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श्रीलंका: भारत से संबंधों को क्या मोड़ देंगे गोटबाया राजपक्षे

श्रीलंका की राजनीति पर निगाह रखने वालों का मानना है कि गोटबाया की जीत चीन के लिए फायदेमंद हो सकती है।

Author Published on: November 19, 2019 3:46 AM
गोटबाया को लिट्टे के साथ तीन दशक से चल रहे गृहयुद्ध को 2009 में निर्दयतापूर्ण तरीके से खत्म करने का श्रेय जाता है।

श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान विवादित रक्षा सचिव रहे गोटबाया राजपक्षे राष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं। राजपक्षे की विजय के बाद श्रीलंका में एक बार फिर चीन की गतिविधियां बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। श्रीलंका के राजनीतिक घरानों में से एक राजपक्षे परिवार का चीन के प्रति झुकाव जगजाहिर है। गोटबाया राजपक्षे वहां के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई हैं। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार साजिथ प्रेमदासा को हराया है। साजिथ प्रेमदासा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएएफ) का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका फ्रंट दक्षिणपंथी झुकाव वाले सत्तारूढ़ यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ गठबंधन का सदस्य है। 52 साल के साजिथ प्रेमदासा पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा के बेटे हैं।

श्रीलंका की राजनीति पर निगाह रखने वालों का मानना है कि गोटबाया की जीत चीन के लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि उनके बड़े भाई के सत्ता में रहते हुए श्रीलंका में चीन ने खूब निवेश किया था। महिंदा राजपक्षे 2005 तक सत्ता में रहे थे। महिंदा राजपक्षे ने चीन से अरबों डॉलर का उधार भी लिया था और कोलंबो बंदरगाह के द्वार चीन के युद्धपोतों के लिए खोल दिए थे। चीन ने कोलंबो बंदरगाह को भी विकसित करने में काफी बड़ी भूमिका निभाई है।

गोटबाया को लिट्टे के साथ तीन दशक से चल रहे गृहयुद्ध को 2009 में निर्दयतापूर्ण तरीके से खत्म करने का श्रेय जाता है। इसके लिए उन्हें टर्मिनेटर कहा जाता था। गोटबाया की अपने देश में खलनायक एवं नायक दोनों की छवि है। बहुसंख्यक सिंहली बौद्ध उन्हें युद्ध नायक मानते हैं। वहीं अधिकतर तमिल अल्पसंख्यक उन्हें खलनायक मानते हैं और अविश्वास की नजर से देखते हैं। गोटबाया राजपक्षे 52.25 फीसद वोटों से राष्ट्रपति चुनाव जीते हैं। वे अधिकांश सिंहल बहुल वाले दक्षिणी जिलों में जीते हैं, जबकि तमिल बहुसंख्यक वाले गृह युद्ध से प्रभावित उत्तरी प्रांत और मुस्लिम बहुल पूर्वी प्रांत में 65 से 70 फीसद वोटों से हार गए।

यह शंका जताई जा रही है कि राजपक्षे राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में धार्मिक और जातीय रूप से अल्पसंख्यकों के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। इससे देश में धार्मिक और जातीय तनाव उभर सकता है। घरेलू स्तर पर राजपक्षे को तेजी से कई काम निबटाने होंगे। 2020 में संसदीय चुनाव होने हैं और देश की अर्थव्यवस्था सुस्त है, भ्रष्टाचार चरम पर है और जातीय तनाव व्याप्त है।

गोटबाया का भारत से पुराना नाता रहा है। उन्होंने 1980 में असम में उग्रवाद विरोधी अभ्यास में हिस्सा लिया था। 1983 में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। बतौर रक्षा सचिव वह 2012 और 2013 में भारत की यात्रा पर आए थे। राजनयिक स्तर पर भारत उम्मीद कर रहा है कि श्रीलंका की नई सरकार के साथ रिश्ते बेहतर होंगे, क्योंकि भारत कोलंबो बंदरगाह में ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल बनाने को लेकर श्रीलंका के साथ एक समझौता कर चुका है। भारत आने वाला बहुत सारा सामान इसी कोलंबो बंदरगाह से होकर आता है। ऐसे में श्रीलंका में कोई भी सत्ता में रहे भारत उससे संबंध खराब करना नहीं चाहेगा। रणनीतिक लिहाज से श्रीलंका अहम है। भारत और चीन-दोनों ही के रणनीतिक व कूटनीतिक हित वहां से जुड़े हैं। हिंद महासागर में श्रीलंका की मौजूदगी, व्यापारिक दृष्टि से दोनों देशों के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है।

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