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आतंकवाद को लेकर भारत ने कहा- बहुत हुआ अब नहीं चलेगा पाखंड

भारत ने कहा है कि आतंकवाद आज विश्व के लिए ‘‘अस्तित्व संबंधी खतरा’’ बन गया है और इसे लेकर ‘‘पाखंड’’ अस्वीकार्य है।

Author संयुक्त राष्ट्र | September 20, 2016 11:35 AM
विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के पहले शरणार्थी एवं प्रवासी शिखर सम्मेलन में कल यहां अपने संबोधन में कहा, ‘‘इस बात पर बल देना महत्वपूर्ण है कि शरणार्थी संकट का अहम कारण आतकंवाद है।

भारत ने कहा है कि आतंकवाद आज विश्व के लिए ‘‘अस्तित्व संबंधी खतरा’’ बन गया है और इसे लेकर ‘‘पाखंड’’ अस्वीकार्य है। भारत ने रेखांकित किया कि बड़े स्तर पर शरणार्थी संकट के पीछे का ‘‘अहम कारण’’ आतंकवाद है। विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के पहले शरणार्थी एवं प्रवासी शिखर सम्मेलन में कल यहां अपने संबोधन में कहा, ‘‘इस बात पर बल देना महत्वपूर्ण है कि शरणार्थी संकट का अहम कारण आतकंवाद है। क्या हम इस तथ्य को नजरअंदाज कर सकते हैं, हम नहीं कर सकते। हम अपने जोखिम पर ऐसा करते हैं।’’

अकबर ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से विश्व को ‘‘अस्तित्व संबंधी खतरा’’ है और ‘‘इस संकट को लेकर पाखंड नहीं चलेगा।’’
उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि संघर्ष, युद्ध एवं गरीबी से बचकर भाग रहे लाखों लोगों के लिए अच्छे या बुरे आतंकवाद जैसी कोई चीज नहीं है।

अकबर ने कहा, ‘‘अच्छे आतंकवाद या बुरे आतंकवाद जैसी कोई चीज नहीं है और यदि आपके पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं है तो आप केवल किसी शरणार्थी से यह पूछिए कि क्या वह किसी आतंकवाद को अच्छा या बुरा मानता है। आतंकवाद को मानवाधिकारों के लिए ‘‘सबसे बड़ा खतरा’’ बताते हुए अकबर ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का सीमा पार करके जाना यह याद दिलाता है कि दुनिया एक वैश्विक गांव बन गई है।

अकबर ने कहा, ‘‘हम समृद्ध या नष्ट एक साथ ही हो सकते हैं, यह सबसे अच्छा होगा कि हम शांति, समृद्धि एवं मित्रता के साथ रहना सीख लें।’’
उन्होंने ‘‘बचाव को उपचार से बेहतर’’ बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद जैसे मुद्दों से निपटना होगा, सशस्त्र संघर्ष रोकना होगा और विकास का मार्ग आसान बनाना होगा जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि लोगों को अपना देश छोड़कर जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।

अकबर ने कहा, ‘‘हमें यह पता लगाना होगा कि वे शरण क्यों मांगते हैं। बचाव उपचार से बेहतर है। कभी-कभी बचाव ही एकमात्र उपचार होता है।’ उन्होंने कहा कि सशस्त्र संघर्ष रोककर, आतंकवाद से निपटकर, स्थायी विकास के लिए शांति निर्माण एवं स्थापना और सुशासन की स्थिति लोगों को अपने देश छोड़कर जाने के लिए मजबूर होने से रोकेगी।

अकबर ने मौजूदा शरणार्थी संकट को ‘‘अभूतपूर्व’’ बताते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर अनुमानत: करीब 25 करोड़ लोगों या हर 30 में से एक व्यक्ति को अपना देश छोड़कर जाना पड़ रहा है और कुल शरणार्थियों की तीन चौथाई संख्या मात्र 11 देशों से आती है।’ उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि सभी शरणार्थियों की आधी से अधिक संख्या को मात्र सात देश शरण दे रहे हैं और सभी शरणार्थियों के करीब 90 प्रतिशत लोग विकासशील देशों में रह रहे हैं।

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