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Google ने Doodle बना किया जेम्स वोंग होवे को याद, बनना चाहते थे बॉक्सर, जीते दो ऑस्कर

James Wong Howe Google Doodle: जेम्स वोंग होवे ने अपने करियर की शुरुआत एक फोटोग्राफर के सहायक के रूप में की थी।
James Wong Howe Google Doodle: जेम्स वोंग होवे ने 12 साल की उम्र में ही कोडक ब्राउनी कैमरा खरीदा था, तभी से उनका लगाव इसके प्रति हो गया था।

गूगल डूडल बनाकर किसी महान व्यक्ति या दिन को सेलिब्रेट करता है। गूगल ने आज (28 अगस्त) सिनेमेटोग्राफर जेम्स वोंग होवे (James Wong Howe) के 118वें जन्मदिन पर डूडल तैयार किया है। जेम्स वोंग होवे चीनी अमेरिकी सिनेमेटोग्राफर थे। चीन के गुआंगजौ में जन्में जेम्स वोंग होवे जब पांच साल के थे वह तभी अमेरिका चले गए थे, यहां उन्होंने अपनी मेहनत से काफी नाम कमाया। जेम्स वोंग होवे ने सिनेमेटोग्राफी की दुनिया कई प्रयोग किए जो सफल भी हुए। यही कारण है कि वह इस क्षेत्र में एक बड़ी हस्ती के तौर पर उभरे। 1930 -1940 के दशक में हॉलीवुड में जेम्स वोंग होवे की सबसे ज्यादा मांग थी। उन्हें 10 बार सिनेमेटोग्राफी के अकेडमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था। उन्हें 1955 में रोज टैटू और 1963 में हुड अवार्ड से नवाजा गया था। सन 1976 में इस महान सिनेमेटोग्राफर की मौत हो गई थी।

अपने पिता की मृत्यु के बाद, किशोरावस्था में होवे ने अपने चाचा के साथ रहने के लिए ओरेगन में चले गए और (1915-16) एक बेंटमवेट बॉक्सर के रूप में अपना करियर बनाने लगे। उन्होंने बाॉक्सिंग के दौरान 5 फाइट जीतीं, 2 हारीं और एक ड्रॉ रही। इसके बाद वह एविएशन सेक्टर में अपना कैरियर बनाने के लिए  सैन फ्रांसिस्को के खाड़ी क्षेत्र में चले गए, लेकिन पैसे की कमी के कारण यहां से वह साउथ लॉस एंजिलिस चले गए। इसके बाद उन्होंने कई काम किए। उन्होंने कॉमर्शियल फोटोग्राफर और बेवर्ली हिल्स होटल में  डिलिवरी बॉय के तौर पर भी काम किया।

जेम्स वोंग होवे ने अपने करियर की शुरुआत एक फोटोग्राफर के सहायक के रूप में की थी। इस दौरान उन्होंने लाइटिंग, फ्रेमिंग और कैमरा मूवमेंट को काफी बारीकी से देखा और जाना। फिल्म स्टूडियो में रहते हुए उनका झुकाव सिनेमेटोग्राफी की तरफ बढ़ा और उन्होंने उसी में आगे काम किया और नाम कमाया। अमेरिका के रहने वाले जेम्स वोंग होवे को रंगभेद का भी सामना करना पड़ा था। 1950 के दशक के आखिर तक वह अपने पेशे के शीर्ष पर थे। बाद में खराब स्वास्थ्य की वजह से उन्होंने फिल्मों से किनारा कर लिया था। अमेरिका में परवरिश के दौरान भी जेम्स वोंग होवे को वहां के स्थानीय बच्चों के बीच रंगभेद का सामना करना पड़ा था। अमेरिकी बच्चे उनके साथ खेलने से मना कर देते थे।

जेम्स वोंग होवे ने 12 साल की उम्र में ही कोडक ब्राउनी कैमरा खरीदा था, तभी से उनका लगाव इसके प्रति हो गया था। शुरुआती दिनों में जेम्स वोंग होवे को ड्रम्स ऑफ फेट (1923) और ट्रॉयल ऑफ द लोनसम पाइन (1923) फिल्मों से पहचान मिली। इसके बाद 1926 में आई फिल्म पारामाउंट मैनट्रैप और 1928 में आई फिल्म लाफ में जेम्स के काम को काफी सराहा गया।

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