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नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी ने बांग्लादेश में शुरु किया बाल अधिकार अभियान

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने बांग्लादेश में आज बाल अधिकार अभियान शुरू किया।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने बांग्लादेश में आज बाल अधिकार अभियान शुरू किया।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने बांग्लादेश में आज बाल अधिकार अभियान शुरू किया। इसका लक्ष्य वंचित तबके के बच्चों के लिए आवाज उठाने को लेकर दुनिया भर में समृद्ध परिवारों के करोड़ों बच्चों को लामबंद करना है। सत्यार्थी (63) ने कहा, ‘‘साथ मिल कर हम एक फर्क ला सकते हैं।’’ उन्होंने ‘10 करोड़ (बच्चों) के लिए 10 करोड़’ अभियान का शुभारंभ करते हुए यह कहा। उन्होंने कहा कि 10 करोड़ बच्चे बाल तस्करी, दासता और हिंसा के अन्य रूपों का सामना करते हैं जबकि 10 करोड़ युवा दुनिया में बदलाव चाहते हैं।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले साल दिसंबर में नयी दिल्ली में इस अभियान का शुभारंभ किया था जिसका लक्ष्य मुख्य रूप से सोशल मीडिया के जरिए बच्चों के बारे में जागरूकता लाना है। सत्यार्थी ने यहां अंतर संसदीय संघ (आईपीयू) सभा में कहा, ‘‘हम एक नयी सभ्यता बनाना चाहते हैं। आय अंतर धीरे धीरे बढ़ रहा है। सिर्फ आठ लोगों के पास दुनिया की कुल आबादी की आधी दौलत है।’ उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण ग्रह बनाने के लिए सबसे पहले आय असमानता को कम करना चाहिए जहां दुनिया के सभी बच्चों, सभी महिलाओं को समान सुविधाएं मिल सके। उन्होंने कहा, ‘‘कॉरपोरेट नेता शक्तिशाली हें लेकिन आप (सांसद) समाज की किसी ताकत से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं।’ उन्होंने संसद सदस्यों से दुनिया भर में बच्चों की दुर्दशा खत्म करने के लिए कार्रवाई करने को कहा।

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गौरतलब है इससे पहले बीते साल  मार्च में पश्चिम बंगाल सरकार की बालिकाओं के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजना ‘कन्याश्री’ की तारीफ करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा था कि वह मानव तस्करी के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। सत्यार्थी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा था कि पश्चिम बंगाल में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की एक महान विरासत है और आप मुझे पश्चिम बंगाल के अपने निजी समर्थकों में से एक समझें। इस क्षेत्र में आपका समर्थन करने के लिए मैं अपने सभी अनुभवों को देना चाहता हूं।’

अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि उन्होंने असम सरकार के साथ सहयोग से मानव तस्करी विरोधी कार्यक्रम पहले ही शुरू कर दिया है और मेघालय व महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में भी ऐसी ही योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल व बांग्लादेश की सीमा से पश्चिम बंगाल की भौगोलिक निकटता के कारण यह राज्य मानव तस्करी का स्रोत व गंतव्य स्थान दोनों रहा है और ‘द कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन्स फाउंडेशन’ इसके निवारक उपायों पर काम करना चाहता है।

सत्यार्थी ने कहा, ‘हमें तस्करी के स्रोत इलाकों की पहचान करनी है और इसके बाद निवारक उपायों जैसे शिक्षा पर और अधिक निवेश करना, स्कूलों में सभी बच्चों विशेषकर लड़कियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना, बालिकाओं व महिलाओं के लिए बेहतर सुविधाओं को उपलब्ध करना है ताकि मानव तस्कर उनके घरों में अपनी पैठ न बना सकें।

उन्होंने बाल विवाह को रोकने के लिए छात्राओं को छात्रवृत्ति देने वाली ‘कन्याश्री’ योजना की प्रशंसा की, लेकिन कहा कि बालिकाओं के लिए एक ही योजना काफी नहीं है। ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के संस्थापक ने कहा, ‘मैं इसका स्वागत करता हूं और तारीफ करता हूं कि सरकार ने एक अच्छी पहल की है, लेकिन यह सिर्फ एक ही गतिविधि है। आपको इससे और अधिक करने की जरूरत है। उतना ही महत्त्वपूर्ण कानून का शासन है। तस्करी बढ़ रही है। सबसे ज्यादा तस्करी यहांं से हो रही है।’

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