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आतंकियों को भूल पत्रकार के पीछे पड़ा पाक, डॉन अखबार के पत्रकार के देश छोड़ने पर रोक

आइएसआइ को कहा गया था कि आतंकी समूहों को उसकी ओर से समर्थन दिए से पाकिस्तान वैश्विक रूप से अलग-थलग पड़ रहा है।

Author इस्लामाबाद | Updated: October 12, 2016 1:57 AM
पाकिस्तान।

एक अहम बैठक में सैन्य और असैन्य नेतृत्व के बीच संदिग्ध दरार दिखाई देने की खबर देने वाले एक पत्रकार को पाकिस्तान छोड़ने से रोक दिया गया है। इस बैठक में ताकतवर खुफिया एजंसी आइएसआइ को कहा गया था कि आतंकी समूहों को उसकी ओर से समर्थन दिए से पाकिस्तान वैश्विक रूप से अलग-थलग पड़ रहा है। ‘द डॉन’ अखबार के स्तंभकार और संवाददाता सिरिल अलमीडा ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें बताया गया है कि उन्हें ‘निकास नियंत्रण सूची’ में रखा गया है। यह पाकिस्तान सरकार की सीमा नियंत्रण की व्यवस्था है। इसके तहत सूची में शामिल लोगों को देश छोड़ने से रोका जाता है। अलमीडा ने ट्वीट किया,‘मुझे बताया गया है और सूचित किया गया है और प्रमाण दिखाया गया है कि मैं निकास नियंत्रण सूची में हूं।’ उन्होंने कहा, ‘उलझन में हूं, दुखी हूं। कहीं जाने का कोई इरादा नहीं था। यह मेरा घर है। पाकिस्तान। मैं आज रात दुखी हूं। यह मेरी जिंदगी है, मेरा देश है। क्या गलत हो गया?’ अलमीडा ने कहा कि उन्होंने लंबे समय पहले से विदेश यात्रा की योजना बनाई हुई थी। उन्होंने कहा, ‘लंबे समय से एक यात्रा पर जाने की योजना थी। अब से कम से कम कई माह पहले की योजना। कई ऐसी चीजें हैं, जिन्हें मैं कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।’

सरकार ने इस प्रतिबंध पर आधिकारिक तौर से कोई बयान नहीं दिया है लेकिन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अधिकारियों से कहा था कि वे इस ‘मनगढंत’ कहानी को छापने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इसी बीच अलमीडा का ट्वीट पाकिस्तान में शीर्ष ट्रेंड में आ गया। उन्हें कई वरिष्ठ पत्रकारों का समर्थन मिलने लगा है। जियो के नजम सेठी ने ट्वीट किया, ‘असैन्य-सैन्य प्रतिष्ठान ने सायरिल (डॉन) को मूर्खता के साथ निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया को एक बड़ी खबर दे दी है। मीडिया को सायरिल अलमीडा और डॉन के साथ खड़ा होना चाहिए।’ ‘द न्यूज’ के वरिष्ठ पत्रकार अंसार अब्बासी ने कहा, ‘आप डॉन की खबर पर सवाल उठा सकते हैं। लेकिन सीरिल का नाम निकास नियंत्रण सूची में डालना गलत है। ‘डॉन’ की ओर से खबर पर खंडन प्रकाशित कर दिए जाने के बाद इस सब की जरूरत नहीं थी।’ जाहिद हुसैन ने कहा, ‘अपना काम करने के लिए सीरिल पर यात्रा प्रतिबंध लगा देना शर्मनाक है।’

इस घटना से एक सप्ताह पहले ही अलमीडा ने ‘द डॉन’ में पहले पन्ने पर पाकिस्तान के असैन्य और सैन्य नेतृत्व के बीच की दरार को लेकर खबर लिखी थी। उन्होंने लिखा था कि इस दरार की वजह वे आतंकी समूह हैं, जो पाकिस्तान से संचालित होते हैं। लेकिन भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ युद्धरत रहते हैं। बीते छह अक्तूबर को अलमीडा ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी थी कि आतंकियों को कथित समर्थन के मुद्दे पर शरीफ की असैन्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व वाली आइएसआइ के खुफिया प्रमुख के बीच हुई बैठक में कहासुनी हो गई थी। अलमीडा की खबर में कहा गया कि असैन्य सरकार ने सैन्य नेतृत्व को बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का बढ़ता अलगाव सैन्य नेतृत्व की ओर से आतंकवाद को कथित समर्थन देने के के कारण है।

पाकिस्तान की सरकार ने इस खबर को बार-बार खारिज किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री ने इस उल्लंघन का कड़ा संज्ञान लिया है और निर्देश दिया है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उनकी पहचान की जानी चाहिए।’ अलमीडा की यह खबर उड़ी में 18 सितंबर को भारतीय सैन्य अड्डे पर हुए हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में आई थी। पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की ओर से सैन्य अड्डे पर किए गए हमले में 19 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद 29 सितंबर को भारत ने नियंत्रण रेखा के पार सात आतंकी ठिकानों पर ‘सर्जिकल हमले’ किए थे। सेना ने कहा था कि उसने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसने की तैयारी कर रहे आतंकियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान ने भारत की ओर से किसी भी सर्जिकल हमले से इनकार करते हुए दावा किया कि भारतीय सैनिकों की ओर से नियंत्रण रेखा पर कथित संघर्षविराम उल्लंघन में दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

 

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