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तीसरा पक्ष नहीं हैं कश्मीरी अलगाववादी नेता: शरीफ

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि कश्मीरी अलगाववादी नेता ‘तीसरा पक्ष’ नहीं हैं और भारत के साथ ऐसी कोई भी बातचीत प्रक्रिया निरर्थक होगी जिसमें कश्मीर मुद्दा शामिल नहीं हो..

Author Published on: August 26, 2015 10:44 AM

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि कश्मीरी अलगाववादी नेता ‘तीसरा पक्ष’ नहीं हैं और भारत के साथ ऐसी कोई भी बातचीत प्रक्रिया निरर्थक होगी जिसमें कश्मीर मुद्दा शामिल नहीं हो। शरीफ ने कल कैबिनेट की बैठक में कहा, ‘कश्मीरी नेता तीसरा पक्ष नहीं हैं बल्कि इस मसले का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। उनके भविष्य के बारे में कोई फैसला उनकी राय और विचार विमर्श के बिना नहीं हो सकता।’

द डॉन की एक खबर के अनुसार शरीफ ने कैबिनेट से कहा कि बिना कश्मीर मुद्दे के भारत के साथ कोई भी बातचीत निरर्थक होगी। शरीफ की इस टिप्पणी के कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तरीय वार्ता आखिरी वक्त में रद्द कर दी थी। भारत ने पाकिस्तान से यह प्रतिबद्धता जताने को कहा था कि वह कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात नहीं करेगा।

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने शरीफ और कैबिनेट को वार्ता रद्द होने के संबंध में जानकारी दी। कैबिनेट ने देश की सुरक्षा स्थिति पर भी विचार विमर्श किया।

वार्ता की बहाली में कोई भूमिका नहीं- अमेरिका: उधर, अमेरिका ने भारत-पाक वार्ता की बहाली में अपनी किसी भूमिका से साफ इनकार करते हुए कहा है कि शांति वार्ता के दायरे और गति के बारे में दोनों देशों के नेताओं को फैसला करना है। विदेश विभाग के प्रवक्ता जान किर्बी ने अपनी दैनिक प्रेस कांफ्रेंस में कल कहा, ‘क्षेत्र में तनाव महत्त्वपूर्ण है। हम समझते हैं कि यह महत्त्वपूर्ण है कि दोनों देशों के नेता इस बातचीत को बहाल करें और किसी समाधान तक पहुंचने का प्रयास करें।’

किर्बी ने कहा, ‘हमने जो कहा है, खासकर कश्मीर में तनाव के बारे में, कि हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह ऐसा मुद्दा है जिसे भारत और पाकिस्तान को हल करने की आवश्यकता है।’ वह भारत और पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तरीय वार्ता के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। पाकिस्तान ने आखिरी समय में वार्ता रद्द कर दी थी।

उन्होंने कहा, ‘हम रचनात्मक बातचीत से उत्साहित थे। इसी साल रूस में भारत और पाकिस्तान के नेताओं के बीच रचनात्मक बातचीत शुरू हुई।’

उन्होंने कहा कि शांति वार्ता का दायरा और गति के बारे में दोनों देशों के नेताओं को फैसला करना है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि दोनों देश बैठें और अपने बीच के मुद्दों का हल करें। किर्बी ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद और विश्व के सामने बने खतरे पर अमेरिका का रुख वही है।

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