्वास पर आधारित और अडिग हैं। उन्होंने कहा, ‘‘संस्कृति से सुरक्षा तक हमारे संबंध अटूट रहे हैं। हम एक भाषा में बोलते हैं।’’

मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने का फैसला किया जिसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। मोदी ने कहा कि भारत और रूस अपने संबंधों के 70 साल पूरे होने की खुशी मना रहे हैं और इतने दशकों में संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। पुतिन ने वार्ता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत-रूस साझेदारी रणनीतिक और विशेष होती जा रही है। उन्होंने वार्ता को सार्थक और रचनात्मक बताया।

बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया, ‘‘भारत और रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी दोनों महाशक्तियों के बीच परस्पर विश्वास का अद्वितीय बंधन है।’’ इसमें कहा गया कि इन संबंधों के आयाम राजनीतिक संबंध, सुरक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था, सैन्य और तकनीकी क्षेत्र, ऊर्जा, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान प्रदान और विदेश नीति समेत सहयोग के सभी क्षेत्रों तक है। घोषणापत्र में कहा गया कि संबंध दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को प्रोत्साहित करने में मददगार हैं और एक और भी अधिक शांतिपूर्ण तथा न्यायोचित वैश्विक व्यवस्था की स्थापना में योगदान देते हैं।

शिखरवार्ता के प्रमुख परिणामों में रूस की मदद से कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की इकाइयों 5 और 6 की स्थापना पर करार होना शामिल है। मोदी ने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।

मोदी-पुतिन की वार्ता के बाद जारी विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार, ‘‘हम कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 5 और 6 के लिए जनरल फ्रेमवर्क एग्रीमेंट और क्रेडिट प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिये जाने का स्वागत करते हैं।’’

रियेक्टरों का निर्माण भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और रूस के परमाणु संस्थानों की नियामक इकाई रोसाटॉम की सहायक कंपनी एस्टोमस्ट्रॉयेएक्सपोर्ट करेंगे। दोनों इकाइयों की उत्पादन क्षमता एक-एक हजार मेगावाट है। ‘ए विजन फॉर द ट्वंटी फर्स्ट सेंचुरी’ शीर्षक वाले दस्तावेज में कहा गया है कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा के क्षेत्र में एक दूसरे की पूरक हैं और दोनों देश एक ‘ऊर्जा सेतु’ बनाने की दिशा में काम करेंगे।

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