इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इजरायल को ‘इंसानियत के लिए अभिशाप’ या ‘कैंसर जैसा देश’ कहना बिल्कुल गलत और आपत्तिजनक है। शुक्रवार को दिए गए अपने बयान में नेतन्याहू ने साफ कहा कि किसी भी देश को इजरायल को खत्म करने जैसी बात नहीं करनी चाहिए, खासकर तब जब वही देश खुद को शांति वार्ता में निष्पक्ष बताता हो।
दरअसल, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इजरायल के खिलाफ तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि इजरायल एक बुराई है और इंसानियत के लिए अभिशाप है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, उसी दौरान लेबनान में नरसंहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान – इजरायल लगातार निर्दोष लोगों का खून बहा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीनी जमीन पर यूरोपीय यहूदियों को बसाने के लिए बनाए गए इस “कैंसर जैसे देश” को बनाने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
मिडिल ईस्ट में शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की निष्पक्ष भूमिका पर सवाल खड़े हो गए
इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में चल रही शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की निष्पक्ष भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक तरफ रक्षा मंत्री का बयान बेहद आक्रामक माना जा रहा है, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने कूटनीति पर जोर देने की बात कही। उन्होंने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज (Friedrich Merz) से फोन पर बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान शांति प्रयासों में पूरी ईमानदारी से जुटा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष विराम का पालन करना बेहद जरूरी है, तभी बातचीत से कोई ठोस और स्थायी नतीजा निकल सकता है।
इससे पहले, भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार (Reuven Azar) ने भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि इजरायल पाकिस्तान को शांति वार्ता में एक भरोसेमंद पक्ष नहीं मानता। उनका कहना था कि अमेरिका ने अपने कुछ कारणों से पाकिस्तान को इस प्रक्रिया में शामिल किया है, जैसा कि पहले कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ भी किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल के लिए अमेरिका के साथ तालमेल बनाए रखना सबसे अहम है, खासकर उस नतीजे को लेकर जो वह इस वार्ता से चाहता है।
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अमेरिका-ईरान सीजफायर से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक्स पर मंगलवार को जो पोस्ट किया था, उसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय को पहले से थी। पाक पीएम ने यह पोस्ट व्हाइट हाउस से मंजूरी मिलने के बाद ही एक्स पर पोस्ट की थी। अमेरिका स्थित न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की रिपोर्ट ने ऐसा दावा किया। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि क्या वाशिंगटन ने युद्धविराम की घोषणा करने से पहले इस्लामाबाद का इस्तेमाल एक संकेत के रूप में किया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
