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अमेरिका में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से संबंधित कार्यक्रम शुरू

शीर्ष अमेरिकी सांसदों और प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकियों ने महात्मा गांधी के सालभर चलने वाले 150 वीं जयंती समारोहों का यहां शुभारंम करते हुये उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी अहिंसा की बातें आज की दुनिया में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।

Author वाशिंगटन | November 28, 2018 5:33 PM
2 अक्‍टूबर, 2018 को महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। (Photo : Express Archive)

शीर्ष अमेरिकी सांसदों और प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकियों ने महात्मा गांधी के सालभर चलने वाले 150 वीं जयंती समारोहों का यहां शुभारंम करते हुये उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी अहिंसा की बातें आज की दुनिया में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। भारतीय दूतावास ने आधा दर्जन से अधिक भारतीय-अमेरिकी संगठनों के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने दुनिया भर में गांधी के प्रभाव के बारे में बात की, जिसमें नागरिक अधिकारों के संघर्ष करने वाले प्रसिद्ध नेता मार्टिन लूथर किंग पर उनके प्रभाव की बात भी शामिल थी। अपनी भारत यात्रा पर जाने से पहले किंग ने कहा था, “अन्य देशों में, मैं एक पर्यटक के रूप में जा सकता हूं, लेकिन भारत में मैं तीर्थयात्री के रूप में जाऊंगा।” इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश किसी भी समय से आज कहीं अधिक प्रासंगिक है।

भारतीय अमेरिकी मूल के कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने “महात्मा गांधी के 150 वर्ष” विषय पर कैपिटल हिल उत्सव में अपने संबोधन में कहा, “महात्मा गांधी की अनुपस्थिति में ऐसा कोई तरीका संभव नहीं होता कि मैं आपके सामने खड़ा होकर अपनी बात कह सकूं। ऐसा क्यों है? मुझे लगता है कि आप सभी जानते हैं कि मार्टिन लूथर किंग जूनियर और यहां अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन पर उनका गहरा प्रभाव था” भारतीय-अमेरिकी मूल के कांग्रेस सदस्य डॉ अमी बेरा, जो पिछले नवंबर में लगातार चौथे कार्यकाल के लिए चुने गए थे, ने कहा कि महात्मा गांधी की शांति और अहिंसा का संदेश आज कहीं अधिक प्रासंगिक है।

अमेरिकी कांग्रेस सदस्य डेविड श्वेइकर्ट ने भी लोगों को संबोधित किया। अमेरिका में भारतीय राजदूत नवतेज सिंह सरना ने कहा कि यह महात्मा गांधी की शिक्षाओं और संदेश को “अपने” जीवन में लागू करने का वक्त है। सरना ने कहा, “हम उन्हें राष्ट्र के पिता के रूप में जानते हैं। हम उन्हें उस व्यक्ति के रूप में जानते हैं जिसने उपनिवेशवाद के खिलाफ भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और वास्तव में हमें स्वतंत्रता मिली। लेकिन मुझे लगता है कि यह इससे भी ज्यादा था।

शिकागो के प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकी डॉ भरत बाराई ने कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा को एक नया आयाम दिया, सिद्धांत और अभ्यास में शाश्वत, प्राकृतिक और उच्चतम मानवीय मूल्य। उन्होंने कहा, “गांधी अपने समय की भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ और सच्चे प्रतिनिधि थे।” बाराई ने कहा, “कांग्रेस के सदस्य जॉन लुईस गर्व से कहते हैं, अगर गांधी नहीं होते, तो कोई डॉ मार्टिन लूथर किंग नहीं होता और कोई बराक ओबामा नहीं होते।

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