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जाधव की फांसी पर रोक, अंतरराष्ट्रीय अदालत में पाकिस्तान को बड़ा झटका

आइसीजे के 16 जजों में से 15 ने भारत के पक्ष में फैसला दिया। ‘प्रेसीडेंट ऑफ द कोर्ट’ न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने नीदरलैंड के द हेग स्थित पीस पैलेस में भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे फैसला पढ़कर सुनाया।

Author नई दिल्ली, 17 जुलाई। | July 18, 2019 12:15 AM
कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)

कुलभूषण जाधव के मामले में भारत को अंतरराष्ट्रीय अदालत (आइसीजे) में बुधवार को बड़ी कामयाबी मिली है। अपने 42 पेज के फैसले में कोर्ट ने तीन अहम बातें कही हैं- जाधव की फांसी पर रोक लगाते हुए पाकिस्तान अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, भारत को जाधव तक राजनयिक पहुंच दे व पाकिस्तान को वियेना सम्मेलन के उल्लंघन का दोषी पाया गया। अदालत ने कहा, जाधव की फांसी की सजा पर तब तक रोक रहेगी, जब तक पाकिस्तान प्रभावी तौर पर इस पर पुनर्विचार नहीं करता। आइसीजे की कानूनी सलाहकार रीमा ओमर ने फैसला पढ़े जाने से पहले ही कई ट्वीट कर बता दिया था कि अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है।

आइसीजे के 16 जजों में से 15 ने भारत के पक्ष में फैसला दिया। ‘प्रेसीडेंट ऑफ द कोर्ट’ न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने नीदरलैंड के द हेग स्थित पीस पैलेस में भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे फैसला पढ़कर सुनाया। पांच महीने पहले न्यायाधीश यूसुफ के नेतृत्व में आइसीजे के जजों ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलें सुनने के बाद 21 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में दो साल और दो महीने का वक्त लगा। भारतीय नौसेना के रिटायर कमांडर कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवादी कार्रवाई के आरोपों में फांसी की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ भारत ने मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

आइसीजे में न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने सभी 16 जजों की मौजूदगी में फैसला पढ़ा। पाकिस्तान के नामित तदर्थ जज तसद्दुद जिलानी ने विरोध जताया। अपने फैसले में आइसीजे के जजों ने भारत के अधिकांश तर्कों को मान लिया। अदालत ने भारत की बाकी पेज 8 पर अपील के खिलाफ पाकिस्तान की ज्यादातर आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। आइसीजे ने 16 में से 15 जजों के बहुमत से भारत के पक्ष में फैसला सुनाया। पाकिस्तान के एक तर्क के खिलाफ आइसीजे के सभी 16 जज एकमत थे। पाकिस्तान की ओर से कहा गया था कि जाधव मामले पर सुनवाई करना अंतरराष्ट्रीय अदालत के दायरे में नहीं आता। इसे आइसीजे ने सिरे से खारिज कर दिया। जजों ने निर्विरोध माना कि इस मामले में भारत का हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाना सही है और यह मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है। खुद पाकिस्तान के जज तसद्दुद जिलानी ने भी इसके पक्ष में वोट दिया।

आइसीजे ने जाधव मामले में राजनयिक पहुंच की भारत की मांग को जायज माना और पाकिस्तान को निर्देश जारी किया। राजनयिक पहुंच (काउंसलर एक्सेस) में विदेशी नागरिक को अपने देश की वाणिज्य दूतावास और दूतावास के अधिकारी से संपर्क करने की इजाजत दी जाती है, लेकिन पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को पाक में मौजूद किसी भी भारतीय अधिकारी से संपर्क करने नहीं दिया था। अब आइसीजे के फैसले के बाद पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को इसकी इजाजत देनी होगी। अब भारतीय अधिकारी कुलभूषण जाधव से संपर्क कर सकेंगे।

अदालत ने अपने फैसले में भारत का तर्क माना कि पाकिस्तान ने वियेना सम्मेलन का उल्लंघन किया है। वियेना सम्मेलन एक अंतरराष्ट्रीय कानून है, जो दो देशों के बीच राजनयिक संबंधों का नियमन करता है। जाधव मामले में भारत ने तर्क दिया था कि पाकिस्तान ने सुनवाई के दौरान राजनयिक पहुंच प्रदान न कर वियेना सम्मेलन की धारा 36 (1) का उल्लंघन किया।

हालांकि, आइसीजे ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत के फैसले को रद्द करने, जाधव की रिहाई और उन्हें सुरक्षित भारत पहुंचाने की भारत सरकार की मांगों को खारिज कर दिया। फैसले को सुनाए जाने के दौरान भारत के नीदरलैंड स्थित राजदूत वेणु राजामणि और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव दीपक मित्तल, भारत के पैरवीकार हरीश साल्वे व विदेश मंत्रालय के पदाधिकारी मौजूद थे। पाकिस्तान की ओर से वहां के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल व अटॉर्नी जनरल समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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