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रूस में संविधान क्यों बदल रहे हैं राष्ट्रपति पुतिन

पुतिन ने मार्च 2018 में राष्ट्रपति पद के लिए जीत दर्ज की थी ये उनकी चौथी जीत थी।

पुतिन ने अपने भाषण में एक के बाद एक कई बड़ी घोषणाएं कीं। (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश का संविधान बदलने का प्रस्ताव रखा है। 27 साल पुराने संविधान को बदलने के लिए पुतिन देशभर में जनमत संग्रह कराएंगे। उनके पक्ष में यह जनमत संग्रह आया तो ही वे संविधान बदल सकेंगे। इस प्रस्ताव के आने के बाद प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव समेत पूरी कैबिनेट ने इस्तीफा दे दिया।

नए साल का भाषण देते हुए मेदवेदेव ने संकेत दिए थे कि साल की शुरुआत से ही उनके दिन गिनने की शुरुआत हो सकती है। 15 जनवरी को टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संदेश में पुतिन ने बदलाव का प्रस्ताव रखा। पुतिन ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर मिखाइल मिशुस्तिन जैसे नए चेहरे को सामने लाकर लंबी पारी खेलने की तैयारी की है। रूस के सत्ताधारी दल यूनाइटेड रशिया ने मिशुस्तिन की उम्मीदवारी पर मुहर लगा दी है। रूसी संसद के निचले सदन ड्यूमा में यूनाइटेड रशिया पार्टी का बहुमत होने के कारण इस प्रस्ताव के स्वीकार होने की उम्मीद है।

संवैधानिक बदलावों के माध्यम से पुतिन राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रख सकेंगे। पुतिन ने अपने भाषण में एक के बाद एक कई बड़ी घोषणाएं कीं। इसके बाद से ही अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि 2024 में राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद पुतिन अपना भविष्य कैसे सुनिश्निचित करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि वर्ष 1999 से ही रूस की सत्ता संभालने वाले 67 साल के पुतिन या तो फिर प्रधानमंत्री बनेंगे या अपने लिए किसी नए पद का गठन करेंगे।

अपने भाषण में पुतिन में जिन अहम बदलावों की बात की, उनमें राष्ट्रपति के हाथ से कई अधिकार संसद को देने का प्रस्ताव है। जैसे कि देश के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट सदस्यों को चुनने का अधिकार वह संसद को देना चाहेंगे। 1993 में रूस ने यह संविधान लागू किया था। तब से लेकर यह पहला बदलाव होगा, जिसे पुतिन रूसी जनता से आ रही बदलाव की मांग बता रहे हैं।

पुतिन ने मार्च 2018 में राष्ट्रपति पद के लिए जीत दर्ज की थी ये उनकी चौथी जीत थी। पुतिन 2024 तक राष्ट्रपति पद पर रहेंगे। संविधान के हिसाब से पुतिन अगली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते। वर्तमान संविधान के मुताबिक एक व्यक्ति लगातार दो बार से अधिक राष्ट्रपति नहीं रह सकता। पुतिन 2000 से 2008 तक दो बार राष्ट्रपति रहे। तब राष्ट्रपति कार्यकाल चार साल का ही होता था। इसके बाद उन्होंने 2008 में अपने साथी मेदवेदेव को राष्ट्रपति बनवाया। तब पुतिन ने खुद मेदवेदेव का प्रचार किया और मेदवेदेव ने यह वादा किया कि अगर वे जीते तो पुतिन को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे।

मेदवेदेव के राष्ट्रपति रहते हुए ही उन्होंने सितंबर 2011 में राष्ट्रपति का कार्यकाल छह साल करा लिया और जब 2012 में मेदवेदेव ने इस पद पर कार्यकाल पूरा किया तो एक बार फिर पुतिन इस पद पर आ गए। छह साल बाद 2018 में उन्होंने फिर राष्ट्रपति का चुनाव जीता। इस तरह उन्हें 2024 तक तो कोई खतरा नहीं है।

मेदवेदेव की छवि एक उदार राजनेता की रही है। पुतिन ने मेदवेदेव को रूस की सुरक्षा परिषद में डिप्टी सेक्रेटरी का पद देने की घोषणा की है। पुतिन ने कहा, ‘मैंने रूस की सुरक्षा समिति में डिप्टी सेक्रेटरी का पद सृजित करने का मन बनाया है।’ रूसी सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता पुतिन करते हैं।

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