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कश्मीरी हिंदुओं ने मनाई जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की वर्षगांठ

ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं ने जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के समझौते ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ ऐक्सेशन’ पर महाराजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की 68वीं वर्षगांठ..

Author लंदन | October 30, 2015 12:25 AM

ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं ने जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के समझौते ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ ऐक्सेशन’ पर महाराजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की 68वीं वर्षगांठ मनाने के लिए ब्रिटिश संसद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। कश्मीरी पंडित्स कल्चरल सोसाइटी और वॉयस ऑफ डोगराज द्वारा इस हफ्ते के शुरू में संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम का समर्थन सांसद बॉब ब्लैकमैन के नेतृत्व वाले ऑल पार्टी पार्लियामेंटरी ग्रुप (एपीपीजी) फॉर ब्रिटिश हिन्दूज ने किया।

ब्लैकमैन ने संसद के कमेटी रूम में आयोजित बैठक में कहा, ‘खासकर ब्रिटिश हिंदू समुदाय की आवाज उठाने के लिए स्थापित ऑल पार्टी पार्लियामेंटरी ग्रुप फॉर ब्रिटिश हिंदूज के अध्यक्ष के रूप में मुझे जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के समझौते ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर दस्तखत किए जाने की 68वीं वर्षगांठ मनाए जाने का गर्व है।’

उन्होंने कहा, ‘सांसदों और समुदाय के सदस्यों को जम्मू कश्मीर के इतिहास के बारे में बताने के लिए सेमिनार इस तरह का पहला प्रयास है। यह इस तथ्य को स्थापित करता है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और 1947 से रहा है।’

कार्यक्रम में ‘हिस्ट्री ऑफ जम्मू कश्मीर (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) पर श्वेतपत्र जारी किया गया। सांसद, एपीपीजी फॉर ब्रिटिश हिंदूज के सह अध्यक्ष और एपीपीजी फॉर इंडिया के अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने कहा, ‘यह एक महत्त्वपूर्ण सेमिनार और जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की याद का एक कार्यक्रम है। 68 साल पहले इतिहास बना था, लेकिन दुखद रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच दीर्घकालिक संघर्ष की जड़ें भी पड़ गई। केवल यह समझकर कि वहां संघर्ष क्यों है, क्या हम इसे अपनी भविष्य की पीढ़ियों के लिए खत्म करने की उम्मीद कर सकते हैं।’

कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से संबंध रखने वाले सदस्य, खासकर डोगरा और कश्मीरी पंडित एकत्र हुए। कश्मीरी पंडित्स कल्चरल सोसाइटी की संस्थापक लक्ष्मी कौल ने कहा, ‘ब्रिटेन और यूरोप के अन्य हिस्सों में भी भारत विरोधी लॉबी बढ़ रही है जो लोगों को यह विश्वास कराना चाहती है कि ‘कश्मीरी’ आत्म निर्णय का अधिकार चाहते हैं। इस लॉबी ने क्षेत्र में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया है और उनकी संपूर्ण पहचान को खत्म करने का प्रयास किया है।’
उन्होंने कहा, ‘सेमिनार और स्मृति कार्यक्रम जम्मू कश्मीर क्षेत्र के समुदायों द्वारा यह बताने का संयुक्त प्रयास है कि राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है और 1947 से रहा है। यह निर्णय अंतिम था और इसे कानूनी व लोगों की इच्छा से हुआ समझौता बनाते हुए राज्य विधानसभा में 1954 में इसकी पुष्टि की गई।’

कौल ने यह भी कहा, ‘इसके विलय के समय से ही जम्मू कश्मीर और इसके लोग दिल से भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेते रहे हैं और अब इसे बदलने का कोई कारण ही नहीं है। जम्मू कश्मीर के इतिहास के इर्द-गिर्द के मिथकों को दूर करने के लिए श्वेतपत्र में ऐतिहासिक व कानूनी साक्ष्य रेखांकित किए गए हैं।’

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