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जनसत्ता विशेषः अलविदा स्टीफन विलियम हॉकिंग

अलविदा स्टीफन विलियम हॉकिंग

Author March 15, 2018 02:20 am
गुत्थियों की दीवार तोड़ते हैं स्टीफन के विचार

गुत्थियों की दीवार तोड़ते विचार

’हम एक औसत तारे के छोटे से ग्रह पर रहने वाले बंदरों की एक उन्नत नस्ल हैं। लेकिन हम ब्रह्मांड को समझ सकते हैं। ये हमें कुछ खास बनाता है ।
’विज्ञान केवल तर्क का अनुयायी नहीं है, बल्कि रोमांस और जूनून का भी।
’49 सालों से मैं मरने का अनुमान लगा रहा हूं। मैं मौत से डरता नहीं हूं। मुझे मरने की कोई जल्दी नहीं है। उससे पहले मुझे बहुत सारे काम करने हैं।
’अतीत, भविष्य की तरह ही अनिश्चित है और केवल संभावनाओं के एक स्पेक्ट्रम के रूप में मौजूद है।
’मैंने नोटिस किया है कि ऐसे लोग जो यह विश्वास करते हैं कि वही होगा जो भाग्य में लिखा होगा, वही सड़क पार करने से पहले सड़क को गौर से देखते हैं
’मनुष्य की सबसे बड़ी सफलताएं बात करने से हासिल हुई हैं और सबसे ज्यादा विफलता नहीं बात करने से हुई है। हम लोगों को हमेशा बात करते रहने की जरूरत है।
’अगली बार जब आपको कोई यह कहे कि आपने गलती की है तो उससे कहें कि गलती करना अच्छी बात हो सकती है क्योंकि बिना गलतियों के न तो तुम और न मैं ही जिंदा रह सकता हूं।
’हम सोचते हैं हमने सृष्टि के सृजन की गुत्थी सुलझा ली है। शायद हमें ब्रह्मांड का पेटेंट करा लेना चाहिए और सभी से उनके अस्तित्व के लिए रॉयल्टी चार्ज करनी चाहिए।
’ ज्ञान एक ऐसी शक्ति है जो आपको बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता सिखाती है।
’मैं एक ऐसा बच्चा हूं जो कभी बड़ा नहीं हो पाया। मैं अभी भी ‘कैसे’ ‘क्यों’ का सवाल करता हूं।
’शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के लिए मेरी सलाह है कि आपको आपके शरीर की कमी कुछ भी अच्छा करने से नहीं रोक सकती है, और इसका कभी अफसोस भी नहीं करना चाहिए। अपने काम करने की स्पिरिट में अपंग होना बुरी बात है।
’हमेशा सितारों की ओर देखो न कि अपने पैरों की ओर। दूसरी बात कि कभी भी काम करना नहीं छोड़ो, कोई काम आपको जीने का एक मकसद देता है। बिना काम के जिंदगी खाली लगने लगती है। अगर आप खुशकिस्मत हुए और जिंदगी में आपको आपका प्यार मिल गया तो कभी भी इसे अपनी जिंदगी से बाहर मत फेंकना
’ जिंदगी दुखद होगी अगर ये अजीब ना हो।
’मुझे नहीं लगता कि मानव जाति अगले हजार साल बची रह पाएगी, जबतक कि हम अंतरिक्ष में विस्तार नहीं करते।
’मैं अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहता क्योंकि मैं एक सावर्जानिक संपत्ति बन जाऊंगा और मेरी कोई निजता नहीं रहेगी।
’मैं मानता हूं कि ब्रह्मांड विज्ञान के नियमों द्वारा संचालित होता है। हो सकता है ये नियम भगवान ने बनाए हों, लेकिन भगवान इन नियमों को तोड़ने के लिए हस्तक्षेप नहीं करता।
’ब्रह्मांड से बड़ा या पुराना कुछ भी नहीं।
’यदि आप ब्रह्मांड को समझते हैं तो एक तरह से आप इसे नियंत्रित करते हैं।
’मेरा विश्वास है कि चीजें खुद को असंभव नहीं बना सकतीं।
’दिव्य रचना से पहले भगवान क्या कर रहा था।
’हम यहां क्यों हैं? हम कहां से आते हैं? परंपरागत रूप से, ये फिलॉसफी के सवाल हैं, लेकिन फिलॉसफी मर चुकी है।

जन्म- 8 जनवरी 1942
आॅक्सफोर्ड, इंग्लैंड
निधन-14 मार्च 2018
आवास- ब्रिटेन
राष्ट्रीयता- ब्रितानी
क्षेत्र- सामान्य आपेक्षिकता
क्वांटम गुरुत्व
संस्थान- कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी
पेरिमीटर इंस्टिट्यूट फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स
शिक्षा-  यूनिवर्सिर्टी कॉलेज, आॅक्सफोर्ड
ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज
चिकित्सक सलाहकार- डेनिस स्कियमा

अन्य अकादमी सलाहकार-  रॉबर्ट बर्मन
चिकित्सक शिष्य- राफेल बौस्सो
प्रसिद्धि–  फेदोव्कर
गैरी गिबन्स
डॉन पेज
मैल्कम पेरी
हॉकिंग विकिरण
विचित्रता प्रमेय
ऐ ब्रीफ हिस्ट्री आॅफ टाइम (1988) (समय का संक्षिप्त इतिहास)
सम्मान– अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार (1978)
वॉल्फ प्राइज (1988)
प्रिंस आॅफ आॅस्टुरियस अवाडर्स (1989)
कोप्ले मेडल (2006)
प्रेसिडेंशियल मेडल आॅफ फ्रीडम (2009)
विशिष्ट मूलभूत भौतिकी पुरस्कार (2012)

महान विज्ञानी स्टीफन विलियम हॉकिंग मोटर न्यूरॉन बीमारी से पीड़ित होकर भी न्यूटन और आइंस्टीन की बिरादरी में शामिल हो गए। आज दुनिया में ऐसे कम ही लोग मिलते हैं, जिन्होंने ऐसा मुकाम पाया हो।

वॉल्फ प्राइज (1988)
प्रिंस आॅफ आॅस्टुरियस अवाडर्स (1989)
कोप्ले मेडल (2006)
प्रेसिडेंशियल मेडल आॅफ फ्रीडम (2009)
विशिष्ट मूलभूत भौतिकी पुरस्कार (2012)

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