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लंदन: पहली बार मुस्‍ल‍िम बन सकता है मेयर, रोकने के लिए विपक्ष कर रहा मोदी और दंगों का जिक्र

आरोप लग रहे हैं कि लेबर पार्टी के सादिक खान के खिलाफ कंजरवेटिव प्रत्‍याशी खुद को बतौर 'मोदी समर्थक' या 'हिंदू समर्थक' के तौर पर पेश कर रहा है।

Author लंदन | May 5, 2016 5:02 PM
लंदन के मेयर पद के प्रत्‍याशी लेबर पार्टी के सांसद सादिक खान और उनकी पत्‍नी सादिया ने गुरुवार को अपना वोट डाला। (REUTERS)

पाकिस्‍तानी मूल के सादिक खान लंदन के नए मेयर बन सकते हैं। हालांकि, उनके विरोधी कंजरवेटिव पार्टी के जैक गोल्‍डस्‍म‍िथ इंडियन पीएम नरेंद्र मोदी का इस्‍तेमाल करके हिंदू और सिख वोटरों को लुभा रहे हैं।

इंग्‍लैंड, स्‍कॉटलैंड और वेल्‍स में मेयर चुनने और असेंबली व संसदीय सीटें भरने के लिए गुरुवार को वोटिंग हो रही है। लंदन के मेयर पद का चुनाव सबसे हाई प्रोफाइल मुकाबला बन गया है। तमाम पोल्‍स और सर्वे इस ओर इशारा करते हैं कि 45 साल के सादिक खान इस मुकाबले में विजेता बनेंगे। वे हर सर्वे में अपने कंपटीटर गोल्‍डस्‍म‍िथ पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। नया मेयर बोरिस जॉनसन की जगह लेगा। वे कंसरवेटिव पार्टी से हैं, जो 2008 से इस पद पर काबिज हैं।

वे एक पूर्व मानवाधिकार वकील हैं। वे 2005 से लेबर पार्टी के सांसद हैं। सादिक के पिता कभी बस ड्राइवर थे। अगर सादिक जीतते हैं तो वे यूरोप के सबसे ताकतवर मुस्‍ल‍िम राजनेता बन जाएंगे। खान 2009 से 2010 के बीच पीएम गोर्डन ब्राउन की सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर रह चुके हैं। वे कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने वाले पहले मंत्री थे। उनकी शादी सॉलिसिटर सादिया अहमद से हुई है। दोनों की दो बेटियां हैं। खान को ब्रिटेन से अपने जुड़ाव पर गर्व है। 1947 में विभाजन के बाद खान के दादा नए बने देश पाकिस्‍तान चले गए। 1970 में उनके जन्‍म से कुछ दिन पहले उनके माता-पिता ब्रिटेन शिफ्ट हो गए थे।

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खान ने वादा किया है कि वे शहर में रिहाइश से जुड़ी समस्‍याओं को दूर करेंगे। चार साल के लिए ट्रांसपोर्ट का किराया फिक्‍स कर देंगे। लंदन वालों के लिए नौकरियों से जुड़ी नई संभावनाएं पैदा करेंगे। इसके अलावा, प्रदूषण को भी कम करेंगे। हालांकि, कई मुस्‍ल‍िम संगठनों ने शिकायत की है कि इस बार के मेयर चुनाव में राजनीति ‘हैरान करने वाली नीचता’ के स्‍तर पर हो रही है। वहीं, फाइनेंशियल टाइम्‍स के मुताबिक, कंजरवेटिव्‍स पर आरोप लग रहे हैं कि वे गोल्‍डस्‍म‍िथ को जिताने के लिए सांप्रदायिक तनाव भड़का रहे हैं।

हिंदू, सिख, तमिल वोटरों को ध्‍यान में रखकर खास तौर पर डिजाइन किए गए पर्चे बांटे जा रहे हैं, जिनमें नरेंद्र मोदी, 84 के सिख दंगों और श्रीलंका के गृह युद्ध का जिक्र है। मुस्‍ल‍िम असोसिएशन ऑफ ब्रिटेन ने कहा कि वे यह देखकर बेहद चिंतित हैं कि किस तरह से कुछ कैंडिडेट्स सीमाएं लांघते हुए इस्‍लामिक तौर तरीकों या मुसलमानों को निशाना बनाते हुए सपोर्ट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

नागरिक संगठन मुस्‍ल‍िम पब्‍ल‍िक अफेयर्स कमेटी की कैथरीन हेसेलटाइन ने कहा कि गोल्‍डस्‍म‍िथ मुस्‍ल‍िम वोटरों के प्रति दिलचस्‍पी नहीं रखते हैं। कैथरीन के मुताबिक, उनके पर्चे में ”प्रभावशाली ढंग से हिंदुओं को यह बताया जा रहा है कि सादिक मुसलमान हैं।” एक पर्चे में मोदी के लंदन दौरे में उनके और गोल्‍डस्‍म‍िथ की मुलाकात की फोटो है। इसमें यह भी जिक्र है कि खान ने मोदी से मुलाकात नहीं की। ब्रिटेन में 1993 से रह रहे भारतीय मैनेजमेंट कंसलटेंट ऐश मुखर्जी के मुताबिक, गोल्‍डस्‍म‍िथ बेहद छिपे ढंग से खुद को मोदी समर्थक या हिंदू समर्थक के तौर पर पेश कर रहे हैं।

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