प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। उन्होंने यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने की अपील भी की थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन का दौरा किया। राजधानी कीव में उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदना बंद करने से लड़ाई खत्म नहीं होगी। जयशंकर ने बातचीत और कूटनीति की जरूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए किसी भी तरह से मदद करने को तैयार है।

डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग एक्ट दिखाते हुए जयशंकर का यूक्रेन का द्विपक्षीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पीएम मोदी कुछ हफ़्तों के अंदर पुतिन से दो बार मिल रहे हैं। 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (SCO) लीडर्स के समिट के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से मुलाकात की और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट में मुलाकात होने वाली है।

ज़ेलेंस्की से जयशंकर ने की मुलाकात

यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मिलने के अलावा जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से भी मुलाकात की। सिबिहा ने युद्ध के अंत की ओर बढ़ने की पीएम मोदी की अपील का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन डिप्लोमेसी के लिए तैयार है। X पर एक पोस्ट में जेलेंस्की ने भारत को इस गलत युद्ध को खत्म करने के कमिटमेंट के लिए धन्यवाद दिया।

सिबिहा से बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “यह झगड़ा आज अपने पांचवें साल में है। ये इसलिए खत्म नहीं होगा कि कोई तेल या एल्यूमिना या मिनरल या मेटल खरीद रहा है या नहीं खरीद रहा है, यह झगड़ा बातचीत से, डिप्लोमेसी, नेगोशिएशन से हल होगा। इसीलिए हम इसे बढ़ावा देंगे।”

140 करोड़ लोगों के लिए तेल सप्लाई पक्का करना एक चुनौती- जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि भारत के 140 करोड़ लोगों के लिए तेल सप्लाई पक्का करना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि वह रूस से तेल खरीदने पर यूक्रेन की स्थिति का सम्मान करते हैं, लेकिन भारत की स्थिति के लिए भी उसी सम्मान की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा, “भारत ने लगातार कहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है और युद्ध के मैदान से कोई हल नहीं निकलेगा। अभी दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया कि कभी न खत्म होने वाली लड़ाई की जगह अब युद्ध का अंत होना चाहिए। लड़ाई का हर गुजरता दिन सिर्फ़ और ज़्यादा मौतें और और ज़्यादा तबाही का मतलब है। ज़ाहिर है, इसमें शामिल पार्टियों को ही कोई रास्ता निकालना है। लेकिन अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं और विदेश मंत्री सिबिहा के साथ मेरी अब तक की बातचीत का यही मुख्य मुद्दा था।”

हालांकि जयशंकर अगस्त 2024 में पीएम मोदी के साथ यूक्रेन गए थे, लेकिन यह उनका पहला द्विपक्षीय दौरा था। जयशंकर ने कहा कि गुरुवार को हुई बातचीत में लड़ाई के कुछ खास पहलू सामने आए। उन्होंने कहा, “अहम मुद्दे कमर्शियल शिपिंग पर हमले थे। भारतीय नाविक कई झंडों वाले जहाजों पर सवार हैं और बदकिस्मती से मारे गए लोगों में से हैं। शिपिंग पर इसका असर ग्लोबल साउथ के कई देशों पर भी कई तरह से पड़ रहा है, जिससे तेल, फर्टिलाइज़र और खाने की कमी हो रही है।” जयशंकर इस साल जुलाई से रूस और यूक्रेन के बीच गोलीबारी में मारे गए पांच नाविकों समेत भारतीयों की मौत का ज़िक्र कर रहे थे।

X पर एक पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि उन्होंने ज़ेलेंस्की को सिबिहा के साथ हमारे आपसी सहयोग को गहरा करने पर हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमारी बातचीत चल रहे झगड़े को खत्म करने के तरीकों पर केंद्रित थी।

जेलेंस्की ने क्या कहा?

जेलेंस्की ने X पर अपनी पोस्ट में कहा, “हम इस गलत लड़ाई को खत्म करने के भारत के वादे के लिए शुक्रगुजार हैं और ये यूक्रेन के खिलाफ रूस की लड़ाई है। यह निश्चित रूप से लड़ाई का समय नहीं होना चाहिए। शांति की ज़रूरत है। यह भारत की साफ राय है। आज जब मंत्री जयशंकर हमारे साथ कीव में थे, रूस ने एक बार फिर जेट से चलने वाले ‘शहीद’ लॉन्च किए, जिन्हें ईरान की मदद के बिना नहीं बनाया गया था। हमारे लड़ाकू विमान की वजह से डेलीगेशन सुरक्षित रहा, क्योंकि यूक्रेन के फाइटर जेट ही इनमें से ज़्यादातर ड्रोन को मार गिराते हैं। हमें उम्मीद है कि दुनिया की दूसरी बड़ी ताकतें भी यह साफ राय लेंगी कि यह लड़ाई खत्म होनी चाहिए और एक भरोसेमंद शांति होनी चाहिए। बेशक, हमने ब्लैक सी के हालात पर बात की, जिसमें सिविलियन शिपिंग के लिए मौजूदा खतरे भी शामिल हैं। हम इस बात से सहमत हैं कि उन इलाकों में खाने की सप्लाई रोकना बिल्कुल मंज़ूर नहीं है जहां यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है और लोग इन समुद्री रास्तों पर निर्भर हैं। हमारे पोर्ट, हमारे फ़ूड कॉरिडोर और हमारी सप्लाई को रोकने के मकसद से रूस की हरकतें ग्लोबल रिश्तों में बड़ी रुकावट डाल रही हैं। सुरक्षा की गारंटी के लिए हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए।”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में पिछले कई महीनों से चल रहे तनाव और सुरक्षा हालात के बीच दोनों नेताओं की इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां पढ़ें पूरी खबर…