जापान अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की नई मिसाइलें तैनात करने की तैयारी कर रहा है। इन मिसाइलों के लॉन्चर सोमवार को एक आर्मी कैंप में पहुंच रहे हैं। चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने कहा कि अपग्रेडेड टाइप-12 लैंड-टू-शिप मिसाइलों को मार्च के आखिर तक जापान के साउथ-वेस्ट कुमामोटो इलाके के कैंप केंगुन में डिप्लॉय किया जाएगा। इससे डिप्लॉयमेंट का प्रोसेस पूरा हो जाएगा।

आर्मी की गाड़ियां अपने लॉन्चर और दूसरे इक्विपमेंट लेकर सुबह-सुबह एक बहुत ही सीक्रेट मिशन पर पहुंचीं, जिसकी कैंप के बाहर प्रोटेस्ट करने वाले लोकल लोगों ने आलोचना की। विरोधियों ने ट्रांसपेरेंसी की कमी की शिकायत की है और कहा है कि डिप्लॉयमेंट से टेंशन बढ़ेगा और मिसाइलें हमलों का टारगेट बन जाएंगी।

डिफेंस मिनिस्ट्री ने तैनाती का शेड्यूल एक साल बढ़ाया था आगे

पिछले साल डिफेंस मिनिस्ट्री ने मिसाइलों की तैनाती का शेड्यूल एक साल आगे बढ़ा दिया था, क्योंकि जापान दक्षिण-पश्चिमी इलाके में मिलिट्री बिल्डअप तेज कर रहा है। ऐसा इस वजह से क्योंकि चीन ताइवान के आसपास तनाव बढ़ा रहा है। मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा डेवलप और प्रोड्यूस की गई अपग्रेडेड टाइप-12 मिसाइल की रेंज लगभग 1000 किलोमीटर है और यह मेनलैंड चीन तक पहुंच सकती है, जो ओरिजिनल की 200 किलोमीटर रेंज से काफी ज्यादा है।

इसे इस साल के आखिर में टोक्यो के पश्चिम में शिजुओका में कैंप फूजी में तैनात किया जाएगा। जापान चीन को सुरक्षा के लिहाज से खतरा मानता है और उसने ईस्ट चाइना सी के पास दक्षिण-पश्चिमी आइलैंड्स पर मिलिट्री बिल्डअप को बढ़ावा दिया है। इसने ओकिनावा, इशिगाकी और मियाको सहित कई आइलैंड्स पर PAC-3 इंटरसेप्टर और मिडरेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइलें तैनात की हैं।

डिफेंस मिनिस्टर शिंजिरो कोइजुमी ने पिछले महीने कहा था कि जापान मार्च 2031 तक ताइवान के ठीक पूरब में, जापान के सबसे पश्चिमी आइलैंड योनागुनी पर मिडरेंज SAMs तैनात करेगा। प्रधानमंत्री साने ताकाइची के ऑफिस संभालने के तुरंत बाद इस कमेंट के बाद से तनाव और बढ़ गया है कि ताइवान के खिलाफ कोई भी चीनी मिलिट्री एक्शन जापानी मिलिट्री जवाब का आधार बन सकता है।

ताकाइची ने डिफेंस पॉलिसी ने बदलाव का वादा किया था

ताकाइची ने साल के आखिर तक सिक्योरिटी और डिफेंस पॉलिसी में बदलाव करने का वादा किया है और वह बिना पायलट वाले लड़ाकू हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ जापान की मिलिट्री को और मजबूत करना चाहते हैं। उनकी सरकार आने वाले हफ्तों में जानलेवा हथियारों के एक्सपोर्ट पर लगी रोक भी खत्म करने वाली है ताकि जापान की डिफेंस इंडस्ट्री के डेवलपमेंट और दोस्त देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके, यह उनकी पार्टी और उनके गवर्निंग कोएलिशन पार्टनर द्वारा हाल ही में पेश किए गए एक प्रपोजल पर आधारित है।

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चीन के 20 जापानी कपंनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट और 20 अन्य को वॉच लिस्ट में डाल दिया। ताइवान जिस पर बीजिंग अपना दावा करता है को लेकर जापानी नेताओ के पूर्व में दिए गए बयानों को लेकर जारी तनाव के बीच यह कदम सामने आया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि चीन के निर्यातकों को ‘डुअल-यूज गुड्स’ को 20 जपानी कंपनियों को बेचने से रोका जाएगा, जिसका इस्तेमाल सिविलियन और मिलिट्री दोनों मकसदों के लिए किया जा सकता है। पढ़ें पूरी खबर…