ईरान की राजधानी तेहरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में सोमवार को लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे खामेनेई (86) के ताबूत को एक ट्रक में रखा गया। इसी ट्रक में उनके परिजनों के ताबूत भी रखे गए जो 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में इजरायल और अमेरिका के हवाई हमले में मारे गए थे। इस बीच ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने कई देशों से खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल न होने का आग्रह किया।

ईरानी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम संस्कार यात्रा में भाग लेने से देशों को रोकने के लिए एक राजनयिक अभियान शुरू किया जिसके बाद 13 देशों ने तेहरान में आयोजित इस कार्यक्रम से अपनी भागीदारी वापस ले ली या कम कर दी।

खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने से रोक रहा अमेरिका

ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी ने एक ईरानी सूत्र का हवाला देते हुए बताया कि अंतिम संस्कार जुलूस से एक हफ्ते पहले अमेरिका ने इस आयोजन में विदेशी भागीदारी को कम करने के उद्देश्य से एक राजनयिक अभियान शुरू किया था। अमेरिका ने इसके लिए कथित तौर पर विदेश मंत्री मार्को रुबियो और दुनिया भर में अमेरिकी राजदूतों को शामिल किया।

खबरों के मुताबिक अमेरिका ने दूतावासों और राजनयिक मिशनों के माध्यम से देशों को निर्देश दिया था कि अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होना एक अमित्रतापूर्ण कार्य के रूप में देखा जाएगा और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए इसके संभावित परिणाम हो सकते हैं। तसनीम समाचार एजेंसी ने आगे बताया कि दो अरब राजनयिकों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की और कहा कि विदेश मंत्री रुबियो ने कम से कम पांच अरब देशों से संपर्क कर उनसे खमेनेई के अंतिम संस्कार जुलूस से दूर रहने का आग्रह किया और कहा कि अगर वो अंतिम संस्कार में शामिल होने का विकल्प चुनते हैं तो इससे अमेरिका और अरब देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

13 देशों ने अंतिम संस्कार में भाग लेने से इनकार कर दिया

अमेरिका ने कथित तौर पर कई अफ्रीकी देशों को धमकी दी थी कि तेहरान में अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में उनकी भागीदारी से अमेरिकी विकास सहायता में कटौती हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 13 देशों ने तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार में या तो भाग लेने से इनकार कर दिया या अपना प्रतिनिधित्व वापस ले लिया, जिनमें तीन पूर्वी यूरोपीय देश, पांच अफ्रीकी राज्य, दो फारस की खाड़ी के अरब देश और दो प्रमुख पूर्वी एशियाई देश शामिल हैं।

ईरान ने भारत को जताया आभार

वहीं, दूसरी ओर ईरान ने खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी के लिए आभार और प्रशंसा व्यक्त की है। भारतीय दूतावास ने इस भाव को आपसी सम्मान की सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।

शुक्रवार को बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश मामलों की राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा सहित एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ भारत के सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं ने भी दिवंगत ईरानी नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

ट्रंप मुर्दाबाद के नारे

खामेनेई की अंतिम यात्रा में सोमवार को काले कपड़े पहने शोकाकुल लोगों की भारी भीड़ के बीच लोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। अंतिम यात्रा मार्ग के विभिन्न हिस्सों में मौजूद लोग तख्तियां, पोस्टर और बैनर लिए हुए थे जिन पर ट्रंप की मौत की मांग वाले नारे लिखे थे। वहीं, जहां अली खामेनेई का पार्थिव शरीर तीन दिनों तक रखा जाएगा उस मस्जिद में लाखों शोक संतप्त लोग लाल और सफेद झंडा लहरा रहे थे। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई की अंतिम यात्रा में हजारों लाल और सफेद झंडे शिया मुस्लिम परंपरा में “शहादत” और “प्रतिशोध” का प्रतीक हैं।

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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में करीब 2 करोड़ लोगों के जुटने की संभावना है। ऐसे में इस दौरान अगर कोई हादसा होता है तो ईरान इसके लिए तैयार है, वह करीबन 3000 तक की मौतों की तैयारी कर रहे हैं। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें