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क्यूएस रैंकिंग 2023: छात्रों के रहने के लिए लंदन सर्वश्रेष्ठ शहर, भारत में मुंबई सबसे ऊपर

QS रैंकिंग दुनिया भर के 140 शहरों को लेकर होती है। भारत के 4 शहर मुंबई 103 रैंक, दिल्ली 129 रैंक, चेन्नई 125 रैंक और बेंगलुरु 114वें रैंक पर हैं।

London | QS Ranking| Students Choice
लंदन Photo Credit – Express Archives

प्रतिष्ठित क्यूएस बेस्ट स्टूडेंट सिटीज रैंकिंग 2023 में छात्र सुविधाओं, विश्वविद्यालयों के मानक के मामलों और विदेशों में पढ़ाई करने के लिए गए छात्रों की सहूलियतों के बाद छात्रों का सबसे फेवरिट शहर लंदन बना है। वहीं सियोल और म्यूनिख दूसरे स्थान पर हैं जबकि ज्यूरिख और मेलबर्न उसके बाद क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। हर छात्र चाहता है कि पढ़ाई के दौरान उसे वो सारी सुविधाएं मिलें जो एक आदर्श छात्र जीवन के लिए आवश्यक हों इस बार के क्यूएस सिटीज रैंकिंग में लंदन ने हर मानक पर सफलता पाई है और रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा है।

वहीं अगर हम बात भारत की करें तो भारतीय छात्रों के लिए इस बार मुंबई शीर्ष पर है। हालांकि विश्व रैंकिंग के मुताबिक मुंबई भी क्यूएस बेस्ड सिटीज में 103 नंबर पर है। जबकि बेंगलुरू ने इस लिस्ट में खुद को 114वें रैंक पर पाया है। चेन्नई 125वीं रैंक पर है तो वहीं राजधानी दिल्ली को 129वीं रैंक मिली है। QS बेस्ट स्टूडेंट सिटीज़ रैंकिंग छात्रों को उनके अध्ययन निर्णयों के लिए रेलेवेंट फैक्टर्स की एक सीरीज के बारे में स्वतंत्र डेटा देती है। जिसमें छात्रों की सामर्थ्य, जीवन की गुणवत्ता, विश्वविद्यालय का मानक और उस डेस्टिनेशन में अध्ययन करने वाले पिछले छात्रों के विचार शामिल हैं।

140 शहरों को लेकर होती है क्यूएस रैंकिंग
QS रैंकिंग दुनिया भर के 140 शहरों को लेकर होती है। अरब क्षेत्र में सबसे अच्छा छात्र शहर दुबई है, जो विश्व स्तर पर 51वें स्थान पर है। ब्यूनस आयर्स दुनिया में 23वें स्थान पर है। वैश्विक स्तर पर दुनिया भर के छात्र भारत में पढ़ाई के लिए आते हैं लेकिन इनकी संख्या बहुत सीमित है। ये दुनिया भर के छात्रों का एक छोटा सा अंश है।

2023 तक भारत का लक्ष्य 2 लाख विदेशी छात्र आएं पढ़ने
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2018-19 के अनुसार, भारतीय विश्वविद्यालयों में नामांकित अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या सिर्फ 47,427 थी। भारत 2023 के अंत तक 200,000 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को अपने यहां खींचना चाहता है। ये संख्या देश में मौजूदा विदेशी छात्रों की संख्या का चार गुना से भी ज्यादा है। यह एक ऐसा जिसकी समीक्षा करने की जरूरत हो सकती है क्योंकि यह वैश्विक कोविड -19 महामारी से पहले निर्धारित किया गया था। इसने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की गतिशीलता को गहराई से प्रभावित किया है।

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