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भारत से कपास और चीनी का आयात, महज 24 घंटे में क्यों पलट गया पाकिस्तान

इमरान खान भारत से रिश्ते बेहतरी को लेकर ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिन पर संसद में चर्चा नहीं हुई। इमरान पर इसका दबाव बना। साथ ही, भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी कश्मीर एक ऐसा मसला है जो भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

India and pakistan tradeभारत के साथ पाकिस्तान ने पहले व्यापार की बात कही और फिर मुकर गया।

हाल ही में पाकिस्तान ने भारत से कपास और चीनी के आयात को मंजूरी दी, लेकिन 24 घंटे के भीतर उसने अपना फैसला बदल लिया। दो साल से पाकिस्तान की सरकार ने रोक लगा रखी थी। पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) ने आयात पर लगी रोक हटाई थी। लेकिन घरेलू मोर्चे पर इस फैसले को लेकर वहां की इमरान खान सरकार आलोचना के केंद्र में आ गई थी। पहले से ही सेना से सहयोग न पाने के कारण असहज हो रहे इमरान खान की मुश्किलें बढ़ने के संकेत सामने आ गए। ऐसे में ईसीसी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की बैठक बुला ली, जिसमें इस पर यू-टर्न ले लिया गया। इस यू-टर्न के पीछे पाकिस्तान की घरेलू राजनीति से लेकर तालमेल की कमी को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। ईसीसी वहां की वित्त मंत्रालय का ही एक हिस्सा है। समिति के 90 फीसद फैसलों को मंत्रिमंडल स्वीकार कर लेती है। चीनी और कपास के मामले में भी ऐसा ही माना जा रहा था।

किस तरह के हैं दबाव
इमरान खान को इस समय विपक्षी दलों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भारत से आयात के फैसले पर विपक्ष हमलावर हो उठा। पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (पीएमएल-एन) के महासचिव अहसन इकबाल ने इमरान सरकार पर हमला करते हुए भारत से संबंधों और कश्मीर को लेकर सवाल उठाए। इकबाल ने कहा, जो लोग कश्मीर में भारतीय सैनिकों की क्रूरता की बात करते थे उन्होंने कपास, चीनी और अन्य सामान के भारत से आयात को तेज कर दिया। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी भी इस मुद्दे पर विरोध में है। दरअसल, मुस्लिम लीग (नवाज) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी समेत 11 विपक्षी पार्टियों का समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) पिछले कई महीनों से इमरान की सरकार के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

विपक्ष सवाल उठा रहा है कि इमरान खान भारत से रिश्ते बेहतरी को लेकर ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिन पर संसद में चर्चा नहीं हुई। इमरान पर इसका दबाव बना। साथ ही, भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी कश्मीर एक ऐसा मसला है जो भावनाओं से जुड़ा हुआ है। कश्मीर कई दूसरे मुद्दों पर हावी हो जाता है। कश्मीर में भी आयात शुरू करने के फैसले को लेकर नाराजगी थी। अब इमरान सरकार ने एक समिति गठित की है जिसे ये तुलनात्मक रिपोर्ट बनाने का काम सौंपा गया है कि पाकिस्तान को भारत के अलावा और किन देशों से सस्ती चीनी व कपास मिल सकते हैं। साथ ही इस पर भी विचार किया जाए कि भारत के साथ संबंध किस हद तक रखे जा सकते हैं।

चीनी का कारोबारी आधार
जब आयात की घोषणा की गई, तब पाकिस्तान के नए वित्त मंत्री हमाद अजहर ने बताया कि जो फैसला लिया गया है वह पाकिस्तान के उद्योगों की कुछ खास उत्पादों की जरूरत के चलते लिया गया है। उन्होंने कहा, भारत में चीनी की कीमत पाकिस्तान की तुलना में बहुत कम है। ऐसे में हमने तय किया कि भारत के साथ चीनी का व्यापार फिर से शुरू करेंगे। भारत से 0.5 मिलियन टन चीनी का आयात फैसला किया गया। जहां तक चीनी की बात है कि व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से दोनों देशों की एक दूसरे पर निर्भरता का ये परिणाम है और पाकिस्तान में चीनी की कमी भी एक कारण है। दिलचस्प है कि जुलाई-फरवरी 2020-21 के बीच पाकिस्तान का चीनी आयात 6,296 फीसद बढ़कर 278,733 मीट्रिक टन हो गया। यह वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसी अवधि के दौरान 4,358 मीट्रिक टन था। कीमत की बात करें तो पाकिस्तान ने चीनी के आयात पर 126.99 मिलियन (लगभग 12 करोड़ डॉलर) डॉलर से ज्यादा खर्च किया है।

कपास के कारोबार का हाल
साथ ही, भारत से कपास के आयात की मांग भी बहुत ज्यादा थी। पाकिस्तान की लघु और मध्यम उद्योग (एसएमई) की तरफ से भारत से कपास आयात की मांग लगातार की जा रही थी। पाक में वस्त्र निर्यात तो बढ़ा है लेकिन कपास की कम खेती से उद्योगों को चिंता में डाल दिया था। पाकिस्तान ब्यूरो स्टेटिस्टिक्स की तरफ से बताया गया है कि देश में 60 लाख कपास की गांठों की कमी है और पाक ने अब तक करीब 688,305 मीट्रिक टन कपास और सूत का आयात किया है। इस पूरे आयात के लिए देश पर 1.1 बिलियन डॉलर का बोझ आया है। 2019-20 में भारत का पाकिस्तान को कपास निर्यात बहुत तेजी से गिरा था और सिर्फ 64 मिलियन डॉलर (6.4 करोड़ डॉलर) का व्यापार हुआ था।

क्या कहते हैं जानकार

पाकिस्तान की सरकार जानती है कि अगर उसने ऐसा कोई फैसला लिया जो उसे भारत की तरफ कमजोर बताने वाला हो, तो इससे जनता में संकेत जाएगा कि इमरान सरकार का रुख कश्मीर मसले पर नरम हो चुका है।
– एअर मार्शल (रिटायर्ड) बिजॉय पांडे, रक्षा विशेषज्ञ

रिश्ते सामान्य करने का रास्ता खोजना ही होगा। भारत ने कहा है कि वह आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त माहौल में पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य करने को इच्छुक है और यह पाकिस्तान पर है कि वह आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त माहौल बनाए।
– केपी फाबियान, पूर्व राजनयिक

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