पराग : सिलिकान वैली में दबदबा बढ़ाने वाला एक और भारतीय

राजस्थान के अजमेर की धान मंडी में रहनेवाले परिवार का बेटा एक दिन धन के भंडार का मालिक हो गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पराग को दस लाख डालर का सालाना वेतन मिलेगा।

ट्विटर के नए सीईओ पराग अग्रवाल।

अमेरिका के सिलिकान वैली में कंपनियों के शीर्ष पदों पर भारतीयों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। अपने देश में हर क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद बेहतर अवसर की तलाश में अमेरिका जाने वाला भारतीय समुदाय वहां की कुल आबादी का एक फीसद ही है, लेकिन अपनी मेहनत, प्रतिभा, अनुभव, और काम के प्रति समर्पण के दम पर वे दुनियाभर के पेशेवरों पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे लोगों की फेहरिस्त में नया नाम पराग अग्रवाल का है, जिन्हें ट्विटर का नया सीईओ नियुक्त किया गया है।

राजस्थान के अजमेर की धान मंडी में रहनेवाले परिवार का बेटा एक दिन धन के भंडार का मालिक हो गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पराग को दस लाख डालर का सालाना वेतन मिलेगा। पराग अग्रवाल का जन्म 21 मई 1984 को राजस्थान के अजमेर शहर के सरकारी जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में हुआ था। उनके पिता रामगोपाल अग्रवाल नौकरी के सिलसिले में मुंबई चले गए।

पराग ने अटामिक एनर्जी स्कूल नं-4 से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद वर्ष 2000 में जेईई परीक्षा में देशभर में 77वां स्थान हासिल किया और वर्ष 2005 में आइआइटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह स्टेनफोर्ड यूनिर्विसटी से कप्यूटर साइंस में पीएचडी करने अमेरिका चले गए।

वह पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2011 में साफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर ट्विटर से जुड़े और साल दर साल सफलता की नई इबारत लिखते गए। उनकी प्रतिभा और काम के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें 2017 में कंपनी का सीटीओ अर्थात मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी बनाया गया और चार साल बाद अब वह जैक डोर्सी के इस्तीफे के बाद कंपनी के सीईओ अर्थात मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए गए।

इसे पराग अग्रवाल के कामकाज में बाजार का भरोसा ही कहेंगे कि ट्विटर के जो शेयर डोर्सी के इस्तीफे के बाद टूटने लगे थे, पराग के काम संभालने के बाद सुधरने लगे। उन्होंने भरोसा दिया है कि वे ट्विटर को ज्यादा से ज्यादा निरपेक्ष और संतुलित बनाने का प्रयास करेंगे।

पराग सहित भारत में जन्मे सिलिकान वैली के सीईओ 40 लाख की आबादी वाले अल्पसंख्यक भारतीय समुदाय का हिस्सा हैं, जो अमेरिका के सबसे धनी और सबसे ज्यादा पढ़े लिखे समुदायों में शुमार किए जाते हैं। गिनती की बात करें तो इनमें से लगभग 10 लाख वैज्ञानिक और इंजीनियर हैं और अमेरिकी सरकार विदेशियों को अपने देश में काम का अधिकार देने के लिए जो वर्क परमिट जारी करती है, उनमें से 70 फीसद भारतीयों के पास हैं। पराग की सफलता की यह कहानी कहने को भले एक दशक का सफर हो, लेकिन इसने पराग को सत्या नाडेला, सुंदर पिचाई और शांतनु नारायण जैसे दर्जन भर भारतीय पेशेवर दिग्गजों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।

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